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मोहन यादव का बड़ा ऐलान, मध्य प्रदेश में 6 महीने में UCC लागू करने का लक्ष्य तय
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी तेज, सीएम मोहन यादव ने UCC पर 6 महीने में लागू करने की दिशा में बड़ा निर्देश दिया।
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में गंभीर तैयारी शुरू कर दी है। इस विषय को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया निर्देशों के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
सीएम मोहन यादव का स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे UCC के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। कैबिनेट बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई, जिसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई है।
उच्च स्तरीय समिति के गठन की तैयारी
गृह विभाग में जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति बनाए जाने की संभावना है। यह समिति देश के अन्य राज्यों में लागू किए गए UCC मॉडलों का अध्ययन करेगी और मध्य प्रदेश के लिए एक व्यावहारिक ढांचा तैयार करेगी। इसके बाद इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
सरकार गोवा, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर रही है। इन राज्यों में लागू या प्रस्तावित कानूनों को आधार बनाकर मध्य प्रदेश के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे।
मानसून सत्र 2026 में बड़ा प्रस्ताव संभव
सरकारी योजना के अनुसार UCC से जुड़ा प्रस्ताव मानसून सत्र 2026 में कैबिनेट के सामने लाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि इस कानून को लागू करने से पहले सभी सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाए।
यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा
UCC लागू होने के बाद सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े नियम समान हो जाएंगे। विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा और तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा। महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार भी सुनिश्चित किया जाएगा।
आदिवासी परंपराओं पर बड़ी चुनौती
मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी है, जिनकी पारंपरिक विवाह और सामाजिक प्रथाएं अलग हैं। दापा प्रथा, भगेली विवाह, सेवा विवाह और नातरा जैसी परंपराएं UCC के लागू होने में बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं। सरकार को इन संवेदनशील पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीति बनानी होगी।
अन्य राज्यों से तुलना
उत्तराखंड ने सबसे पहले स्वतंत्र भारत में UCC लागू किया है, जबकि गुजरात और असम जैसे राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। गोवा में पहले से ही पुराना सिविल कोड लागू है, जिसे UCC का एक मॉडल माना जाता है।
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मोहन यादव का बड़ा ऐलान, मध्य प्रदेश में 6 महीने में UCC लागू करने का लक्ष्य तय
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में गंभीर तैयारी शुरू कर दी है। इस विषय को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया निर्देशों के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
सीएम मोहन यादव का स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे UCC के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। कैबिनेट बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई, जिसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई है।
उच्च स्तरीय समिति के गठन की तैयारी
गृह विभाग में जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति बनाए जाने की संभावना है। यह समिति देश के अन्य राज्यों में लागू किए गए UCC मॉडलों का अध्ययन करेगी और मध्य प्रदेश के लिए एक व्यावहारिक ढांचा तैयार करेगी। इसके बाद इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
सरकार गोवा, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर रही है। इन राज्यों में लागू या प्रस्तावित कानूनों को आधार बनाकर मध्य प्रदेश के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे।
मानसून सत्र 2026 में बड़ा प्रस्ताव संभव
सरकारी योजना के अनुसार UCC से जुड़ा प्रस्ताव मानसून सत्र 2026 में कैबिनेट के सामने लाया जा सकता है। सरकार चाहती है कि इस कानून को लागू करने से पहले सभी सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाए।
यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा
UCC लागू होने के बाद सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े नियम समान हो जाएंगे। विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा और तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा। महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार भी सुनिश्चित किया जाएगा।
आदिवासी परंपराओं पर बड़ी चुनौती
मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी है, जिनकी पारंपरिक विवाह और सामाजिक प्रथाएं अलग हैं। दापा प्रथा, भगेली विवाह, सेवा विवाह और नातरा जैसी परंपराएं UCC के लागू होने में बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं। सरकार को इन संवेदनशील पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीति बनानी होगी।
अन्य राज्यों से तुलना
उत्तराखंड ने सबसे पहले स्वतंत्र भारत में UCC लागू किया है, जबकि गुजरात और असम जैसे राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। गोवा में पहले से ही पुराना सिविल कोड लागू है, जिसे UCC का एक मॉडल माना जाता है।
