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पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन की तैयारी तेज, अगले शनिवार से चलेगी
इंदौर (म.प्र.)
मेंटेनेंस के बाद रैक इंदौर पहुंचा, ट्रायल रन के बाद यात्री सेवा शुरू करने की तैयारी; मानसून में झरने और घाटियों का दिखेगा खूबसूरत नजारा
इंदौर में बारिश का मौसम अपने पूरे रंग में है और इसी बीच पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार कर रहे पर्यटकों के लिए रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 अगस्त का लंबा वीकेंड भी निकल गया, लेकिन ट्रेन अभी तक यात्रियों के लिए शुरू नहीं हो सकी। अब रेलवे की तैयारी अगले शनिवार से सेवा शुरू करने की है। रविवार सुबह हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच गया। रैक को लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पर लाया गया है और अब इसे महू के रास्ते पातालपानी ले जाने की तैयारी है। मानसून के कारण पातालपानी का झरना इन दिनों तेज बहाव में है, जबकि आसपास की पहाड़ियां घने हरे रंग में ढकी हुई हैं। ऐसे में ट्रेन शुरू होने को लेकर पर्यटकों में खास उत्सुकता बनी हुई है।
रेलवे की योजना के मुताबिक पातालपानी पहुंचने के बाद कोचों को क्रेन की मदद से ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद सभी कोचों को इंजन से जोड़ा जाएगा और पूरी ट्रेन का अलाइनमेंट किया जाएगा। यह काम पूरा होने के बाद रेलवे ट्रायल रन करेगा। अधिकारियों की नजर सिर्फ ट्रेन की आवाजाही पर नहीं होगी, बल्कि ट्रैक की स्थिति, कोचों की फिटनेस, संचालन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को भी जांचा जाएगा। ट्रायल के दौरान अगर सभी जरूरी मानक सही पाए जाते हैं, तभी यात्री सेवा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले शनिवार से ट्रेन चलाने की है, हालांकि अंतिम तारीख ट्रायल और जरूरी मंजूरियों के बाद ही तय मानी जाएगी।
इस बार हेरिटेज ट्रेन के संचालन में देरी की सबसे बड़ी वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान इस रूट पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। पातालपानी का झरना, कालाकुंड की हरियाली और पहाड़ी रास्ते इस छोटी रेल यात्रा को बाकी दिनों से अलग बना देते हैं। पिछले साल ट्रेन 26 जुलाई से ही चलना शुरू हो गई थी और 16 नवंबर 2025 तक इसका संचालन हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीतने के बाद रैक इंदौर पहुंचा है। अब रेलवे के सामने ट्रायल पूरा करने और यात्री सेवा जल्द शुरू करने की तैयारी है।
पातालपानी-कालाकुंड रूट की सबसे खास बात यह है कि सफर लंबा नहीं होने के बावजूद रास्ता काफी रोमांचक है। करीब 9.5 किलोमीटर के इस मीटरगेज रेलखंड में यात्रियों को कई घुमावदार मोड़ और पहाड़ी हिस्से देखने को मिलते हैं। पूरे रास्ते में चार सुरंगें आती हैं। इसके अलावा छह बड़े और 35 छोटे पुल इस ट्रैक का हिस्सा हैं। करीब 24 तीखे मोड़ सफर को और दिलचस्प बना देते हैं। ट्रेन धीरे-धीरे पहाड़ी इलाके से गुजरती है और कई जगह नीचे गहरी घाटियां दिखाई देती हैं। बारिश के दिनों में यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। पहाड़ों से गिरता पानी, धुंध और बादलों के बीच से गुजरती ट्रेन पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण रहती है।
इस रेलखंड का इतिहास भी काफी पुराना है। करीब 155 साल पहले इस इलाके में रेल संपर्क विकसित करने की पहल इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय के समय हुई थी। वर्ष 1870 में रेल लाइन को लेकर काम शुरू हुआ और 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत निर्माण पूरा होने की जानकारी मिलती है। बाद में यह लाइन राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बनी। समय के साथ देश के कई मीटरगेज मार्गों को ब्रॉडगेज में बदला गया, लेकिन पातालपानी-कालाकुंड का यह हिस्सा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अलग पहचान बनाए रहा। पहाड़ी क्षेत्र, सुरंगों और पुलों के कारण इसे आधुनिक रेल नेटवर्क के साथ बदलने के बजाय संरक्षित किया गया।
रेलवे ने इस ऐतिहासिक रेलखंड को पर्यटन से जोड़ते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन की शुरुआत की थी। इसके बाद मानसून के दौरान यह ट्रेन इंदौर और आसपास के लोगों के बीच लोकप्रिय होती गई। खासकर परिवारों, युवाओं और बारिश में घूमने वाले पर्यटकों के लिए यह सफर एक अलग अनुभव देता है। ट्रेन से सफर करते हुए पातालपानी और कालाकुंड के बीच पहाड़ी प्राकृतिक नजारे करीब से देखने को मिलते हैं। रूट छोटा है, इसलिए एक दिन की यात्रा के लिए भी इसे पसंद किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में मानसून के दौरान इसकी मांग बढ़ती रही है।
अब रैक इंदौर पहुंचने के बाद रेलवे की गतिविधियां पातालपानी की ओर बढ़ गई हैं। वहां कोच उतारने, इंजन से जोड़ने और तकनीकी जांच के बाद ट्रायल रन कराया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैक की स्थिति को लेकर भी निरीक्षण होगा। इसके बाद ही यात्रियों के लिए बुकिंग और संचालन से जुड़ी जानकारी सामने आएगी। फिलहाल पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल और अगले शनिवार से प्रस्तावित सेवा पर बनी हुई है।
पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन की तैयारी तेज, अगले शनिवार से चलेगी
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर में बारिश का मौसम अपने पूरे रंग में है और इसी बीच पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार कर रहे पर्यटकों के लिए रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 अगस्त का लंबा वीकेंड भी निकल गया, लेकिन ट्रेन अभी तक यात्रियों के लिए शुरू नहीं हो सकी। अब रेलवे की तैयारी अगले शनिवार से सेवा शुरू करने की है। रविवार सुबह हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच गया। रैक को लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पर लाया गया है और अब इसे महू के रास्ते पातालपानी ले जाने की तैयारी है। मानसून के कारण पातालपानी का झरना इन दिनों तेज बहाव में है, जबकि आसपास की पहाड़ियां घने हरे रंग में ढकी हुई हैं। ऐसे में ट्रेन शुरू होने को लेकर पर्यटकों में खास उत्सुकता बनी हुई है।
रेलवे की योजना के मुताबिक पातालपानी पहुंचने के बाद कोचों को क्रेन की मदद से ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद सभी कोचों को इंजन से जोड़ा जाएगा और पूरी ट्रेन का अलाइनमेंट किया जाएगा। यह काम पूरा होने के बाद रेलवे ट्रायल रन करेगा। अधिकारियों की नजर सिर्फ ट्रेन की आवाजाही पर नहीं होगी, बल्कि ट्रैक की स्थिति, कोचों की फिटनेस, संचालन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को भी जांचा जाएगा। ट्रायल के दौरान अगर सभी जरूरी मानक सही पाए जाते हैं, तभी यात्री सेवा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले शनिवार से ट्रेन चलाने की है, हालांकि अंतिम तारीख ट्रायल और जरूरी मंजूरियों के बाद ही तय मानी जाएगी।
इस बार हेरिटेज ट्रेन के संचालन में देरी की सबसे बड़ी वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान इस रूट पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। पातालपानी का झरना, कालाकुंड की हरियाली और पहाड़ी रास्ते इस छोटी रेल यात्रा को बाकी दिनों से अलग बना देते हैं। पिछले साल ट्रेन 26 जुलाई से ही चलना शुरू हो गई थी और 16 नवंबर 2025 तक इसका संचालन हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीतने के बाद रैक इंदौर पहुंचा है। अब रेलवे के सामने ट्रायल पूरा करने और यात्री सेवा जल्द शुरू करने की तैयारी है।
पातालपानी-कालाकुंड रूट की सबसे खास बात यह है कि सफर लंबा नहीं होने के बावजूद रास्ता काफी रोमांचक है। करीब 9.5 किलोमीटर के इस मीटरगेज रेलखंड में यात्रियों को कई घुमावदार मोड़ और पहाड़ी हिस्से देखने को मिलते हैं। पूरे रास्ते में चार सुरंगें आती हैं। इसके अलावा छह बड़े और 35 छोटे पुल इस ट्रैक का हिस्सा हैं। करीब 24 तीखे मोड़ सफर को और दिलचस्प बना देते हैं। ट्रेन धीरे-धीरे पहाड़ी इलाके से गुजरती है और कई जगह नीचे गहरी घाटियां दिखाई देती हैं। बारिश के दिनों में यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। पहाड़ों से गिरता पानी, धुंध और बादलों के बीच से गुजरती ट्रेन पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण रहती है।
इस रेलखंड का इतिहास भी काफी पुराना है। करीब 155 साल पहले इस इलाके में रेल संपर्क विकसित करने की पहल इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय के समय हुई थी। वर्ष 1870 में रेल लाइन को लेकर काम शुरू हुआ और 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत निर्माण पूरा होने की जानकारी मिलती है। बाद में यह लाइन राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बनी। समय के साथ देश के कई मीटरगेज मार्गों को ब्रॉडगेज में बदला गया, लेकिन पातालपानी-कालाकुंड का यह हिस्सा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अलग पहचान बनाए रहा। पहाड़ी क्षेत्र, सुरंगों और पुलों के कारण इसे आधुनिक रेल नेटवर्क के साथ बदलने के बजाय संरक्षित किया गया।
रेलवे ने इस ऐतिहासिक रेलखंड को पर्यटन से जोड़ते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन की शुरुआत की थी। इसके बाद मानसून के दौरान यह ट्रेन इंदौर और आसपास के लोगों के बीच लोकप्रिय होती गई। खासकर परिवारों, युवाओं और बारिश में घूमने वाले पर्यटकों के लिए यह सफर एक अलग अनुभव देता है। ट्रेन से सफर करते हुए पातालपानी और कालाकुंड के बीच पहाड़ी प्राकृतिक नजारे करीब से देखने को मिलते हैं। रूट छोटा है, इसलिए एक दिन की यात्रा के लिए भी इसे पसंद किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में मानसून के दौरान इसकी मांग बढ़ती रही है।
अब रैक इंदौर पहुंचने के बाद रेलवे की गतिविधियां पातालपानी की ओर बढ़ गई हैं। वहां कोच उतारने, इंजन से जोड़ने और तकनीकी जांच के बाद ट्रायल रन कराया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैक की स्थिति को लेकर भी निरीक्षण होगा। इसके बाद ही यात्रियों के लिए बुकिंग और संचालन से जुड़ी जानकारी सामने आएगी। फिलहाल पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल और अगले शनिवार से प्रस्तावित सेवा पर बनी हुई है।
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