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रीवा में नामांतरण अटकाने वाला बाबू हुआ सस्पेंड, PM आवास में घूस मांगने पर CEO को भेजा नोटिस
रीवा
रीवा में नामांतरण प्रकरण अटकाने पर बाबू सस्पेंड हुआ। पीएम आवास योजना में 20 हजार रिश्वत मांगने की शिकायत पर गंगेव CEO को नोटिस मिला।
रीवा में नामांतरण और पीएम आवास योजना से जुड़ी दो शिकायतों पर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बुधवार को सख्त कार्रवाई की। सेमरिया तहसील में वारसाना नामांतरण प्रकरण को पैसे के लिए लंबे समय तक अटकाने के आरोप में सहायक वर्ग-3 प्रशांत तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में 20 हजार रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत पर जनपद पंचायत गंगेव की सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। रीवा में नामांतरण गड़बड़ी और पीएम आवास में घूसखोरी की इन शिकायतों के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि सेमरिया तहसील में पदस्थ बाबू प्रशांत तिवारी के खिलाफ कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं। आवेदक मान सिंह, केबिल सिंह, उमेश सिंह और बबली सिंह ने आरोप लगाया था कि वारसाना नामांतरण का उनका प्रकरण जानबूझकर लंबा खींचा गया। आरोप है कि पैसे की मांग पूरी नहीं होने पर फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई और मामला लंबे समय तक अटका रहा। शिकायत कलेक्टर तक पहुंची तो इस बार मामला दबा नहीं। प्रारंभिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया। अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया लापरवाही और संदिग्ध आचरण सामने आने पर यह कार्रवाई की गई। खास बात यह रही कि इस मामले में लंबी विभागीय प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया गया। कलेक्टर के आदेश के बाद तहसील कार्यालय में पूरे दिन इस कार्रवाई की चर्चा होती रही। उधर आरोपी कर्मचारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
दूसरा मामला सिरमौर तहसील के ग्राम बड़ोखर से सामने आया, जहां रामलखन नामदेव ने कलेक्टर से शिकायत कर बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में ग्राम रोजगार सहायक ने उनसे 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। आरोप है कि रकम नहीं देने पर उनका नाम योजना से बाहर कर दिया गया और उन्हें लाभ से वंचित कर दिया गया। शिकायत को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने गंगेव जनपद पंचायत की सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों के मुताबिक जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो आगे जिम्मेदारी तय की जाएगी। दोनों मामलों में जिस तेजी से कार्रवाई हुई है, उससे साफ संकेत गया है कि राजस्व और पंचायत स्तर पर लंबित शिकायतों को अब सीधे प्रशासनिक कार्रवाई से जोड़ा जाएगा।
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रीवा में नामांतरण अटकाने वाला बाबू हुआ सस्पेंड, PM आवास में घूस मांगने पर CEO को भेजा नोटिस
रीवा
रीवा में नामांतरण और पीएम आवास योजना से जुड़ी दो शिकायतों पर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बुधवार को सख्त कार्रवाई की। सेमरिया तहसील में वारसाना नामांतरण प्रकरण को पैसे के लिए लंबे समय तक अटकाने के आरोप में सहायक वर्ग-3 प्रशांत तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में 20 हजार रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत पर जनपद पंचायत गंगेव की सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। रीवा में नामांतरण गड़बड़ी और पीएम आवास में घूसखोरी की इन शिकायतों के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि सेमरिया तहसील में पदस्थ बाबू प्रशांत तिवारी के खिलाफ कई दिनों से शिकायतें मिल रही थीं। आवेदक मान सिंह, केबिल सिंह, उमेश सिंह और बबली सिंह ने आरोप लगाया था कि वारसाना नामांतरण का उनका प्रकरण जानबूझकर लंबा खींचा गया। आरोप है कि पैसे की मांग पूरी नहीं होने पर फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई और मामला लंबे समय तक अटका रहा। शिकायत कलेक्टर तक पहुंची तो इस बार मामला दबा नहीं। प्रारंभिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया। अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया लापरवाही और संदिग्ध आचरण सामने आने पर यह कार्रवाई की गई। खास बात यह रही कि इस मामले में लंबी विभागीय प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया गया। कलेक्टर के आदेश के बाद तहसील कार्यालय में पूरे दिन इस कार्रवाई की चर्चा होती रही। उधर आरोपी कर्मचारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
दूसरा मामला सिरमौर तहसील के ग्राम बड़ोखर से सामने आया, जहां रामलखन नामदेव ने कलेक्टर से शिकायत कर बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में ग्राम रोजगार सहायक ने उनसे 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। आरोप है कि रकम नहीं देने पर उनका नाम योजना से बाहर कर दिया गया और उन्हें लाभ से वंचित कर दिया गया। शिकायत को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने गंगेव जनपद पंचायत की सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों के मुताबिक जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो आगे जिम्मेदारी तय की जाएगी। दोनों मामलों में जिस तेजी से कार्रवाई हुई है, उससे साफ संकेत गया है कि राजस्व और पंचायत स्तर पर लंबित शिकायतों को अब सीधे प्रशासनिक कार्रवाई से जोड़ा जाएगा।
