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जबलपुर में बड़ी मां की हत्या कर चेहरा कुचला, भतीजा गिरफ्तार: जमीन और पेंशन के लालच में वारदात; AI तकनीक से हुई पहचान
Jabalpur, MP
दो दिन तक पहचान अज्ञात रही, चेहरा बुरी तरह क्षत-विक्षत होने से पुलिस को नहीं मिला कोई सुराग; एआई-संशोधित फोटो से महिला की पहचान निभौरा की फूलबाई के रूप में हुई, भतीजा तुलसी केवट ने अपराध कबूला।
जबलपुर में जमीन और पैसे के लालच ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया। पनागर थाना क्षेत्र में मिली एक बुजुर्ग महिला की हत्या का राज उस समय खुला जब पुलिस ने शिनाख्त के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का सहारा लिया। चेहरे के बुरी तरह क्षत-विक्षत होने के कारण पहचान लगभग असंभव थी, लेकिन एआई द्वारा पुनर्निर्मित फोटो से मृतका की पहचान 58 वर्षीय फूलबाई के रूप में हो सकी, जिसकी हत्या उसके सगे भतीजे तुलसी केवट ने 14 नवंबर को की थी।
यह मामला उस समय सामने आया जब 16 नवंबर को नरगवां गांव के बाहर रतन रजक के खेत में एक महिला का शव मिला। महिला का चेहरा कुचला हुआ था और सिर व गले पर गंभीर चोटें थीं। मौके पर दवाई, शॉल और सोने-चांदी के जेवर पड़े थे, जिससे स्पष्ट था कि लूटपाट मकसद नहीं था। पहचान न होने पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और खोज शुरू की।
शिनाख्ती के लिए पुलिस ने 200 से अधिक घरों में पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुमशुदा महिलाओं के रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला कि प्रदेश में 510 महिलाएं लापता हैं—फिर भी किसी का चेहरा मेल नहीं खाया। महिला के हाथ-पैर पर गुदना देखकर पुलिस ने आदिवासी क्षेत्रों डिंडौरी, मंडला, कुंडम और खमरिया में भी टीमें भेजीं, पर सफलता नहीं मिली।
आखिरकार जबलपुर पुलिस ने एआई तकनीक से क्षतिग्रस्त फोटो को ठीक करवाया, जिसके बाद पहचान आसान हुई। इस फोटो को 500 से अधिक स्थानों पर लगाया गया और कई लोगों को दिखाया गया। इसी प्रक्रिया में जानकारी मिली कि मृतका निभौरा गांव की फूलबाई केवट है, जो पति की मौत के बाद अपनी बेटियों के पास रहती थी और कुछ समय पहले पनागर अपने भतीजे तुलसी केवट के पास आई थी।
एएसपी जितेंद्र सिंह के अनुसार, पुलिस ने मंगलवार को तुलसी केवट को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार की। आरोपी ने बताया कि फूलबाई को 15 हजार रुपए पेंशन मिलती थी, जिसकी बड़ी राशि वह तुलसी को देती थी। दो साल पहले उसने उसे दो लाख रुपए भी दिए थे। मृतका की बैंक पासबुक भी हमेशा आरोपी के पास ही रहती थी। इसके अलावा, उसके नाम पर निभौरा गांव में एक एकड़ जमीन थी, जिस पर तुलसी की नजर थी।
पुलिस के अनुसार, फूलबाई 28 अक्टूबर को बेटी के घर से यह कहकर निकली थी कि वह भतीजे के घर रहेगी। 14 नवंबर की शाम आरोपी ने खेत के पास ले जाकर बड़ी मां की हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए चेहरा कुचल दिया।
यह घटना न सिर्फ एक पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन गई है बल्कि तकनीक के सही उपयोग से अपराध सुलझाने की मिसाल भी पेश करती है। एआई-संशोधित फोटो के बिना इस हत्या का खुलासा मुश्किल था।
आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस आगे जमीन और पैसों संबंधी विवाद की तह तक जाने में जुटी है।
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जबलपुर में जमीन और पैसे के लालच ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया। पनागर थाना क्षेत्र में मिली एक बुजुर्ग महिला की हत्या का राज उस समय खुला जब पुलिस ने शिनाख्त के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का सहारा लिया। चेहरे के बुरी तरह क्षत-विक्षत होने के कारण पहचान लगभग असंभव थी, लेकिन एआई द्वारा पुनर्निर्मित फोटो से मृतका की पहचान 58 वर्षीय फूलबाई के रूप में हो सकी, जिसकी हत्या उसके सगे भतीजे तुलसी केवट ने 14 नवंबर को की थी।
यह मामला उस समय सामने आया जब 16 नवंबर को नरगवां गांव के बाहर रतन रजक के खेत में एक महिला का शव मिला। महिला का चेहरा कुचला हुआ था और सिर व गले पर गंभीर चोटें थीं। मौके पर दवाई, शॉल और सोने-चांदी के जेवर पड़े थे, जिससे स्पष्ट था कि लूटपाट मकसद नहीं था। पहचान न होने पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और खोज शुरू की।
शिनाख्ती के लिए पुलिस ने 200 से अधिक घरों में पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुमशुदा महिलाओं के रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला कि प्रदेश में 510 महिलाएं लापता हैं—फिर भी किसी का चेहरा मेल नहीं खाया। महिला के हाथ-पैर पर गुदना देखकर पुलिस ने आदिवासी क्षेत्रों डिंडौरी, मंडला, कुंडम और खमरिया में भी टीमें भेजीं, पर सफलता नहीं मिली।
आखिरकार जबलपुर पुलिस ने एआई तकनीक से क्षतिग्रस्त फोटो को ठीक करवाया, जिसके बाद पहचान आसान हुई। इस फोटो को 500 से अधिक स्थानों पर लगाया गया और कई लोगों को दिखाया गया। इसी प्रक्रिया में जानकारी मिली कि मृतका निभौरा गांव की फूलबाई केवट है, जो पति की मौत के बाद अपनी बेटियों के पास रहती थी और कुछ समय पहले पनागर अपने भतीजे तुलसी केवट के पास आई थी।
एएसपी जितेंद्र सिंह के अनुसार, पुलिस ने मंगलवार को तुलसी केवट को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार की। आरोपी ने बताया कि फूलबाई को 15 हजार रुपए पेंशन मिलती थी, जिसकी बड़ी राशि वह तुलसी को देती थी। दो साल पहले उसने उसे दो लाख रुपए भी दिए थे। मृतका की बैंक पासबुक भी हमेशा आरोपी के पास ही रहती थी। इसके अलावा, उसके नाम पर निभौरा गांव में एक एकड़ जमीन थी, जिस पर तुलसी की नजर थी।
पुलिस के अनुसार, फूलबाई 28 अक्टूबर को बेटी के घर से यह कहकर निकली थी कि वह भतीजे के घर रहेगी। 14 नवंबर की शाम आरोपी ने खेत के पास ले जाकर बड़ी मां की हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए चेहरा कुचल दिया।
यह घटना न सिर्फ एक पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन गई है बल्कि तकनीक के सही उपयोग से अपराध सुलझाने की मिसाल भी पेश करती है। एआई-संशोधित फोटो के बिना इस हत्या का खुलासा मुश्किल था।
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