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सावन में ओंकारेश्वर दर्शन की व्यवस्था बदलेगी, एंट्री से ट्रैफिक तक नए नियम
ओंकारेश्वर
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तैयारी, अलग प्रवेश-निकासी मार्ग और वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था होगी लागू
सावन के दौरान मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बदली हुई व्यवस्था के तहत दर्शन करने होंगे। बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर में प्रवेश और निकासी के रास्ते अलग किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ओंकारेश्वर नगर की यातायात व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं और शीघ्र दर्शन व प्रोटोकॉल श्रेणी में आने वालों के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए जाएंगे। प्रशासन का फोकस मंदिर के आसपास एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने से रोकने और श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनाए रखने पर है।
ओंकारेश्वर पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार शाम व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मंदिर परिसर से लेकर पार्किंग और प्रमुख रास्तों तक की व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सावन की भीड़ बढ़ने से पहले जरूरी बदलाव पूरे कर लिए जाएं। प्रस्तावित व्यवस्था अगले दो से तीन दिनों में लागू किए जाने की तैयारी है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में सावन में काफी बढ़ जाती है। सोमवार, छुट्टी और विशेष धार्मिक तिथियों पर दबाव और ज्यादा रहता है। इसी वजह से इस बार दर्शन मार्ग को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने और वापस जाने वाले श्रद्धालु एक ही रास्ते पर आमने-सामने न हों।
नई योजना के मुताबिक सामान्य दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सुखदेव मुनि द्वार की ओर से मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। श्रद्धालु यहां से निर्धारित सीढ़ियों और कतार वाले रास्ते से आगे बढ़ेंगे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें गर्भगृह से करीब 10 फीट की दूरी से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराने की व्यवस्था रहेगी। दर्शन पूरा होने के बाद उसी रास्ते से वापस लौटने की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं को चांदी गेट की ओर से बाहर निकाला जाएगा और आगे झूला पुल वाले मार्ग से उनकी निकासी कराई जाएगी। इससे मंदिर की ओर आने और वहां से लौटने वाली भीड़ अलग-अलग दिशा में चल सकेगी।
मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम जगह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संभालने की रहती है। कतार धीमी होने पर पीछे तेजी से भीड़ बढ़ती है और इसका असर पुलों तथा मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों तक दिखाई देता है। सावन में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रवेश और निकासी के रास्तों को पहले से नियंत्रित किया जाएगा। बैरिकेडिंग और कतार प्रबंधन की व्यवस्था भी इसी हिसाब से की जाएगी। भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजने की व्यवस्था रखी जा सकती है।
शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल के जरिए मंदिर पहुंचने वाले लोगों के लिए सामान्य श्रद्धालुओं से अलग रास्ता रहेगा। अभी जिस गेट का इस्तेमाल निकासी के लिए किया जा रहा है, उसे इस श्रेणी के श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग के रूप में उपयोग करने की तैयारी है। यहां से आने वाले श्रद्धालु दर्शन करने के बाद लकड़ी गेट की ओर से बाहर जाएंगे। अलग रास्ता होने से सामान्य कतार पर अतिरिक्त दबाव कम करने की कोशिश होगी।
शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल से जुड़े टिकट काउंटर की जगह में भी बदलाव किया जा रहा है। इन्हें ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि टिकट या दूसरी औपचारिकताओं के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर के आसपास रुकना नहीं पड़ेगा। प्रशासन चाहता है कि मंदिर के नजदीक पहुंचने के बाद लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहे और अनावश्यक भीड़ किसी एक जगह जमा न हो।
सावन की नई व्यवस्था केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी। ओंकारेश्वर नगर में ट्रैफिक को लेकर भी बड़े बदलाव किए जाएंगे। पूरे नगर में वन-वे यातायात व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। वाहनों के आने और जाने के रास्तों को अलग रखा जाएगा, ताकि संकरे मार्गों पर जाम की स्थिति न बने। बाहरी वाहनों को सीधे भीड़ वाले प्रमुख क्षेत्रों तक जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें प्रशासन द्वारा तय पार्किंग स्थलों पर खड़ा कराया जाएगा।
ओंकारेश्वर में सावन के दौरान ट्रैफिक बड़ी चुनौती बन जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु निजी कार, बस और दूसरे वाहनों से यहां पहुंचते हैं। एक साथ बड़ी संख्या में वाहन आने से मुख्य मार्ग के साथ नगर के अंदर की सड़कों पर भी दबाव बढ़ जाता है। इस बार वाहनों को पहले ही निर्धारित पार्किंग में रोकने और वहां से श्रद्धालुओं की आगे की आवाजाही को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है।
वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों को पुराने रास्ते के बजाय प्रशासन द्वारा निर्धारित रूट का पालन करना होगा। ऐसे में सावन में निजी वाहन से ओंकारेश्वर आने की योजना बना रहे लोगों के लिए मौके पर लगे ट्रैफिक संकेत और पुलिस के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। गलत दिशा से वाहन ले जाने पर वापस लौटना पड़ सकता है। खासकर सोमवार और ज्यादा भीड़ वाले दिनों में यातायात नियंत्रण अधिक सख्त रहने की संभावना है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच मांधाता पर्वत पर स्थित होने के कारण यहां दर्शन व्यवस्था सामान्य मंदिरों से अलग है। श्रद्धालुओं की आवाजाही पुलों और सीमित रास्तों से होती है। एक साथ अत्यधिक भीड़ होने पर पुलों और मंदिर के आसपास दबाव तेजी से बढ़ सकता है। प्रशासन इसी वजह से मंदिर तक पहुंचने से पहले ही श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है।
सावन में भगवान शिव के दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी आते हैं। सोमवार को सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतार लंबी हो जाती है। प्रशासन ऐसे दिनों के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था तैयार रखने पर काम कर रहा है।
नई दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार की दिशा में जाना होगा। दर्शन के बाद चांदी गेट और झूला पुल मार्ग से बाहर निकलना होगा। शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश अलग गेट से कराया जाएगा और उनकी वापसी लकड़ी गेट से होगी। इस तरह दोनों श्रेणियों की कतारों को अलग रखकर मंदिर परिसर में क्रॉस मूवमेंट कम करने की योजना बनाई गई है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को बदलाव लागू करने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने को कहा है। इसमें प्रवेश और निकासी मार्ग पर संकेतक लगाने, बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था और टिकट काउंटर स्थानांतरण जैसे काम शामिल हैं। श्रद्धालुओं को भी मौके पर तैनात पुलिस और मंदिर कर्मचारियों के बताए रास्ते का इस्तेमाल करना होगा।
सावन के शुरुआती दिनों में नई व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी। श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से प्रशासन जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में बदलाव भी कर सकता है। मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ने की स्थिति में कतार को अलग-अलग स्थानों पर नियंत्रित किया जा सकता है। पार्किंग भरने पर वाहनों को दूसरे निर्धारित स्थानों की तरफ भेजने की तैयारी भी यातायात योजना का हिस्सा रहेगी।
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि मंदिर पहुंचने के बाद पुराने परिचित रास्ते से सीधे प्रवेश संभव नहीं होगा। दर्शन की श्रेणी के हिसाब से तय प्रवेश द्वार का उपयोग करना पड़ेगा। वाहन से आने वाले लोगों को भी नगर के भीतर मनमाने रास्ते से जाने के बजाय वन-वे व्यवस्था का पालन करना होगा। प्रशासन नई व्यवस्था को अगले कुछ दिनों में जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है।
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ओंकारेश्वर
सावन के दौरान मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बदली हुई व्यवस्था के तहत दर्शन करने होंगे। बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर में प्रवेश और निकासी के रास्ते अलग किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ओंकारेश्वर नगर की यातायात व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं और शीघ्र दर्शन व प्रोटोकॉल श्रेणी में आने वालों के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए जाएंगे। प्रशासन का फोकस मंदिर के आसपास एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने से रोकने और श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनाए रखने पर है।
ओंकारेश्वर पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार शाम व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मंदिर परिसर से लेकर पार्किंग और प्रमुख रास्तों तक की व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सावन की भीड़ बढ़ने से पहले जरूरी बदलाव पूरे कर लिए जाएं। प्रस्तावित व्यवस्था अगले दो से तीन दिनों में लागू किए जाने की तैयारी है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में सावन में काफी बढ़ जाती है। सोमवार, छुट्टी और विशेष धार्मिक तिथियों पर दबाव और ज्यादा रहता है। इसी वजह से इस बार दर्शन मार्ग को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने और वापस जाने वाले श्रद्धालु एक ही रास्ते पर आमने-सामने न हों।
नई योजना के मुताबिक सामान्य दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सुखदेव मुनि द्वार की ओर से मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। श्रद्धालु यहां से निर्धारित सीढ़ियों और कतार वाले रास्ते से आगे बढ़ेंगे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें गर्भगृह से करीब 10 फीट की दूरी से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराने की व्यवस्था रहेगी। दर्शन पूरा होने के बाद उसी रास्ते से वापस लौटने की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं को चांदी गेट की ओर से बाहर निकाला जाएगा और आगे झूला पुल वाले मार्ग से उनकी निकासी कराई जाएगी। इससे मंदिर की ओर आने और वहां से लौटने वाली भीड़ अलग-अलग दिशा में चल सकेगी।
मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम जगह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संभालने की रहती है। कतार धीमी होने पर पीछे तेजी से भीड़ बढ़ती है और इसका असर पुलों तथा मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों तक दिखाई देता है। सावन में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रवेश और निकासी के रास्तों को पहले से नियंत्रित किया जाएगा। बैरिकेडिंग और कतार प्रबंधन की व्यवस्था भी इसी हिसाब से की जाएगी। भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजने की व्यवस्था रखी जा सकती है।
शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल के जरिए मंदिर पहुंचने वाले लोगों के लिए सामान्य श्रद्धालुओं से अलग रास्ता रहेगा। अभी जिस गेट का इस्तेमाल निकासी के लिए किया जा रहा है, उसे इस श्रेणी के श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग के रूप में उपयोग करने की तैयारी है। यहां से आने वाले श्रद्धालु दर्शन करने के बाद लकड़ी गेट की ओर से बाहर जाएंगे। अलग रास्ता होने से सामान्य कतार पर अतिरिक्त दबाव कम करने की कोशिश होगी।
शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल से जुड़े टिकट काउंटर की जगह में भी बदलाव किया जा रहा है। इन्हें ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि टिकट या दूसरी औपचारिकताओं के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर के आसपास रुकना नहीं पड़ेगा। प्रशासन चाहता है कि मंदिर के नजदीक पहुंचने के बाद लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहे और अनावश्यक भीड़ किसी एक जगह जमा न हो।
सावन की नई व्यवस्था केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी। ओंकारेश्वर नगर में ट्रैफिक को लेकर भी बड़े बदलाव किए जाएंगे। पूरे नगर में वन-वे यातायात व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। वाहनों के आने और जाने के रास्तों को अलग रखा जाएगा, ताकि संकरे मार्गों पर जाम की स्थिति न बने। बाहरी वाहनों को सीधे भीड़ वाले प्रमुख क्षेत्रों तक जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें प्रशासन द्वारा तय पार्किंग स्थलों पर खड़ा कराया जाएगा।
ओंकारेश्वर में सावन के दौरान ट्रैफिक बड़ी चुनौती बन जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु निजी कार, बस और दूसरे वाहनों से यहां पहुंचते हैं। एक साथ बड़ी संख्या में वाहन आने से मुख्य मार्ग के साथ नगर के अंदर की सड़कों पर भी दबाव बढ़ जाता है। इस बार वाहनों को पहले ही निर्धारित पार्किंग में रोकने और वहां से श्रद्धालुओं की आगे की आवाजाही को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है।
वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों को पुराने रास्ते के बजाय प्रशासन द्वारा निर्धारित रूट का पालन करना होगा। ऐसे में सावन में निजी वाहन से ओंकारेश्वर आने की योजना बना रहे लोगों के लिए मौके पर लगे ट्रैफिक संकेत और पुलिस के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। गलत दिशा से वाहन ले जाने पर वापस लौटना पड़ सकता है। खासकर सोमवार और ज्यादा भीड़ वाले दिनों में यातायात नियंत्रण अधिक सख्त रहने की संभावना है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच मांधाता पर्वत पर स्थित होने के कारण यहां दर्शन व्यवस्था सामान्य मंदिरों से अलग है। श्रद्धालुओं की आवाजाही पुलों और सीमित रास्तों से होती है। एक साथ अत्यधिक भीड़ होने पर पुलों और मंदिर के आसपास दबाव तेजी से बढ़ सकता है। प्रशासन इसी वजह से मंदिर तक पहुंचने से पहले ही श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है।
सावन में भगवान शिव के दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी आते हैं। सोमवार को सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतार लंबी हो जाती है। प्रशासन ऐसे दिनों के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था तैयार रखने पर काम कर रहा है।
नई दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार की दिशा में जाना होगा। दर्शन के बाद चांदी गेट और झूला पुल मार्ग से बाहर निकलना होगा। शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश अलग गेट से कराया जाएगा और उनकी वापसी लकड़ी गेट से होगी। इस तरह दोनों श्रेणियों की कतारों को अलग रखकर मंदिर परिसर में क्रॉस मूवमेंट कम करने की योजना बनाई गई है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को बदलाव लागू करने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने को कहा है। इसमें प्रवेश और निकासी मार्ग पर संकेतक लगाने, बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था और टिकट काउंटर स्थानांतरण जैसे काम शामिल हैं। श्रद्धालुओं को भी मौके पर तैनात पुलिस और मंदिर कर्मचारियों के बताए रास्ते का इस्तेमाल करना होगा।
सावन के शुरुआती दिनों में नई व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी। श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से प्रशासन जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में बदलाव भी कर सकता है। मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ने की स्थिति में कतार को अलग-अलग स्थानों पर नियंत्रित किया जा सकता है। पार्किंग भरने पर वाहनों को दूसरे निर्धारित स्थानों की तरफ भेजने की तैयारी भी यातायात योजना का हिस्सा रहेगी।
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि मंदिर पहुंचने के बाद पुराने परिचित रास्ते से सीधे प्रवेश संभव नहीं होगा। दर्शन की श्रेणी के हिसाब से तय प्रवेश द्वार का उपयोग करना पड़ेगा। वाहन से आने वाले लोगों को भी नगर के भीतर मनमाने रास्ते से जाने के बजाय वन-वे व्यवस्था का पालन करना होगा। प्रशासन नई व्यवस्था को अगले कुछ दिनों में जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है।
