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भोपाल के पटेल सिटी में नशीली कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़
भोपाल,(म.प्र.)
STF की छापेमारी में छिपा अवैध नेटवर्क सामने आया, दो आरोपी फरार
भोपाल के गांधी नगर थाना क्षेत्र स्थित पटेल सिटी कॉलोनी में उस वक्त सनसनी फैल गई जब राज्य एसटीएफ ने एक मकान पर छापेमारी कर नशीली कफ सिरप की अवैध फैक्ट्री का खुलासा किया। मकान नंबर 66, जो बाहर से एक सामान्य और बंद पड़ा दो मंजिला घर लगता था, अंदर से पूरी तरह एक अवैध उत्पादन और पैकेजिंग यूनिट में तब्दील था। मकान के बाहर लगी नेम प्लेट “साधना-जयदीप सिंह” लोगों को सामान्य लगती रही, लेकिन इसी दीवारों के पीछे लंबे समय से नशे का बड़ा कारोबार चल रहा था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक घर पर हमेशा मुख्य गेट बंद रहता था और अंदर किसी भी तरह की हलचल दिखाई नहीं देती थी। सुबह से लेकर देर रात तक मकान शांत रहता था, जिससे किसी को कभी शक नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने बताया कि यह घर काफी समय से खाली जैसा ही दिखता था, लेकिन एसटीएफ की कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था ताकि किसी को भी इसकी भनक न लगे।
मकान मालिक जयदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने यह मकान आकाश भाटी नामक व्यक्ति को किराए पर दिया था और उन्हें अंदर चल रही गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या बिना पुलिस सत्यापन के मकान किराए पर देना केवल लापरवाही थी या फिर किसी तरह की मिलीभगत भी इसमें शामिल हो सकती है। जांच टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई कहां-कहां की जाती थी।
छापेमारी के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। मकान के अंदर सीढ़ियों के नीचे, गैलरी और कमरों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोरियां, कट्टे और पैकेजिंग सामग्री बिखरी हुई मिली। कई जगहों पर कफ सिरप की बोतलों के खाली रैपर और सीलिंग सामग्री भी पाई गई, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि यहां लंबे समय से री-पैकिंग का काम चल रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध गतिविधि में कुछ नाबालिगों को भी काम पर लगाया गया था, जो बेहद गंभीर मामला है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार मकान की छत को निगरानी पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जाता था। छत से बायपास रोड और कॉलोनी के अंदर आने-जाने वाले रास्तों पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। कई बार युवक छत पर खड़े होकर हर आने-जाने वाले व्यक्ति और गाड़ी पर नजर रखते थे। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती, अंदर सूचना पहुंचा दी जाती थी। यह पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया गया था कि बाहर से कोई भी इस अवैध गतिविधि का अंदाजा नहीं लगा सकता था।
एसटीएफ को जैसे ही पुख्ता जानकारी मिली, टीम ने देर रात छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही गिरोह के मास्टरमाइंड अर्जुन मालवीय और नितिन साहू छत के रास्ते पीछे खुले मैदान में कूदकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि पीछे का हिस्सा खेतों से जुड़ा होने के कारण यह उनका पहले से तैयार भागने का रास्ता था। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की, लेकिन दोनों आरोपी हाथ नहीं आए।
इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। लोग हैरान हैं कि इतने शांत दिखने वाले मकान के अंदर इस तरह का बड़ा अवैध कारोबार चल रहा था और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट का असली संचालन कौन कर रहा था और इसकी सप्लाई चेन कहां तक फैली हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक मकान या दो लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा हो सकता है।
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भोपाल के पटेल सिटी में नशीली कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल के गांधी नगर थाना क्षेत्र स्थित पटेल सिटी कॉलोनी में उस वक्त सनसनी फैल गई जब राज्य एसटीएफ ने एक मकान पर छापेमारी कर नशीली कफ सिरप की अवैध फैक्ट्री का खुलासा किया। मकान नंबर 66, जो बाहर से एक सामान्य और बंद पड़ा दो मंजिला घर लगता था, अंदर से पूरी तरह एक अवैध उत्पादन और पैकेजिंग यूनिट में तब्दील था। मकान के बाहर लगी नेम प्लेट “साधना-जयदीप सिंह” लोगों को सामान्य लगती रही, लेकिन इसी दीवारों के पीछे लंबे समय से नशे का बड़ा कारोबार चल रहा था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक घर पर हमेशा मुख्य गेट बंद रहता था और अंदर किसी भी तरह की हलचल दिखाई नहीं देती थी। सुबह से लेकर देर रात तक मकान शांत रहता था, जिससे किसी को कभी शक नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने बताया कि यह घर काफी समय से खाली जैसा ही दिखता था, लेकिन एसटीएफ की कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था ताकि किसी को भी इसकी भनक न लगे।
मकान मालिक जयदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने यह मकान आकाश भाटी नामक व्यक्ति को किराए पर दिया था और उन्हें अंदर चल रही गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या बिना पुलिस सत्यापन के मकान किराए पर देना केवल लापरवाही थी या फिर किसी तरह की मिलीभगत भी इसमें शामिल हो सकती है। जांच टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई कहां-कहां की जाती थी।
छापेमारी के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। मकान के अंदर सीढ़ियों के नीचे, गैलरी और कमरों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोरियां, कट्टे और पैकेजिंग सामग्री बिखरी हुई मिली। कई जगहों पर कफ सिरप की बोतलों के खाली रैपर और सीलिंग सामग्री भी पाई गई, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि यहां लंबे समय से री-पैकिंग का काम चल रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध गतिविधि में कुछ नाबालिगों को भी काम पर लगाया गया था, जो बेहद गंभीर मामला है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार मकान की छत को निगरानी पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जाता था। छत से बायपास रोड और कॉलोनी के अंदर आने-जाने वाले रास्तों पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। कई बार युवक छत पर खड़े होकर हर आने-जाने वाले व्यक्ति और गाड़ी पर नजर रखते थे। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती, अंदर सूचना पहुंचा दी जाती थी। यह पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया गया था कि बाहर से कोई भी इस अवैध गतिविधि का अंदाजा नहीं लगा सकता था।
एसटीएफ को जैसे ही पुख्ता जानकारी मिली, टीम ने देर रात छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही गिरोह के मास्टरमाइंड अर्जुन मालवीय और नितिन साहू छत के रास्ते पीछे खुले मैदान में कूदकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि पीछे का हिस्सा खेतों से जुड़ा होने के कारण यह उनका पहले से तैयार भागने का रास्ता था। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की, लेकिन दोनों आरोपी हाथ नहीं आए।
इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। लोग हैरान हैं कि इतने शांत दिखने वाले मकान के अंदर इस तरह का बड़ा अवैध कारोबार चल रहा था और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट का असली संचालन कौन कर रहा था और इसकी सप्लाई चेन कहां तक फैली हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक मकान या दो लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा हो सकता है।
