चंबल में अवैध रेत खनन पर MP सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जवाब

चंबल,(म.प्र.)

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ड्रोन निगरानी के हवाले से सरकार का दावा—अभयारण्य में नया खनन नहीं मिला, 44 वाहन जब्त और 12 गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में कथित अवैध रेत खनन को लेकर चल रहे मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा है कि हाल की जांच में किसी भी तरह के ताजा या नए खनन के सबूत सामने नहीं आए हैं। चंबल अवैध रेत खनन को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने अदालत को बताया कि जिन जगहों पर गड्ढों का जिक्र मीडिया रिपोर्ट में किया गया था, वे पुराने खनन की वजह से बने थे और कोर्ट के पिछले आदेशों के बाद वहां किसी नए उत्खनन की गतिविधि नहीं पाई गई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार 29 मई को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया था, जहां सरकार की ओर से विस्तृत हलफनामा पेश किया गया।

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि ग्वालियर सर्किल के वन संरक्षक द्वारा दाखिल शपथपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि जिन स्थानों का उल्लेख मीडिया रिपोर्ट में किया गया था, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया और ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी की गई। इस निगरानी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नया अवैध रेत उत्खनन नहीं हो रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह से चंबल अभयारण्य और आसपास के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन सर्विलांस को लगातार सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी तरह की गतिविधि तुरंत पकड़ी जा सके।

इसी दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ ट्रैक्टरों में जो रेत परिवहन करते हुए पाए गए थे, वह संभवतः पहले से व्यापारियों द्वारा डंप की गई सामग्री हो सकती है, न कि ताजा खनन का परिणाम। हालांकि अदालत में यह भी स्वीकार किया गया कि अवैध भंडारण और बिना अनुमति परिवहन के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। चंबल अवैध रेत खनन मामले में सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 44 वाहन जब्त किए गए हैं और 8 वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। यह आंकड़े अदालत में दिए गए सरकारी जवाब का अहम हिस्सा रहे।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है और आगे किसी भी स्थिति में अवैध खनन को दोबारा शुरू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग और प्रशासनिक टीमों को लगातार अलर्ट मोड पर रखा गया है और ड्रोन के साथ-साथ जमीन पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि आने वाले समय में सभी जरूरी सुधारात्मक कदम तेजी से लागू किए जाएंगे ताकि पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके और अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन हो।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन जारी है। कोर्ट ने अपने पहले के आदेशों में यह भी टिप्पणी की थी कि चंबल में अवैध खनन का नेटवर्क काफी संगठित रूप ले चुका है और यह केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं रह गई है। अदालत ने राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की आवाजाही रोकी जाए, वन विभाग की निगरानी मजबूत की जाए और पर्यावरणीय नुकसान को गंभीरता से लिया जाए।

मामले में अदालत ने सभी संबंधित राज्यों—मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश—को साथ ही केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को भी निर्देश दिया है कि वे आगे की सुनवाई से पहले ताजा तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जहां यह देखा जाएगा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम जमीन पर कितने प्रभावी साबित हुए हैं और क्या चंबल अवैध रेत खनन पर पूरी तरह रोक लग पाई है या नहीं।

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30 May 2026 By Vaishnavi.J

चंबल में अवैध रेत खनन पर MP सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जवाब

चंबल,(म.प्र.)

सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में कथित अवैध रेत खनन को लेकर चल रहे मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा है कि हाल की जांच में किसी भी तरह के ताजा या नए खनन के सबूत सामने नहीं आए हैं। चंबल अवैध रेत खनन को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने अदालत को बताया कि जिन जगहों पर गड्ढों का जिक्र मीडिया रिपोर्ट में किया गया था, वे पुराने खनन की वजह से बने थे और कोर्ट के पिछले आदेशों के बाद वहां किसी नए उत्खनन की गतिविधि नहीं पाई गई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार 29 मई को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया था, जहां सरकार की ओर से विस्तृत हलफनामा पेश किया गया।

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि ग्वालियर सर्किल के वन संरक्षक द्वारा दाखिल शपथपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि जिन स्थानों का उल्लेख मीडिया रिपोर्ट में किया गया था, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया और ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी की गई। इस निगरानी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नया अवैध रेत उत्खनन नहीं हो रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह से चंबल अभयारण्य और आसपास के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन सर्विलांस को लगातार सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी तरह की गतिविधि तुरंत पकड़ी जा सके।

इसी दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ ट्रैक्टरों में जो रेत परिवहन करते हुए पाए गए थे, वह संभवतः पहले से व्यापारियों द्वारा डंप की गई सामग्री हो सकती है, न कि ताजा खनन का परिणाम। हालांकि अदालत में यह भी स्वीकार किया गया कि अवैध भंडारण और बिना अनुमति परिवहन के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। चंबल अवैध रेत खनन मामले में सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 44 वाहन जब्त किए गए हैं और 8 वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। यह आंकड़े अदालत में दिए गए सरकारी जवाब का अहम हिस्सा रहे।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है और आगे किसी भी स्थिति में अवैध खनन को दोबारा शुरू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग और प्रशासनिक टीमों को लगातार अलर्ट मोड पर रखा गया है और ड्रोन के साथ-साथ जमीन पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि आने वाले समय में सभी जरूरी सुधारात्मक कदम तेजी से लागू किए जाएंगे ताकि पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके और अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन हो।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन जारी है। कोर्ट ने अपने पहले के आदेशों में यह भी टिप्पणी की थी कि चंबल में अवैध खनन का नेटवर्क काफी संगठित रूप ले चुका है और यह केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं रह गई है। अदालत ने राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की आवाजाही रोकी जाए, वन विभाग की निगरानी मजबूत की जाए और पर्यावरणीय नुकसान को गंभीरता से लिया जाए।

मामले में अदालत ने सभी संबंधित राज्यों—मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश—को साथ ही केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को भी निर्देश दिया है कि वे आगे की सुनवाई से पहले ताजा तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जहां यह देखा जाएगा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम जमीन पर कितने प्रभावी साबित हुए हैं और क्या चंबल अवैध रेत खनन पर पूरी तरह रोक लग पाई है या नहीं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-governments-reply-in-supreme-court-on-illegal-sand-mining/article-54538

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