मध्यप्रदेश ने रक्षा उत्पादन और रखरखाव के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री में पहली बार भारतीय सेना के T-72 मेन बैटल टैंकों की ओवरहॉलिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत ओवरहॉल किए गए दो T-72 टैंक मंगलवार, 28 जनवरी 2026 को भारतीय सेना को सौंपे जाएंगे। यह रोलआउट शाम करीब चार बजे प्रस्तावित है।
अब तक भारतीय सेना के बैटल टैंकों की ओवरहॉलिंग का कार्य मुख्य रूप से तमिलनाडु के आवड़ी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री में ही होता था। सेना की बढ़ती जरूरतों और ओवरहॉल की लंबी प्रतीक्षा सूची को देखते हुए आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री को अतिरिक्त क्षमता विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
AVNL की ओर से वर्ष 2025 के अप्रैल-मई में VFJ को T-72 टैंकों के पायलट ओवरहॉल की औपचारिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद फैक्ट्री ने आवश्यक तकनीकी संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार कर सेना के निर्धारित मानकों के अनुसार काम शुरू किया। करीब नौ महीने के भीतर यह कार्य पूरा कर लिया गया, जिसे रक्षा उत्पादन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण समयबद्ध उपलब्धि माना जा रहा है।
फैक्ट्री प्रबंधन के अनुसार, ओवरहॉल प्रक्रिया के दौरान भारतीय सेना की सभी तकनीकी विशिष्टताओं और गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन किया गया। यह साबित करता है कि व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर अब टैंकों की मरम्मत और रखरखाव के जटिल कार्यों के लिए पूरी तरह सक्षम हो रही है।
इस मौके पर मास्टर जनरल सस्टेंस (MGS) और AVNL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक भी उपस्थित रहेंगे। व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि आवड़ी फैक्ट्री पर लगातार बढ़ते कार्यभार को देखते हुए वैकल्पिक क्षमता विकसित करना जरूरी हो गया था। इसी उद्देश्य से जबलपुर में टैंक ओवरहॉलिंग की सुविधा विकसित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल यह काम पायलट आधार पर किया गया है, लेकिन आने वाले वित्तीय वर्ष से इसे नियमित रूप से शुरू करने की योजना है। इसके लिए अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, नई मशीनरी और विशेष टूल्स खरीदे जाएंगे, जबकि कुछ उपकरण फैक्ट्री स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे। साथ ही कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल सेना को समय पर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी, बल्कि देश में ही टैंकों की मरम्मत और रखरखाव की क्षमता बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देगी। T-72 टैंक, जो दशकों से भारतीय सेना की बख़्तरबंद ताकत की रीढ़ रहा है, इस तरह के नियमित ओवरहॉल के जरिए आने वाले वर्षों तक ऑपरेशनल भूमिका में बना रह सकेगा।
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