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गुना रिश्वत कांड: 20 लाख लेने अगले दिन लौटी गुजरात की कार, 5 घंटे शहर में रही
गुना (म.प्र.)
निलंबित पुलिसकर्मियों ने कबूली रिश्वत लेने की बात, टोल रिकॉर्ड से खुलासा; एसपी पर भी गिरी गाज
मध्यप्रदेश के गुना जिले में 1 करोड़ रुपए नकद जब्ती और 20 लाख रुपए की कथित रिश्वत के मामले में नया खुलासा हुआ है। टोल नाके के रिकॉर्ड से पता चला है कि गुजरात नंबर की जिस कार को पुलिस ने रोका था, वह घटना के अगले ही दिन 20 मार्च को दोबारा गुना पहुंची और करीब पांच घंटे तक क्षेत्र में मौजूद रही। इस दौरान 20 लाख रुपए लौटाने की बात सामने आ रही है।
नेशनल हाईवे-46 स्थित पगारा टोल प्लाजा के आंकड़ों के मुताबिक, कार (GJ 05 RK 9351) शाम 4:15 बजे रूठियाई की ओर दाखिल हुई और रात 9:29 बजे वापस ब्यावरा की दिशा में निकल गई। इस अवधि में वाहन करीब पांच घंटे तक गुना और आसपास के क्षेत्र में रहा। टोल एंट्री ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पुलिस और कारोबारी के बीच पैसों का लेनदेन इसी दौरान हुआ।
इस मामले में निलंबित किए गए चार पुलिसकर्मियों ने भी जांच के दौरान कैश मिलने और 20 लाख रुपए लेने की बात स्वीकार कर ली है। यह खुलासा जांच को और गंभीर बना रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब वाहन में 1 करोड़ रुपए जैसी बड़ी रकम मिली थी, तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों या आयकर विभाग को क्यों नहीं दी गई।
घटना 19 मार्च की रात की है, जब रूठियाई चौकी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान गुजरात के एक व्यापारी की कार रोकी गई थी। कार में बड़ी मात्रा में नकदी पाई गई। आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय 20 लाख रुपए लेकर वाहन को छोड़ दिया।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब 20 मार्च को गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन आने के बाद कथित रूप से ली गई रकम वापस कर दी गई। इसके बाद ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने मौके पर पहुंचकर जांच की और चार पुलिसकर्मियों—थाना प्रभारी प्रभात कटारे, एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन—को निलंबित कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया गया है। उनके स्थान पर आईपीएस हितिका वासल ने पदभार संभाल लिया है। नई एसपी ने कार्यभार ग्रहण करते ही जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशिक्षु आईपीएस आयुष जाखड़ इसकी पड़ताल कर रहे हैं। टोल रिकॉर्ड, पुलिसकर्मियों के कबूलनामे और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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गुना रिश्वत कांड: 20 लाख लेने अगले दिन लौटी गुजरात की कार, 5 घंटे शहर में रही
गुना (म.प्र.)
मध्यप्रदेश के गुना जिले में 1 करोड़ रुपए नकद जब्ती और 20 लाख रुपए की कथित रिश्वत के मामले में नया खुलासा हुआ है। टोल नाके के रिकॉर्ड से पता चला है कि गुजरात नंबर की जिस कार को पुलिस ने रोका था, वह घटना के अगले ही दिन 20 मार्च को दोबारा गुना पहुंची और करीब पांच घंटे तक क्षेत्र में मौजूद रही। इस दौरान 20 लाख रुपए लौटाने की बात सामने आ रही है।
नेशनल हाईवे-46 स्थित पगारा टोल प्लाजा के आंकड़ों के मुताबिक, कार (GJ 05 RK 9351) शाम 4:15 बजे रूठियाई की ओर दाखिल हुई और रात 9:29 बजे वापस ब्यावरा की दिशा में निकल गई। इस अवधि में वाहन करीब पांच घंटे तक गुना और आसपास के क्षेत्र में रहा। टोल एंट्री ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पुलिस और कारोबारी के बीच पैसों का लेनदेन इसी दौरान हुआ।
इस मामले में निलंबित किए गए चार पुलिसकर्मियों ने भी जांच के दौरान कैश मिलने और 20 लाख रुपए लेने की बात स्वीकार कर ली है। यह खुलासा जांच को और गंभीर बना रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब वाहन में 1 करोड़ रुपए जैसी बड़ी रकम मिली थी, तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों या आयकर विभाग को क्यों नहीं दी गई।
घटना 19 मार्च की रात की है, जब रूठियाई चौकी क्षेत्र में चेकिंग के दौरान गुजरात के एक व्यापारी की कार रोकी गई थी। कार में बड़ी मात्रा में नकदी पाई गई। आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय 20 लाख रुपए लेकर वाहन को छोड़ दिया।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब 20 मार्च को गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन आने के बाद कथित रूप से ली गई रकम वापस कर दी गई। इसके बाद ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने मौके पर पहुंचकर जांच की और चार पुलिसकर्मियों—थाना प्रभारी प्रभात कटारे, एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन—को निलंबित कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया गया है। उनके स्थान पर आईपीएस हितिका वासल ने पदभार संभाल लिया है। नई एसपी ने कार्यभार ग्रहण करते ही जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशिक्षु आईपीएस आयुष जाखड़ इसकी पड़ताल कर रहे हैं। टोल रिकॉर्ड, पुलिसकर्मियों के कबूलनामे और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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