- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- मंडला में घर से महिला को उठा ले गया बाघ, इलाज के दौरान मौत; ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ किया प्रद...
मंडला में घर से महिला को उठा ले गया बाघ, इलाज के दौरान मौत; ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन
Digital Desk
मंडला के पर्रापुर गांव में देर रात घर में घुसे बाघ ने बैगा समुदाय की महिला पर हमला कर दिया। उपचार के दौरान महिला की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र से रविवार को एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे पर्रापुर गांव में देर रात एक बाघ घर में घुस गया और सो रही बैगा समुदाय की महिला को घसीटकर बाहर ले गया। गंभीर रूप से घायल महिला की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
रात एक बजे घर में घुसा बाघ
जानकारी के अनुसार, परसवाड़ा तहसील के ग्राम पंचायत कुमादेही अंतर्गत पर्रापुर निवासी सुगनाबाई धुर्वे (55) शनिवार देर रात अपनी नन्ही पोती के साथ घर में सो रही थीं। उनके पति बुधराम धुर्वे भी पास ही सो रहे थे। रात करीब एक बजे एक बाघ घर में घुस आया और महिला को जबड़ों में दबाकर लगभग 50 मीटर दूर खेत की ओर घसीट ले गया।
महिला के पति ने शोर मचाया तो पास में रह रहा बेटा मौके पर पहुंचा। टॉर्च की रोशनी में उसने देखा कि बाघ उसकी मां को घसीटकर ले जा रहा है। वह मां को बचाने के लिए दौड़ा और शोर मचाने लगा। इस दौरान बाघ महिला को छोड़कर उसके बेटे की ओर झपटा, लेकिन वह किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला। ग्रामीणों के बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने के बाद बाघ जंगल की ओर भाग गया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
ग्रामीणों ने गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से बैहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। बाघ के हमले में महिला के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पोस्टमार्टम के बाद जब महिला का शव गांव लाया गया तो ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से क्षेत्र में बाघ का आतंक बना हुआ है। कई बार मवेशियों, कुत्तों और मुर्गियों को बाघ उठा ले गया, जिसकी जानकारी लगातार वन विभाग को दी गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के कारण आज एक महिला की जान चली गई।
एक वर्ष में चौथी घटना
ग्रामीणों के मुताबिक, इस क्षेत्र में बाघ के हमले की यह चौथी घटना है। इससे पहले 14 जून को कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कार्यरत एक फायर वॉचर की भी बाघ के हमले में मौत हो गई थी।
बफर जोन से सटा है गांव
पर्रापुर गांव कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से सटा हुआ है। गांव के आसपास घना जंगल होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की सीमा पर पर्याप्त फेंसिंग नहीं होने से बाघ और अन्य जंगली जानवर आसानी से गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने रखीं मांगें
घटना की सूचना मिलने पर जिला पंचायत सदस्य तामेश्वर पटेल और जनपद अध्यक्ष समलसिंह धुर्वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया और वन विभाग से पीड़ित परिवार की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की बात कही।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, अंतिम संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता, जंगल के आसपास लेंटाना झाड़ियों का सफाया और आदमखोर प्रवृत्ति वाले बाघ को पकड़कर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना शामिल है।
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
मंडला में घर से महिला को उठा ले गया बाघ, इलाज के दौरान मौत; ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन
Digital Desk
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र से रविवार को एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे पर्रापुर गांव में देर रात एक बाघ घर में घुस गया और सो रही बैगा समुदाय की महिला को घसीटकर बाहर ले गया। गंभीर रूप से घायल महिला की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
रात एक बजे घर में घुसा बाघ
जानकारी के अनुसार, परसवाड़ा तहसील के ग्राम पंचायत कुमादेही अंतर्गत पर्रापुर निवासी सुगनाबाई धुर्वे (55) शनिवार देर रात अपनी नन्ही पोती के साथ घर में सो रही थीं। उनके पति बुधराम धुर्वे भी पास ही सो रहे थे। रात करीब एक बजे एक बाघ घर में घुस आया और महिला को जबड़ों में दबाकर लगभग 50 मीटर दूर खेत की ओर घसीट ले गया।
महिला के पति ने शोर मचाया तो पास में रह रहा बेटा मौके पर पहुंचा। टॉर्च की रोशनी में उसने देखा कि बाघ उसकी मां को घसीटकर ले जा रहा है। वह मां को बचाने के लिए दौड़ा और शोर मचाने लगा। इस दौरान बाघ महिला को छोड़कर उसके बेटे की ओर झपटा, लेकिन वह किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला। ग्रामीणों के बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने के बाद बाघ जंगल की ओर भाग गया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
ग्रामीणों ने गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से बैहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। बाघ के हमले में महिला के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पोस्टमार्टम के बाद जब महिला का शव गांव लाया गया तो ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से क्षेत्र में बाघ का आतंक बना हुआ है। कई बार मवेशियों, कुत्तों और मुर्गियों को बाघ उठा ले गया, जिसकी जानकारी लगातार वन विभाग को दी गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाही के कारण आज एक महिला की जान चली गई।
एक वर्ष में चौथी घटना
ग्रामीणों के मुताबिक, इस क्षेत्र में बाघ के हमले की यह चौथी घटना है। इससे पहले 14 जून को कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कार्यरत एक फायर वॉचर की भी बाघ के हमले में मौत हो गई थी।
बफर जोन से सटा है गांव
पर्रापुर गांव कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से सटा हुआ है। गांव के आसपास घना जंगल होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की सीमा पर पर्याप्त फेंसिंग नहीं होने से बाघ और अन्य जंगली जानवर आसानी से गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने रखीं मांगें
घटना की सूचना मिलने पर जिला पंचायत सदस्य तामेश्वर पटेल और जनपद अध्यक्ष समलसिंह धुर्वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया और वन विभाग से पीड़ित परिवार की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की बात कही।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, अंतिम संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता, जंगल के आसपास लेंटाना झाड़ियों का सफाया और आदमखोर प्रवृत्ति वाले बाघ को पकड़कर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना शामिल है।
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
