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“नगर निगम बजट में देरी पर बढ़ा विवाद, महापौर ने जताई नाराजगी; पार्षदों ने भी उठाए सवाल”
भोपाल (म.प्र.)
महापौर ने प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के लगाए आरोप
नगर निगम के वार्षिक बजट को लेकर शहर में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। समय सीमा नजदीक होने के बावजूद बजट प्रक्रिया में हो रही देरी पर महापौर ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए स्थिति को चिंताजनक बताया है।
महापौर ने आरोप लगाया कि बजट तैयार करने और उसे परिषद में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, बजट मसौदे में संशोधन के बाद भी आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली के अनुसार, बजट को परिषद में पेश करने से पहले संबंधित समिति की बैठक होना आवश्यक है। हालांकि, अब तक यह बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। इस देरी के कारण बजट समय पर पारित होने को लेकर संशय की स्थिति बन गई है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब यह जानकारी सामने आई कि संबंधित अधिकारी अवकाश पर हैं, जबकि इसकी औपचारिक सूचना जनप्रतिनिधियों को नहीं दी गई। इसे लेकर महापौर ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि इस प्रकार की कार्यशैली से समन्वय प्रभावित होता है।
इधर, पार्षदों का कहना है कि बजट में देरी से विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले बजट पारित नहीं हुआ, तो योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होगा और जनता से जुड़े कई कार्य लंबित रह सकते हैं।
नगर निगम का बजट शहरी विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में इसकी समयबद्ध तैयारी और प्रस्तुति प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है, ताकि विकास कार्यों में बाधा न आए। वर्तमान स्थिति में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
फिलहाल, बजट पेश करने की समय सीमा में केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी दिनों में प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या समय रहते बजट प्रक्रिया पूरी हो पाती है।
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“नगर निगम बजट में देरी पर बढ़ा विवाद, महापौर ने जताई नाराजगी; पार्षदों ने भी उठाए सवाल”
भोपाल (म.प्र.)
नगर निगम के वार्षिक बजट को लेकर शहर में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। समय सीमा नजदीक होने के बावजूद बजट प्रक्रिया में हो रही देरी पर महापौर ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए स्थिति को चिंताजनक बताया है।
महापौर ने आरोप लगाया कि बजट तैयार करने और उसे परिषद में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, बजट मसौदे में संशोधन के बाद भी आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली के अनुसार, बजट को परिषद में पेश करने से पहले संबंधित समिति की बैठक होना आवश्यक है। हालांकि, अब तक यह बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। इस देरी के कारण बजट समय पर पारित होने को लेकर संशय की स्थिति बन गई है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब यह जानकारी सामने आई कि संबंधित अधिकारी अवकाश पर हैं, जबकि इसकी औपचारिक सूचना जनप्रतिनिधियों को नहीं दी गई। इसे लेकर महापौर ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए और कहा कि इस प्रकार की कार्यशैली से समन्वय प्रभावित होता है।
इधर, पार्षदों का कहना है कि बजट में देरी से विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले बजट पारित नहीं हुआ, तो योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होगा और जनता से जुड़े कई कार्य लंबित रह सकते हैं।
नगर निगम का बजट शहरी विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में इसकी समयबद्ध तैयारी और प्रस्तुति प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है, ताकि विकास कार्यों में बाधा न आए। वर्तमान स्थिति में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
फिलहाल, बजट पेश करने की समय सीमा में केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी दिनों में प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या समय रहते बजट प्रक्रिया पूरी हो पाती है।
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