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भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की 5 याचिकाएं
Digital desk
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पांच याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। मुस्लिम पक्ष ने इंदौर हाईकोर्ट के भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले को चुनौती दी है।
मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े मामले में बुधवार, 12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह सुनवाई मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की ओर से दायर पांच याचिकाओं पर होगी, जिनमें इंदौर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया था।
मामले की सुनवाई पहले 5 और 6 अगस्त को प्रस्तावित थी, लेकिन दोनों दिन सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया था। अदालत ने हिंदू पक्ष को यहां रोजाना पूजा करने की अनुमति भी दी थी।
इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के साथ-साथ मुस्लिम पक्ष के लिए नमाज की व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि मुस्लिम समाज के लिए हर शुक्रवार जुमे की नमाज अदा करने के लिए भोजशाला के पास किसी खाली वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जाए।
इसके बाद जिला प्रशासन ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। प्रशासन की ओर से चालीस पीर दरगाह के पास स्थित खाली जमीन पर नमाज की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके लिए जमीन को समतल भी कराया गया।
हालांकि, मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि चालीस पीर दरगाह भोजशाला से काफी दूर है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नमाज के लिए भोजशाला से लगी हुई खाली जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
खसरा नंबर 612 पर नमाज
व्यवस्था को लेकर विवाद के बाद मुस्लिम समाज ने चालीस पीर की जगह पर जुमे की नमाज नहीं पढ़ी और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रशासन ने भोजशाला के पीछे दाईं ओर स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन को जुमे की नमाज के लिए तय किया।
पिछले दो शुक्रवार से मुस्लिम समाज के लोग इसी जमीन पर नमाज अदा कर रहे हैं। नमाज के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। दोनों शुक्रवार को नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
प्रशासन ने नमाज के लिए जमीन को तैयार भी कराया है।
14 अगस्त को फिर शुक्रवार
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके दो दिन बाद, 14 अगस्त को शुक्रवार है।
ऐसे में बुधवार के आदेश के बाद जिला प्रशासन को शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था में किसी संभावित बदलाव के लिए तैयारी करनी पड़ सकती है। नमाज को लेकर आगे की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।
सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद लंबे समय से संवेदनशील मामला बना हुआ है। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ-साथ नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
अब बुधवार की सुनवाई में अदालत क्या निर्देश देती है, इस पर दोनों पक्षों के साथ-साथ जिला प्रशासन की भी नजर रहेगी।
भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की 5 याचिकाएं
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मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े मामले में बुधवार, 12 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। यह सुनवाई मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की ओर से दायर पांच याचिकाओं पर होगी, जिनमें इंदौर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया था।
मामले की सुनवाई पहले 5 और 6 अगस्त को प्रस्तावित थी, लेकिन दोनों दिन सुनवाई नहीं हो सकी थी। अब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया था। अदालत ने हिंदू पक्ष को यहां रोजाना पूजा करने की अनुमति भी दी थी।
इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के साथ-साथ मुस्लिम पक्ष के लिए नमाज की व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि मुस्लिम समाज के लिए हर शुक्रवार जुमे की नमाज अदा करने के लिए भोजशाला के पास किसी खाली वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जाए।
इसके बाद जिला प्रशासन ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। प्रशासन की ओर से चालीस पीर दरगाह के पास स्थित खाली जमीन पर नमाज की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके लिए जमीन को समतल भी कराया गया।
हालांकि, मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि चालीस पीर दरगाह भोजशाला से काफी दूर है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नमाज के लिए भोजशाला से लगी हुई खाली जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
खसरा नंबर 612 पर नमाज
व्यवस्था को लेकर विवाद के बाद मुस्लिम समाज ने चालीस पीर की जगह पर जुमे की नमाज नहीं पढ़ी और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रशासन ने भोजशाला के पीछे दाईं ओर स्थित खसरा नंबर 612 की जमीन को जुमे की नमाज के लिए तय किया।
पिछले दो शुक्रवार से मुस्लिम समाज के लोग इसी जमीन पर नमाज अदा कर रहे हैं। नमाज के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। दोनों शुक्रवार को नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
प्रशासन ने नमाज के लिए जमीन को तैयार भी कराया है।
14 अगस्त को फिर शुक्रवार
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके दो दिन बाद, 14 अगस्त को शुक्रवार है।
ऐसे में बुधवार के आदेश के बाद जिला प्रशासन को शुक्रवार की नमाज की व्यवस्था में किसी संभावित बदलाव के लिए तैयारी करनी पड़ सकती है। नमाज को लेकर आगे की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।
सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद लंबे समय से संवेदनशील मामला बना हुआ है। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ-साथ नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
अब बुधवार की सुनवाई में अदालत क्या निर्देश देती है, इस पर दोनों पक्षों के साथ-साथ जिला प्रशासन की भी नजर रहेगी।
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