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अवैध ठहराव पर सख्त रुख: एमपी हाईकोर्ट ने अफगानी नागरिक की याचिका खारिज की
जबलपुर (म.प्र.)
जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा—बिना वैध वीजा भारत में रहने का अधिकार नहीं; लीव इंडिया नोटिस और एफआईआर को ठहराया कानूनी
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध रूप से भारत में ठहरने के मामले में एक अफगानी नागरिक की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना वैध वीजा के भारत में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा जारी लीव इंडिया नोटिस और दर्ज एफआईआर को पूरी तरह वैध ठहराया है।
यह मामला जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ता सैयद राशिद ने भोपाल प्रशासन द्वारा जारी लीव इंडिया नोटिस और उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। अदालत ने सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद याचिका में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सैयद राशिद वर्ष 2019 में छात्र वीजा पर भारत आया था। वह भोपाल स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में एमए की पढ़ाई कर रहा था। कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार की नीति के तहत उसे वीजा विस्तार भी दिया गया और उसने वर्ष 2022 में अपना शैक्षणिक कोर्स पूरा कर लिया। हालांकि, पढ़ाई पूरी होने के बाद भी वह भारत में रुका रहा और इसी दौरान उसने उसी विश्वविद्यालय में नौकरी करना शुरू कर दिया, जबकि उसके पास रोजगार वीजा नहीं था।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मानवीय आधार पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता का वीजा 24 मार्च 2024 तक बढ़ाया गया था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी वह भारत में बना रहा। इस बीच अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद सैयद राशिद को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) से शरणार्थी का दर्जा मिला।
प्रशासन का कहना है कि यूएनएचसीआर से प्राप्त शरणार्थी कार्ड भारतीय वीजा कानूनों का विकल्प नहीं हो सकता। इसी आधार पर भोपाल के डिप्टी कमिश्नर ने 8 जनवरी 2025 को सैयद राशिद को लीव इंडिया नोटिस जारी किया और उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने दलील दी कि वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रहना विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त समय और अवसर दिए गए, इसके बावजूद उसने देश छोड़ने के निर्देशों का पालन नहीं किया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शरणार्थी का दर्जा मिलने से किसी विदेशी नागरिक को भारतीय कानूनों से छूट नहीं मिल जाती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वीजा व्यवस्था देश की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत के इस फैसले को विदेशी नागरिकों के अवैध ठहराव से जुड़े मामलों में एक अहम मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में रहना पूरी तरह वैध दस्तावेजों और तय शर्तों के अधीन है, और नियमों के उल्लंघन पर प्रशासनिक कार्रवाई को अदालतों का समर्थन प्राप्त है।
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