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इंदौर में लोकायुक्त का बड़ा ट्रैप, PWD के 2 अफसर 90 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर लोकायुक्त कार्रवाई में पीडब्ल्यूडी के दो अधिकारी 90 हजार रिश्वत लेते पकड़े गए, भुगतान के बदले मांगा था कमीशन।
इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इंदौर में लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई शिकायत के सत्यापन के बाद सुनियोजित तरीके से की गई।
घटना का पूरा मामला
शिकायतकर्ता राघवेन्द्र सिंह गुर्जर, जो ग्वालियर के निवासी हैं और एक निजी फर्म में लायजनिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं, ने लोकायुक्त से संपर्क किया था। उनकी फर्म को सितंबर 2025 में राऊ से बामपुरा तक इलेक्ट्रिक सिटिंग का काम करीब 20 लाख रुपए में मिला था। काम तय समय में पूरा कर दिया गया, लेकिन भुगतान का बड़ा हिस्सा लंबित रह गया।
भुगतान के बदले मांगी गई रिश्वत
शिकायत के अनुसार, भुगतान जारी करने के एवज में विभागीय अधिकारियों ने कमीशन की मांग की। सहायक यंत्री बालकुमार जैन ने 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपए और सब इंजीनियर धीरेंद्र कुमार नीमा ने 2 प्रतिशत के हिसाब से 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। कुल मिलाकर 90 हजार रुपए देने का दबाव बनाया गया।
लोकायुक्त की योजना और ट्रैप कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पहले मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर 7 अप्रैल को ट्रैप दल का गठन किया गया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को आरोपियों के पास भेजा गया, जहां जैसे ही रिश्वत की रकम दी गई, टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस आगे की जांच में जुटी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
इस कार्रवाई से साफ संदेश
यह कार्रवाई सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
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इंदौर में लोकायुक्त का बड़ा ट्रैप, PWD के 2 अफसर 90 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इंदौर में लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई शिकायत के सत्यापन के बाद सुनियोजित तरीके से की गई।
घटना का पूरा मामला
शिकायतकर्ता राघवेन्द्र सिंह गुर्जर, जो ग्वालियर के निवासी हैं और एक निजी फर्म में लायजनिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं, ने लोकायुक्त से संपर्क किया था। उनकी फर्म को सितंबर 2025 में राऊ से बामपुरा तक इलेक्ट्रिक सिटिंग का काम करीब 20 लाख रुपए में मिला था। काम तय समय में पूरा कर दिया गया, लेकिन भुगतान का बड़ा हिस्सा लंबित रह गया।
भुगतान के बदले मांगी गई रिश्वत
शिकायत के अनुसार, भुगतान जारी करने के एवज में विभागीय अधिकारियों ने कमीशन की मांग की। सहायक यंत्री बालकुमार जैन ने 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपए और सब इंजीनियर धीरेंद्र कुमार नीमा ने 2 प्रतिशत के हिसाब से 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। कुल मिलाकर 90 हजार रुपए देने का दबाव बनाया गया।
लोकायुक्त की योजना और ट्रैप कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पहले मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर 7 अप्रैल को ट्रैप दल का गठन किया गया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को आरोपियों के पास भेजा गया, जहां जैसे ही रिश्वत की रकम दी गई, टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस आगे की जांच में जुटी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
इस कार्रवाई से साफ संदेश
यह कार्रवाई सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
