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भोपाल में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाहों से हड़कंप, प्रशासन बोला—पर्याप्त स्टॉक मौजूद
भोपाल (म.प्र.)
58.8 करोड़ लीटर ईंधन का भंडार, 2-3 महीने की सप्लाई सुरक्षित; कुछ पंपों पर एडवांस भुगतान नियम से अस्थायी दिक्कत
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में अचानक भीड़ का माहौल बन गया है। हालांकि प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
फूड कंट्रोल विभाग के अनुसार, भोपाल में वर्तमान में लगभग 58.8 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल का भंडार मौजूद है, जो करीब ढाई से तीन महीने तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। शहर के 192 पेट्रोल पंपों को रोजाना भौंरी स्थित डिपो से नियमित रूप से पेट्रोल और डीजल की सप्लाई की जा रही है।
इसके बावजूद, ईरान-इजराइल तनाव की खबरों के बाद लोगों में आशंका बढ़ी और कई जिलों में पैनिक बाइंग देखने को मिली। इंदौर, उज्जैन, देवास, नीमच, झाबुआ, आगर-मालवा और शाजापुर जैसे जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं। कुछ स्थानों पर तो लोग केन और डिब्बों में ईंधन भरवाते नजर आए, जिससे स्थिति और अव्यवस्थित हो गई।
आगर-मालवा और खरगोन में सुबह के समय 300 से 400 वाहनों की कतारें देखी गईं, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। शाजापुर जिले में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्त रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए।
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के मुताबिक, प्रदेश में कुल 4200 पंप हैं, जिनमें से लगभग 4 से 5 प्रतिशत पंपों पर ही अस्थायी समस्या सामने आई है। इसका कारण नई व्यवस्था के तहत ईंधन खरीद के लिए एडवांस भुगतान की अनिवार्यता बताया गया है। कुछ पंप संचालकों को फंड मैनेजमेंट में दिक्कत आने से सीमित आपूर्ति करनी पड़ रही है।
प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्थिति आपूर्ति संकट नहीं बल्कि अफवाहों के कारण बनी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पैनिक बाइंग से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है, जिससे अस्थायी अव्यवस्था पैदा होती है। यदि स्थिति नियंत्रित नहीं की गई तो सामान्य आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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भोपाल में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाहों से हड़कंप, प्रशासन बोला—पर्याप्त स्टॉक मौजूद
भोपाल (म.प्र.)
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में अचानक भीड़ का माहौल बन गया है। हालांकि प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
फूड कंट्रोल विभाग के अनुसार, भोपाल में वर्तमान में लगभग 58.8 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल का भंडार मौजूद है, जो करीब ढाई से तीन महीने तक की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। शहर के 192 पेट्रोल पंपों को रोजाना भौंरी स्थित डिपो से नियमित रूप से पेट्रोल और डीजल की सप्लाई की जा रही है।
इसके बावजूद, ईरान-इजराइल तनाव की खबरों के बाद लोगों में आशंका बढ़ी और कई जिलों में पैनिक बाइंग देखने को मिली। इंदौर, उज्जैन, देवास, नीमच, झाबुआ, आगर-मालवा और शाजापुर जैसे जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं। कुछ स्थानों पर तो लोग केन और डिब्बों में ईंधन भरवाते नजर आए, जिससे स्थिति और अव्यवस्थित हो गई।
आगर-मालवा और खरगोन में सुबह के समय 300 से 400 वाहनों की कतारें देखी गईं, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। शाजापुर जिले में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्त रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए।
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के मुताबिक, प्रदेश में कुल 4200 पंप हैं, जिनमें से लगभग 4 से 5 प्रतिशत पंपों पर ही अस्थायी समस्या सामने आई है। इसका कारण नई व्यवस्था के तहत ईंधन खरीद के लिए एडवांस भुगतान की अनिवार्यता बताया गया है। कुछ पंप संचालकों को फंड मैनेजमेंट में दिक्कत आने से सीमित आपूर्ति करनी पड़ रही है।
प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्थिति आपूर्ति संकट नहीं बल्कि अफवाहों के कारण बनी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पैनिक बाइंग से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है, जिससे अस्थायी अव्यवस्था पैदा होती है। यदि स्थिति नियंत्रित नहीं की गई तो सामान्य आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
