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MP में फर्जी BPL कार्डधारियों पर बड़ा एक्शन, राशन कार्ड से कटेंगे 1.50 लाख परिवारों के नाम
भोपाल (म.प्र.)
MP News: राजधानी में 1.50 लाख फर्जी BPL कार्डधारियों की पहचान शुरू, मकान सर्वे के बाद सूची से हटाए जा सकते हैं नाम।
राजधानी में अब फर्जी तरीके से बनाए गए BPL कार्डों पर बड़ा एक्शन होने जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारी के मुताबिक शहर के करीब 1.50 लाख परिवारों के नाम गरीबी रेखा सूची से हटाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो पक्के मकानों में रह रहे हैं, अच्छी आर्थिक स्थिति में हैं, लेकिन सालों से बीपीएल कार्ड के जरिए सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे। अब जनगणना अभियान और मकान सर्वे के दौरान ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई शहर के सभी 85 वार्डों में की जा रही है, जहां कच्चे और पक्के मकानों की अलग-अलग मैपिंग हो रही है। इसी दौरान बीपीएल श्रेणी में दर्ज परिवारों की वास्तविक स्थिति भी देखी जा रही है।
जांच में बड़ी संख्या में ऐसे मकान सामने आए हैं जो पूरी तरह पक्के हैं और जिनमें रहने वाले परिवार आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद इनके पास बीपीएल कार्ड मौजूद हैं। सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में गलत दस्तावेज लगाकर कार्ड बनवाए गए थे। अब मकान सर्वे के दौरान इन परिवारों को विशेष निगरानी सूची में रखा गया है। प्रशासन पहले इन परिवारों को नोटिस देकर सुनवाई का मौका देगा। यदि संबंधित परिवार यह साबित नहीं कर पाते कि वे वास्तव में गरीबी रेखा के पात्र हैं, तो उनका नाम सूची से हटा दिया जाएगा और कार्ड भी निरस्त कर दिए जाएंगे। शहर में इस खबर के बाद कई इलाकों में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए ताकि पात्र गरीब परिवार प्रभावित न हों।
बीपीएल कार्ड सूची को लेकर भी प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों में रही है। जानकारी के मुताबिक साल 2021 तक जिले में बीपीएल कार्डधारियों की सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध रहती थी। आम लोग भी वहां जाकर जानकारी देख सकते थे। लेकिन जैसे-जैसे फर्जी कार्डधारियों के मामले सामने आने लगे, सूची को सार्वजनिक पोर्टल से हटा दिया गया। अब केवल आवेदनकर्ता ही अपने आधार नंबर या आवेदन नंबर के जरिए स्थिति जांच सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार सर्वे के दौरान डेटा का क्रॉस वेरिफिकेशन भी किया जाएगा ताकि गलत तरीके से लाभ लेने वालों की पहचान आसानी से हो सके।
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MP में फर्जी BPL कार्डधारियों पर बड़ा एक्शन, राशन कार्ड से कटेंगे 1.50 लाख परिवारों के नाम
भोपाल (म.प्र.)
राजधानी में अब फर्जी तरीके से बनाए गए BPL कार्डों पर बड़ा एक्शन होने जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारी के मुताबिक शहर के करीब 1.50 लाख परिवारों के नाम गरीबी रेखा सूची से हटाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो पक्के मकानों में रह रहे हैं, अच्छी आर्थिक स्थिति में हैं, लेकिन सालों से बीपीएल कार्ड के जरिए सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे। अब जनगणना अभियान और मकान सर्वे के दौरान ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई शहर के सभी 85 वार्डों में की जा रही है, जहां कच्चे और पक्के मकानों की अलग-अलग मैपिंग हो रही है। इसी दौरान बीपीएल श्रेणी में दर्ज परिवारों की वास्तविक स्थिति भी देखी जा रही है।
जांच में बड़ी संख्या में ऐसे मकान सामने आए हैं जो पूरी तरह पक्के हैं और जिनमें रहने वाले परिवार आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद इनके पास बीपीएल कार्ड मौजूद हैं। सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में गलत दस्तावेज लगाकर कार्ड बनवाए गए थे। अब मकान सर्वे के दौरान इन परिवारों को विशेष निगरानी सूची में रखा गया है। प्रशासन पहले इन परिवारों को नोटिस देकर सुनवाई का मौका देगा। यदि संबंधित परिवार यह साबित नहीं कर पाते कि वे वास्तव में गरीबी रेखा के पात्र हैं, तो उनका नाम सूची से हटा दिया जाएगा और कार्ड भी निरस्त कर दिए जाएंगे। शहर में इस खबर के बाद कई इलाकों में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए ताकि पात्र गरीब परिवार प्रभावित न हों।
बीपीएल कार्ड सूची को लेकर भी प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों में रही है। जानकारी के मुताबिक साल 2021 तक जिले में बीपीएल कार्डधारियों की सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध रहती थी। आम लोग भी वहां जाकर जानकारी देख सकते थे। लेकिन जैसे-जैसे फर्जी कार्डधारियों के मामले सामने आने लगे, सूची को सार्वजनिक पोर्टल से हटा दिया गया। अब केवल आवेदनकर्ता ही अपने आधार नंबर या आवेदन नंबर के जरिए स्थिति जांच सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार सर्वे के दौरान डेटा का क्रॉस वेरिफिकेशन भी किया जाएगा ताकि गलत तरीके से लाभ लेने वालों की पहचान आसानी से हो सके।
