इंडिगो पर 22.2 करोड़ का जुर्माना नाकाफी: 61% यात्रियों ने कहा—झेली गई परेशानी के सामने बहुत कम

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लोकलसर्कल्स सर्वे में खुलासा, दिसंबर में 3 लाख से अधिक यात्री फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी से प्रभावित

देश के 61 प्रतिशत हवाई यात्रियों का मानना है कि इंडिगो एयरलाइंस पर लगाया गया ₹22.20 करोड़ का जुर्माना यात्रियों को हुई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के मुकाबले बेहद कम है। यह बात पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के तौर पर सामने आई लोकलसर्कल्स के एक ताजा सर्वे में सामने आई है, जिसमें यात्रियों ने एयरलाइन और नियामक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठाए हैं।

यह विवाद दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो की बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और लेटलतीफी से जुड़ा है। 3 से 5 दिसंबर, 2025 के बीच नए संचालन नियमों के चलते इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द कर दी गई थीं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स तय समय से देरी से संचालित हुईं। इस दौरान देशभर में 3 लाख से अधिक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरलाइन पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया।

कार्रवाई के बाद कराए गए लोकलसर्कल्स सर्वे में देश के 292 जिलों से 31,000 से ज्यादा हवाई यात्रियों ने भाग लिया। सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत यात्रियों ने साफ कहा कि यह जुर्माना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न तो पर्याप्त है और न ही एयरलाइंस पर जवाबदेही तय करता है। वहीं 21 प्रतिशत प्रतिभागियों ने DGCA की कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया, जबकि 18 प्रतिशत यात्रियों ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

यात्रियों ने केवल फ्लाइट रद्द होने तक की परेशानी ही नहीं गिनाई, बल्कि एयरलाइन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। सर्वे में शामिल कई यात्रियों का आरोप है कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद इंडिगो ने उन्हें नियमों के तहत मिलने वाला कैश रिफंड देने के बजाय ट्रैवल वाउचर थमा दिए, जिससे उनकी समस्या और बढ़ गई। यात्रियों का कहना है कि वाउचर न तो तत्काल जरूरतों को पूरा करते हैं और न ही सभी के लिए उपयोगी होते हैं।

DGCA द्वारा लगाया गया यह जुर्माना एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 133A के तहत तय किया गया है। इसके अंतर्गत मूल जुर्माना ₹1.80 करोड़ है, जबकि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का 68 दिनों तक पालन न करने पर प्रतिदिन ₹30 लाख के हिसाब से ₹20.40 करोड़ की अतिरिक्त पेनाल्टी लगाई गई। इस तरह कुल जुर्माने की राशि ₹22.20 करोड़ तक पहुंची।

इंडिगो एयरलाइंस ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह DGCA के सभी निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी के मुताबिक हालिया घटनाक्रम के बाद आंतरिक स्तर पर संचालन, सिस्टम और प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।

हालांकि, एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक यात्रियों के अधिकारों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और नियामक निगरानी मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
20 Jan 2026 By Nitin Trivedi

इंडिगो पर 22.2 करोड़ का जुर्माना नाकाफी: 61% यात्रियों ने कहा—झेली गई परेशानी के सामने बहुत कम

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देश के 61 प्रतिशत हवाई यात्रियों का मानना है कि इंडिगो एयरलाइंस पर लगाया गया ₹22.20 करोड़ का जुर्माना यात्रियों को हुई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के मुकाबले बेहद कम है। यह बात पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के तौर पर सामने आई लोकलसर्कल्स के एक ताजा सर्वे में सामने आई है, जिसमें यात्रियों ने एयरलाइन और नियामक व्यवस्था दोनों पर सवाल उठाए हैं।

यह विवाद दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो की बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और लेटलतीफी से जुड़ा है। 3 से 5 दिसंबर, 2025 के बीच नए संचालन नियमों के चलते इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द कर दी गई थीं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स तय समय से देरी से संचालित हुईं। इस दौरान देशभर में 3 लाख से अधिक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरलाइन पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया।

कार्रवाई के बाद कराए गए लोकलसर्कल्स सर्वे में देश के 292 जिलों से 31,000 से ज्यादा हवाई यात्रियों ने भाग लिया। सर्वे में शामिल 61 प्रतिशत यात्रियों ने साफ कहा कि यह जुर्माना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न तो पर्याप्त है और न ही एयरलाइंस पर जवाबदेही तय करता है। वहीं 21 प्रतिशत प्रतिभागियों ने DGCA की कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया, जबकि 18 प्रतिशत यात्रियों ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

यात्रियों ने केवल फ्लाइट रद्द होने तक की परेशानी ही नहीं गिनाई, बल्कि एयरलाइन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। सर्वे में शामिल कई यात्रियों का आरोप है कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद इंडिगो ने उन्हें नियमों के तहत मिलने वाला कैश रिफंड देने के बजाय ट्रैवल वाउचर थमा दिए, जिससे उनकी समस्या और बढ़ गई। यात्रियों का कहना है कि वाउचर न तो तत्काल जरूरतों को पूरा करते हैं और न ही सभी के लिए उपयोगी होते हैं।

DGCA द्वारा लगाया गया यह जुर्माना एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 133A के तहत तय किया गया है। इसके अंतर्गत मूल जुर्माना ₹1.80 करोड़ है, जबकि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों का 68 दिनों तक पालन न करने पर प्रतिदिन ₹30 लाख के हिसाब से ₹20.40 करोड़ की अतिरिक्त पेनाल्टी लगाई गई। इस तरह कुल जुर्माने की राशि ₹22.20 करोड़ तक पहुंची।

इंडिगो एयरलाइंस ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह DGCA के सभी निर्देशों का पालन करेगी। कंपनी के मुताबिक हालिया घटनाक्रम के बाद आंतरिक स्तर पर संचालन, सिस्टम और प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।

हालांकि, एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक यात्रियों के अधिकारों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और नियामक निगरानी मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।

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