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सागर में ‘मुस्कान मिशन’: कटे होंठ-तालू से जूझ रहे बच्चों को मिल रही नई जिंदगी
Sagar, MP
मध्य प्रदेश के सागर और भोपाल संभाग में अब उन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है, जो जन्म से कटे होंठ और तालू (क्लेफ्ट) जैसी समस्या से जूझ रहे थे। यह बदलाव एक ऐसी पहल के जरिए संभव हो रहा है, जो कॉर्पोरेट जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार का मजबूत उदाहरण बन चुकी है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी ने स्माइल ट्रेन इंडिया के साथ मिलकर एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य उन बच्चों तक बेहतर और सुलभ उपचार पहुंचाना है, जो संसाधनों की कमी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं।
अक्टूबर 2025 से अब तक इस पहल के तहत करीब 250 बच्चों की सफल और पूरी तरह निःशुल्क सर्जरी की जा चुकी है। ये सर्जरी न सिर्फ उनके चेहरे की बनावट सुधार रही हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को भी नई दिशा दे रही हैं।
यह पहल केवल सर्जिकल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव पर भी केंद्रित है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि माता-पिता समय रहते इस समस्या की पहचान कर सकें और इलाज के लिए आगे आएं। सरकारी जिला अस्पतालों में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए गए हैं, जिससे जरूरतमंद परिवार आसानी से जानकारी और सहायता प्राप्त कर पा रहे हैं।
बीपीसीएल बीना रिफाइनरी के जनरल मैनेजर (एचआर) शिरीष चांदेकर के अनुसार, “सच्चा कॉर्पोरेट नेतृत्व केवल व्यापारिक सफलता तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह समाज के भविष्य में निवेश से जुड़ा होता है। इस पहल के माध्यम से हम बच्चों को न सिर्फ उपचार दे रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी दे रहे हैं।”
वहीं अंजली कटोच, हेड ऑफ कम्युनिकेशंस एंड बिज़नेस डेवलपमेंट, स्माइल ट्रेन इंडिया का कहना है कि “हर सर्जरी एक बच्चे के लिए नई जिंदगी और एक परिवार के लिए नई उम्मीद लेकर आती है। कॉर्पोरेट सहयोग से ही ऐसे स्थायी बदलाव संभव हो पाते हैं।”
भारत में हर साल करीब 35 हजार बच्चे कटे होंठ और तालू के साथ जन्म लेते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह समस्या उनके खान-पान, बोलने, सुनने और मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण यह चुनौती और बढ़ जाती है।
ऐसे में बीपीसीएल बीना रिफाइनरी और स्माइल ट्रेन इंडिया की यह साझेदारी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। यह पहल दिखाती है कि जब कॉर्पोरेट सेक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक संगठन मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में नजर आता है।
आज सागर और भोपाल में लौटती मुस्कानें इस बात का प्रमाण हैं कि सही दिशा में किया गया प्रयास, एक पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल सकता है।
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सागर में ‘मुस्कान मिशन’: कटे होंठ-तालू से जूझ रहे बच्चों को मिल रही नई जिंदगी
Sagar, MP
मध्य प्रदेश के सागर और भोपाल संभाग में अब उन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है, जो जन्म से कटे होंठ और तालू (क्लेफ्ट) जैसी समस्या से जूझ रहे थे। यह बदलाव एक ऐसी पहल के जरिए संभव हो रहा है, जो कॉर्पोरेट जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार का मजबूत उदाहरण बन चुकी है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी ने स्माइल ट्रेन इंडिया के साथ मिलकर एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य उन बच्चों तक बेहतर और सुलभ उपचार पहुंचाना है, जो संसाधनों की कमी के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं।
अक्टूबर 2025 से अब तक इस पहल के तहत करीब 250 बच्चों की सफल और पूरी तरह निःशुल्क सर्जरी की जा चुकी है। ये सर्जरी न सिर्फ उनके चेहरे की बनावट सुधार रही हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को भी नई दिशा दे रही हैं।
यह पहल केवल सर्जिकल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव पर भी केंद्रित है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि माता-पिता समय रहते इस समस्या की पहचान कर सकें और इलाज के लिए आगे आएं। सरकारी जिला अस्पतालों में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए गए हैं, जिससे जरूरतमंद परिवार आसानी से जानकारी और सहायता प्राप्त कर पा रहे हैं।
बीपीसीएल बीना रिफाइनरी के जनरल मैनेजर (एचआर) शिरीष चांदेकर के अनुसार, “सच्चा कॉर्पोरेट नेतृत्व केवल व्यापारिक सफलता तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह समाज के भविष्य में निवेश से जुड़ा होता है। इस पहल के माध्यम से हम बच्चों को न सिर्फ उपचार दे रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी दे रहे हैं।”
वहीं अंजली कटोच, हेड ऑफ कम्युनिकेशंस एंड बिज़नेस डेवलपमेंट, स्माइल ट्रेन इंडिया का कहना है कि “हर सर्जरी एक बच्चे के लिए नई जिंदगी और एक परिवार के लिए नई उम्मीद लेकर आती है। कॉर्पोरेट सहयोग से ही ऐसे स्थायी बदलाव संभव हो पाते हैं।”
भारत में हर साल करीब 35 हजार बच्चे कटे होंठ और तालू के साथ जन्म लेते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह समस्या उनके खान-पान, बोलने, सुनने और मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण यह चुनौती और बढ़ जाती है।
ऐसे में बीपीसीएल बीना रिफाइनरी और स्माइल ट्रेन इंडिया की यह साझेदारी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। यह पहल दिखाती है कि जब कॉर्पोरेट सेक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक संगठन मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में नजर आता है।
आज सागर और भोपाल में लौटती मुस्कानें इस बात का प्रमाण हैं कि सही दिशा में किया गया प्रयास, एक पूरी पीढ़ी का भविष्य बदल सकता है।
