इंदौर जल संकट: दूषित पानी से 29वीं मौत, तीन मरीज ICU में; हाईकोर्ट ने जांच आयोग गठित किया

इंदौर (म.प्र.)

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भागीरथपुरा में शव रखकर प्रदर्शन, एक मरीज वेंटिलेटर पर; हाईकोर्ट ने कहा– स्वच्छ पानी जीवन का संवैधानिक अधिकार

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा क्षेत्र की जल आपूर्ति से जुड़ा संकट और गहरा गया है। दूषित पानी से मंगलवार को एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। बुधवार को मृतक खूबचंद के परिजनों ने अंतिम संस्कार से पहले शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। वहीं, इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल इस जलजनित बीमारी से पीड़ित छह मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है, जबकि एक मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि नए मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन इलाके में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।

मृतक खूबचंद (63), निवासी भागीरथपुरा, पिछले करीब 15 दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित थे। परिजनों के अनुसार, उन्हें स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिया गया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और घर पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बीमारी की जड़ दूषित पेयजल है, जिसकी शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं।

इसी बीच, इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार और नगर निगम की रिपोर्ट पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और यह मामला एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति का संकेत देता है। कोर्ट ने जल प्रदूषण के कारणों, मौतों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकारी रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों और शब्दावली पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने माना कि मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए हैं और रिपोर्ट में पर्याप्त वैज्ञानिक और चिकित्सकीय आधार का अभाव है। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच, नियमित स्वास्थ्य शिविर और चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

नगर निगम ने अदालत को बताया कि दूषित पानी की शिकायत वाले 16 बोरवेल बंद कर दिए गए हैं और कुछ क्षेत्रों में वैकल्पिक पाइपलाइन से जल आपूर्ति शुरू की गई है। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पानी की जांच सीमित मानकों पर की जा रही है, जो पर्याप्त नहीं है। मुआवजे को लेकर भी सवाल उठे, जहां बताया गया कि मृतकों के परिजनों को मिली सहायता रेडक्रॉस के माध्यम से है, न कि सीधे राज्य सरकार की ओर से।

भागीरथपुरा में हालात फिलहाल नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतों और जांच की प्रक्रिया ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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28 Jan 2026 By Nitin Trivedi

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इंदौर (म.प्र.)

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा क्षेत्र की जल आपूर्ति से जुड़ा संकट और गहरा गया है। दूषित पानी से मंगलवार को एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। बुधवार को मृतक खूबचंद के परिजनों ने अंतिम संस्कार से पहले शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। वहीं, इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल इस जलजनित बीमारी से पीड़ित छह मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है, जबकि एक मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि नए मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन इलाके में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।

मृतक खूबचंद (63), निवासी भागीरथपुरा, पिछले करीब 15 दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित थे। परिजनों के अनुसार, उन्हें स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिया गया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और घर पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बीमारी की जड़ दूषित पेयजल है, जिसकी शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं।

इसी बीच, इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार और नगर निगम की रिपोर्ट पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और यह मामला एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति का संकेत देता है। कोर्ट ने जल प्रदूषण के कारणों, मौतों की वास्तविक संख्या और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकारी रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों और शब्दावली पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने माना कि मौतों के कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए हैं और रिपोर्ट में पर्याप्त वैज्ञानिक और चिकित्सकीय आधार का अभाव है। कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच, नियमित स्वास्थ्य शिविर और चार सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

नगर निगम ने अदालत को बताया कि दूषित पानी की शिकायत वाले 16 बोरवेल बंद कर दिए गए हैं और कुछ क्षेत्रों में वैकल्पिक पाइपलाइन से जल आपूर्ति शुरू की गई है। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पानी की जांच सीमित मानकों पर की जा रही है, जो पर्याप्त नहीं है। मुआवजे को लेकर भी सवाल उठे, जहां बताया गया कि मृतकों के परिजनों को मिली सहायता रेडक्रॉस के माध्यम से है, न कि सीधे राज्य सरकार की ओर से।

भागीरथपुरा में हालात फिलहाल नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतों और जांच की प्रक्रिया ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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