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भोपाल मेट्रो को मिलेगी रफ्तार, सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू
भोपाल (म.प्र.)
एक ट्रैक की बाधा होगी खत्म, यात्रियों को मिलेगा कम इंतजार का फायदा
शहर में मेट्रो की धीमी रफ्तार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में काम शुरू हो गया है। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर दिया गया है।
अभी मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन आने में करीब 75 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
दरअसल, सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों तरफ चलाई जा रही है। यानी जो ट्रेन आगे जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक तैयार तो है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के बिना उस पर संचालन संभव नहीं है। इसी कारण मेट्रो अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही।
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम लगने के बाद हालात बदल जाएंगे। दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेनें चल सकेंगी और उनके बीच का अंतर भी कम होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जानकार बताते हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो सेवा के लिए बेहद जरूरी होता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति, उनके बीच की दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके बिना मल्टी-ट्रैक संचालन संभव नहीं होता।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सेफ्टी ट्रायल कराया जाएगा। इसके लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को बुलाया जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा।
दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक भोपाल में भी लागू की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मेट्रो सेवा ज्यादा भरोसेमंद और तेज होगी। अभी कम स्पीड और ज्यादा इंतजार के कारण यात्रियों की संख्या भी सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है।
शहर के लोगों के लिए यह राहत की खबर है। अगर सब कुछ तय समय पर पूरा होता है, तो भोपाल मेट्रो आने वाले महीनों में ज्यादा सुविधाजनक और उपयोगी साबित हो सकती है।
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भोपाल मेट्रो को मिलेगी रफ्तार, सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू
भोपाल (म.प्र.)
शहर में मेट्रो की धीमी रफ्तार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में काम शुरू हो गया है। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर दिया गया है।
अभी मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन आने में करीब 75 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
दरअसल, सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों तरफ चलाई जा रही है। यानी जो ट्रेन आगे जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक तैयार तो है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के बिना उस पर संचालन संभव नहीं है। इसी कारण मेट्रो अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही।
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम लगने के बाद हालात बदल जाएंगे। दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेनें चल सकेंगी और उनके बीच का अंतर भी कम होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जानकार बताते हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो सेवा के लिए बेहद जरूरी होता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति, उनके बीच की दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके बिना मल्टी-ट्रैक संचालन संभव नहीं होता।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सेफ्टी ट्रायल कराया जाएगा। इसके लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को बुलाया जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा।
दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक भोपाल में भी लागू की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मेट्रो सेवा ज्यादा भरोसेमंद और तेज होगी। अभी कम स्पीड और ज्यादा इंतजार के कारण यात्रियों की संख्या भी सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है।
शहर के लोगों के लिए यह राहत की खबर है। अगर सब कुछ तय समय पर पूरा होता है, तो भोपाल मेट्रो आने वाले महीनों में ज्यादा सुविधाजनक और उपयोगी साबित हो सकती है।
