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भोपाल एटीएस का बड़ा खुलासा: फर्जी पासपोर्ट गिरोह का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार
भोपाल (म.प्र.)
फर्जी पतों पर पुलिस वेरिफिकेशन, पोस्टमैन को रिश्वत देकर बीच रास्ते से ली पासपोर्ट डिलीवरी; जांच तेज
मध्य प्रदेश एटीएस ने 44 फर्जी पासपोर्ट से जुड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि विदेशी नागरिकों के लिए अस्तित्वहीन पतों पर पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया और रिश्वत देकर पासपोर्ट डिलीवरी बीच रास्ते में ही हासिल कर ली गई। मामले में पांच अफगान नागरिकों को कोलकाता से गिरफ्तार कर जबलपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
एटीएस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान शामिल हैं। जांच में 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे पते फर्जी पाए गए, इसके बावजूद पुलिस वेरिफिकेशन पूरा दिखाकर पासपोर्ट जारी कर दिए गए। आरोपियों ने कथित तौर पर एक पोस्टमैन को लगभग तीन हजार रुपये देकर पासपोर्ट डाक वितरण से पहले ही हासिल कर लिए।
मामले का खुलासा मुख्य आरोपी सोहबत खान की गिरफ्तारी के बाद हुआ। उसने सोशल मीडिया पर एके-47 के साथ तस्वीर साझा की थी, जिसके आधार पर अगस्त 2025 में उसे पकड़ा गया। पूछताछ में उसने नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान और चंदन सिंह की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।
एटीएस सूत्रों के मुताबिक गिरोह 2018-19 के दौरान अफगानिस्तान के काबुल से दिल्ली होते हुए कोलकाता पहुंचा था। एक आरोपी मेडिकल वीजा पर भारत आया, जबकि अन्य के अवैध रूप से प्रवेश करने की आशंका जताई गई है। बाद में इनकी मुलाकात जबलपुर निवासी सोहबत खान से हुई, जिसने प्रति व्यक्ति करीब ढाई लाख रुपये में भारतीय पासपोर्ट बनवाने का सौदा किया।
इस प्रकरण ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जबलपुर पुलिस ने संबंधित वेरिफिकेशन प्रक्रिया की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के स्रोत और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
एटीएस ने बताया कि 10 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और जांच के आधार पर आगे की गिरफ्तारी संभव है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन और संपर्कों की भी पड़ताल की जाएगी।
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