20 जुलाई से शुरू होगा मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र

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पांच दिवसीय सत्र में सरकार पेश करेगी पहला अनुपूरक बजट, UCC और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी रह सकती है चर्चा

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 से 24 जुलाई तक पांच दिवसीय सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस दौरान राज्य सरकार वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सत्र को लेकर प्रशासनिक और विधायी स्तर पर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विधानसभा के नियमों के अनुसार किसी भी सत्र के आयोजन से कम से कम एक माह पहले उसकी अधिसूचना जारी करना आवश्यक माना जाता है। इसी क्रम में 19 जून तक मानसून सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद विधायकों को प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विषयों से संबंधित सूचनाएं देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार सदन में चर्चा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियम 139 के तहत होने वाली चर्चाओं और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए समय सीमा तय करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार के लिए यह सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त विभाग पहले ही विभिन्न विभागों से अतिरिक्त बजटीय आवश्यकताओं के प्रस्ताव मंगवा चुका है। इन प्रस्तावों का परीक्षण और अध्ययन जारी है, जिसके आधार पर पहला अनुपूरक बजट तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बजट में अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि चल रही प्रमुख योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

मानसून सत्र में स्वामित्व योजना भी प्रमुख विषयों में शामिल रह सकती है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लाखों लोगों को संपत्ति संबंधी अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से 48 लाख से अधिक अधिकार पत्रधारकों को आवास या भूखंड का स्वामित्व प्रदान करने के लिए निशुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था को कानूनी आधार देने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण नागरिकों को संपत्ति संबंधी अधिकारों में मजबूती मिलेगी और विवादों में कमी आएगी। सत्र के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी का मुद्दा भी चर्चा में रह सकता है। राज्य सरकार ने इस विषय पर सुझाव आमंत्रित करने के लिए 15 जून तक का समय दिया था। अब सुझाव प्राप्त होने के बाद सरकार उनके अध्ययन और विश्लेषण की प्रक्रिया में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई सार्वजनिक मंचों से यूसीसी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि यूसीसी पर गठित पांच सदस्यीय समिति की प्रारंभिक सिफारिशों और सुझावों को मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जा सकता है।

सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यूसीसी लागू करने के विषय में व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आदिवासी समुदायों की विशेष परिस्थितियों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यूसीसी से जुड़ा कोई प्रारूप सदन में आता है तो इस पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े विधेयक भी मानसून सत्र के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलावों को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों से जुड़े कुछ संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि इन प्रस्तावों की अंतिम रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। विपक्ष भी मानसून सत्र को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है। प्रदेश में किसानों, बिजली, पानी, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के माध्यम से जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी। ऐसे में पांच दिन का यह सत्र राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में बजट, स्वामित्व योजना, यूसीसी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।

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16 Jun 2026 By Vaishnavi.J

20 जुलाई से शुरू होगा मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र

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मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 से 24 जुलाई तक पांच दिवसीय सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस दौरान राज्य सरकार वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सत्र को लेकर प्रशासनिक और विधायी स्तर पर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विधानसभा के नियमों के अनुसार किसी भी सत्र के आयोजन से कम से कम एक माह पहले उसकी अधिसूचना जारी करना आवश्यक माना जाता है। इसी क्रम में 19 जून तक मानसून सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद विधायकों को प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विषयों से संबंधित सूचनाएं देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार सदन में चर्चा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियम 139 के तहत होने वाली चर्चाओं और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के लिए समय सीमा तय करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार के लिए यह सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त विभाग पहले ही विभिन्न विभागों से अतिरिक्त बजटीय आवश्यकताओं के प्रस्ताव मंगवा चुका है। इन प्रस्तावों का परीक्षण और अध्ययन जारी है, जिसके आधार पर पहला अनुपूरक बजट तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बजट में अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए जा सकते हैं। सरकार का प्रयास रहेगा कि चल रही प्रमुख योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

मानसून सत्र में स्वामित्व योजना भी प्रमुख विषयों में शामिल रह सकती है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लाखों लोगों को संपत्ति संबंधी अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से 48 लाख से अधिक अधिकार पत्रधारकों को आवास या भूखंड का स्वामित्व प्रदान करने के लिए निशुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था को कानूनी आधार देने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण नागरिकों को संपत्ति संबंधी अधिकारों में मजबूती मिलेगी और विवादों में कमी आएगी। सत्र के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी का मुद्दा भी चर्चा में रह सकता है। राज्य सरकार ने इस विषय पर सुझाव आमंत्रित करने के लिए 15 जून तक का समय दिया था। अब सुझाव प्राप्त होने के बाद सरकार उनके अध्ययन और विश्लेषण की प्रक्रिया में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई सार्वजनिक मंचों से यूसीसी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि यूसीसी पर गठित पांच सदस्यीय समिति की प्रारंभिक सिफारिशों और सुझावों को मानसून सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखा जा सकता है।

सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यूसीसी लागू करने के विषय में व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही आदिवासी समुदायों की विशेष परिस्थितियों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यूसीसी से जुड़ा कोई प्रारूप सदन में आता है तो इस पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े विधेयक भी मानसून सत्र के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलावों को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों से जुड़े कुछ संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि इन प्रस्तावों की अंतिम रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। विपक्ष भी मानसून सत्र को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है। प्रदेश में किसानों, बिजली, पानी, बेरोजगारी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के माध्यम से जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी। ऐसे में पांच दिन का यह सत्र राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में बजट, स्वामित्व योजना, यूसीसी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा आने वाले महीनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/monsoon-session-of-madhya-pradesh-assembly-will-start-from-july/article-56112

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