- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भोपाल
- भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे: MP से छत्तीसगढ़ तक तेज होगी कनेक्टिविटी
भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे: MP से छत्तीसगढ़ तक तेज होगी कनेक्टिविटी
भोपाल, (म.प्र.)
भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला कॉरिडोर से MP की छत्तीसगढ़ और रायपुर-विशाखापट्टनम तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
प्रस्तावित 255 किलोमीटर लंबा भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा कॉरिडोर मध्य प्रदेश की छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी भारत से सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में सड़क बुनियादी ढांचे को नई गति देने के लिए 255 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक सड़क को छह लेन करने की योजना पर जोर है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा का समय कम होने के साथ रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है।
भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मौजूदा सड़क के चौड़ीकरण के बजाय नए मार्ग के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इससे भोपाल और जबलपुर के बीच मौजूदा करीब 320 किलोमीटर की दूरी घटकर लगभग 255 किलोमीटर हो सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 2.5 से 3 घंटे तक आने की उम्मीद है।
255 किमी का ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे को मध्य प्रदेश के उत्तर-दक्षिण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित मार्ग भोपाल, सागर, दमोह और जबलपुर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ आगे मंडला और छत्तीसगढ़ सीमा की ओर संपर्क मजबूत करेगा। यह केवल भोपाल और जबलपुर के बीच यात्रा आसान करने वाली सड़क नहीं होगी, बल्कि मध्य प्रदेश को पूर्वी और दक्षिणी भारत के बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़ने में भी भूमिका निभा सकती है। रिपोर्टों में व्यापक सड़क परियोजना पैकेज की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, इस राशि को केवल भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे की अंतिम लागत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि व्यापक योजना में कई संबंधित कनेक्टिविटी परियोजनाएं शामिल हैं।
भोपाल-रायपुर सफर होगा आसान
इस परियोजना का एक बड़ा फायदा भोपाल और रायपुर के बीच यात्रा समय कम होने के रूप में सामने आ सकता है। मौजूदा समय में दोनों राजधानियों के बीच सड़क यात्रा में करीब 14 से 15 घंटे लगते हैं। संबंधित सड़क परियोजनाएं पूरी होने के बाद यह समय घटकर करीब 6 से 7 घंटे होने का अनुमान है। जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा वाला हिस्सा इस तेज कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से यात्रियों के साथ-साथ दोनों राज्यों के बीच माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ से सीधा संपर्क
योजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक सड़क को छह लेन करना है। यह मार्ग मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापार और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। सड़क के बेहतर होने से माल की आवाजाही तेज हो सकती है और यात्रा में लगने वाला समय कम हो सकता है। मंडला, कवर्धा, बेमेतरा, सिमगा और रायपुर जैसे शहरों और क्षेत्रों को इस बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे दोनों राज्यों के बीच कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की आवाजाही को भी बढ़ावा मिल सकता है।
विशाखापट्टनम तक बढ़ेगा नेटवर्क
इस पूरी सड़क योजना का असर छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। प्रस्तावित लखनादौन-रायपुर हाईस्पीड कॉरिडोर को आगे रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर से जोड़ने की योजना व्यापक कनेक्टिविटी नेटवर्क का हिस्सा है। यदि यह पूरा नेटवर्क विकसित होता है तो मध्य प्रदेश को विशाखापट्टनम और पूर्वी तट के महत्वपूर्ण बंदरगाह क्षेत्र तक तेज सड़क संपर्क मिल सकता है। इससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और अन्य माल को मध्य भारत से पूर्वी तट तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इन शहरों को मिलेगा फायदा
भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे और इससे जुड़े कॉरिडोर का लाभ मध्य प्रदेश के कई जिलों को मिलने की उम्मीद है। भोपाल, जबलपुर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर और मंडला समेत आसपास के क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है। छत्तीसगढ़ में रायपुर, कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा जैसे क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलने की संभावना है। बेहतर सड़क नेटवर्क से लोगों की अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, बाजारों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान हो सकती है।
व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
नई और बेहतर सड़क परियोजनाओं का असर केवल यात्रा समय कम होने तक सीमित नहीं रहेगा।मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच तेज सड़क संपर्क से माल परिवहन में लगने वाली देरी कम हो सकती है। इससे कृषि और औद्योगिक बाजारों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। पर्यटन के क्षेत्र में भी बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय होटल, परिवहन, खान-पान और अन्य सेवाओं को फायदा मिल सकता है।
निर्माण और समयसीमा
भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अभी विकास के चरण में है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), भूमि अधिग्रहण, आवश्यक मंजूरियां, टेंडर और निर्माण कार्य इसके अंतिम स्वरूप और समयसीमा को तय करेंगे। हालिया रिपोर्टों में परियोजना को 2029 तक पूरा करने का संभावित लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, इसे अभी निश्चित समयसीमा नहीं माना जा सकता। इसी तरह भोपाल-जबलपुर और भोपाल-रायपुर यात्रा में अनुमानित कमी परियोजनाओं के पूरा होने और यातायात के लिए खुलने के बाद ही हासिल होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल परियोजना के लिए DPR और योजना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण, आवश्यक मंजूरियां, निर्माण पैकेज और टेंडर प्रक्रिया पर काम होगा। परियोजना और इससे जुड़े कॉरिडोर पूरे होने के बाद मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ और रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर की दिशा में तेज सड़क कनेक्टिविटी मिल सकती है। यात्रियों के लिए कम समय में सफर पूरा होना सबसे बड़ा फायदा होगा। वहीं कारोबारियों के लिए बेहतर माल परिवहन और बाजारों तक आसान पहुंच आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकती है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

