खजुराहो नृत्य समारोह का भव्य आगाज़, मुख्यमंत्री बोले—राष्ट्रीय धरोहर का जीवंत उत्सव

भोपाल (म.प्र.)

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विश्व धरोहर नगरी में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयोजन शुरू; भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक मंच

मध्यप्रदेश के विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह भारत की सांस्कृतिक आत्मा और राष्ट्रीय धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने इसे भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने वाला महत्त्वपूर्ण आयोजन बताया।

समारोह का आयोजन संस्कृति विभाग और उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम 20 फरवरी से प्रारंभ होकर सात दिनों तक चलेगा, जिसमें देश और विदेश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि खजुराहो केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक चेतना का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के आह्वान के अनुरूप सरकार प्राचीन संस्कृति और आधुनिक अभिव्यक्ति के समन्वय को बढ़ावा दे रही है। राज्य सरकार ने सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में भी वृद्धि की है।

समारोह के उद्घाटन अवसर पर नटराज थीम पर केंद्रित चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें भारतीय नृत्य मुद्राओं, खजुराहो की सांस्कृतिक विरासत और बुंदेलखंड के इतिहास पर आधारित प्रकाशन शामिल हैं। कार्यक्रम में संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास विभाग के प्रतिनिधियों सहित जनप्रतिनिधि और कला जगत की हस्तियाँ उपस्थित रहीं।

शुभारंभ दिवस पर कथक नृत्यांगना मैत्रेयी पहाड़ी ने ‘प्रतिष्ठा : शाश्वत तत्वों का आह्वान’ शीर्षक प्रस्तुति दी, जिसमें पंचतत्व की दार्शनिक अवधारणा को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। इसके बाद भरतनाट्यम कलाकार अनुराधा वेंकटरमन ने शिव के विविध रूपों पर आधारित प्रस्तुति दी। ओडिसी नृत्यांगना शुभदा वरडाकर ने अद्वैत दर्शन पर आधारित रचना ‘अभेदम्’ प्रस्तुत की।

खजुराहो नृत्य समारोह को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्त्वपूर्ण मंच माना जाता है। सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले दर्शक और कलाकार इसे वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का अवसर मानते हैं।

दूसरे दिन के कार्यक्रम में कथक, छाऊ और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियाँ निर्धारित हैं। आयोजकों के अनुसार, आगामी दिनों में विभिन्न राज्यों और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियाँ समारोह को और समृद्ध बनाएंगी।

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