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ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI को दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच तेज
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल केस में गर्भावस्था, गर्भपात और मौत के कारणों पर फोकस, डिजिटल साक्ष्य और डिलीट डेटा की रिकवरी में जुटी जांच एजेंसी
भोपाल में एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अहम सफलता मिली है। एजेंसी को दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है, जिसे बंद लिफाफे में सौंपा गया है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद जांच टीम ने मामले की दिशा और तेज कर दी है और अब इसे पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जोड़कर गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट में जहां शरीर पर चोटों का उल्लेख था, वहीं दूसरी रिपोर्ट से कई नए पहलुओं की जांच की उम्मीद जताई जा रही है।
सीबीआई अब इस पूरे मामले को गर्भावस्था, कथित गर्भपात और उसके बाद हुई मौत की परिस्थितियों के एंगल से देख रही है। जांच एजेंसी घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक निष्कर्षों को एक साथ जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सभी पहलुओं की जांच समानांतर रूप से की जा रही है।
पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कुछ चोटों का उल्लेख किया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि ये चोटें सामान्य थीं या किसी गंभीर घटना का संकेत देती हैं। अब दूसरी रिपोर्ट मिलने के बाद सीबीआई इन चोटों की प्रकृति और समय को लेकर भी विशेषज्ञों की मदद ले रही है। जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि ये चोटें घटना से पहले की हैं या बाद की परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं।
इस बीच सीबीआई की फोरेंसिक टीम घटनास्थल से जुड़े सबूतों की दोबारा जांच कर रही है। फांसी के फंदे से जुड़े पहलुओं पर भी डमी ट्रायल कराया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि घटना आत्महत्या है या इसके पीछे किसी तरह की साजिश या दबाव की स्थिति मौजूद थी। टीम हर छोटे-बड़े साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने का प्रयास कर रही है ताकि जांच को ठोस आधार मिल सके।
डिजिटल साक्ष्य इस केस में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीबीआई की साइबर टीम ट्विशा शर्मा के मोबाइल फोन और लैपटॉप से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में लगी हुई है। इसमें चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डेटा से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इस मामले में ट्विशा शर्मा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके पति समर्थ सिंह पहले से ही केंद्रीय जेल भोपाल में बंद हैं। दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, दहेज उत्पीड़न, धमकी देने और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू पर बारीकी से नजर रख रही हैं।
जेल में बंद दोनों आरोपियों से दोबारा पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रोटेक्शन वारंट के जरिए रिमांड पर लेकर उनसे विस्तृत पूछताछ कर सकती है। इससे जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसी का फोकस अब इस बात पर भी है कि क्या घटना के पीछे कोई मानसिक दबाव, पारिवारिक विवाद या अन्य परिस्थितियां जिम्मेदार थीं। इसके लिए सभी संबंधित लोगों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल की परिस्थितियों को भी दोबारा रिक्रिएट करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल सीबीआई का कहना है कि यह मामला कई परतों में उलझा हुआ है और हर परत को वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टिकोण से समझना जरूरी है। जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों का मिलान और पुष्टि अनिवार्य होगी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस केस में नए तथ्य सामने आने की संभावना बनी हुई है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जहां जांच को नई दिशा दी है, वहीं डिजिटल साक्ष्यों की रिकवरी आने वाले दिनों में मामले की असली तस्वीर साफ कर सकती है।
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ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI को दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच तेज
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अहम सफलता मिली है। एजेंसी को दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है, जिसे बंद लिफाफे में सौंपा गया है। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद जांच टीम ने मामले की दिशा और तेज कर दी है और अब इसे पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जोड़कर गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट में जहां शरीर पर चोटों का उल्लेख था, वहीं दूसरी रिपोर्ट से कई नए पहलुओं की जांच की उम्मीद जताई जा रही है।
सीबीआई अब इस पूरे मामले को गर्भावस्था, कथित गर्भपात और उसके बाद हुई मौत की परिस्थितियों के एंगल से देख रही है। जांच एजेंसी घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक निष्कर्षों को एक साथ जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर तैयार करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सभी पहलुओं की जांच समानांतर रूप से की जा रही है।
पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कुछ चोटों का उल्लेख किया गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि ये चोटें सामान्य थीं या किसी गंभीर घटना का संकेत देती हैं। अब दूसरी रिपोर्ट मिलने के बाद सीबीआई इन चोटों की प्रकृति और समय को लेकर भी विशेषज्ञों की मदद ले रही है। जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि ये चोटें घटना से पहले की हैं या बाद की परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं।
इस बीच सीबीआई की फोरेंसिक टीम घटनास्थल से जुड़े सबूतों की दोबारा जांच कर रही है। फांसी के फंदे से जुड़े पहलुओं पर भी डमी ट्रायल कराया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि घटना आत्महत्या है या इसके पीछे किसी तरह की साजिश या दबाव की स्थिति मौजूद थी। टीम हर छोटे-बड़े साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने का प्रयास कर रही है ताकि जांच को ठोस आधार मिल सके।
डिजिटल साक्ष्य इस केस में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीबीआई की साइबर टीम ट्विशा शर्मा के मोबाइल फोन और लैपटॉप से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में लगी हुई है। इसमें चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डेटा से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इस मामले में ट्विशा शर्मा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके पति समर्थ सिंह पहले से ही केंद्रीय जेल भोपाल में बंद हैं। दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, दहेज उत्पीड़न, धमकी देने और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू पर बारीकी से नजर रख रही हैं।
जेल में बंद दोनों आरोपियों से दोबारा पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रोटेक्शन वारंट के जरिए रिमांड पर लेकर उनसे विस्तृत पूछताछ कर सकती है। इससे जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसी का फोकस अब इस बात पर भी है कि क्या घटना के पीछे कोई मानसिक दबाव, पारिवारिक विवाद या अन्य परिस्थितियां जिम्मेदार थीं। इसके लिए सभी संबंधित लोगों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल की परिस्थितियों को भी दोबारा रिक्रिएट करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल सीबीआई का कहना है कि यह मामला कई परतों में उलझा हुआ है और हर परत को वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टिकोण से समझना जरूरी है। जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों का मिलान और पुष्टि अनिवार्य होगी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस केस में नए तथ्य सामने आने की संभावना बनी हुई है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जहां जांच को नई दिशा दी है, वहीं डिजिटल साक्ष्यों की रिकवरी आने वाले दिनों में मामले की असली तस्वीर साफ कर सकती है।
