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इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ विवाद गरमाया, नेताओं के बयानों से बढ़ा सियासी ताप
इंदौर (म.प्र.)
मालिनी गौड़ ने वोट न मांगने की बात कही, आकाश विजयवर्गीय के बयान पर बढ़ी बहस; कोर्ट में भी पहुंचा मामला
मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ यह मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी के चलते और गहरा गया है। बीजेपी नेताओं के हालिया बयानों के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने स्पष्ट कहा है कि वे उन लोगों से वोट मांगने नहीं जातीं, जो ‘वंदे मातरम्’ या ‘भारत माता की जय’ बोलने से परहेज करते हैं। उन्होंने इसे देशभक्ति से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
वहीं विधायक आकाश विजयवर्गीय ने विवाद को और तीखा करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ नहीं बोलने वाले लोग देशहित के खिलाफ हैं और ऐसे लोगों को देशद्रोही बताया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “इस देश में रहना है तो वंदे मातरम् कहना होगा।” उनके बयान ने विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब नगर निगम की बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किया था। इस मुद्दे पर धार्मिक और संवैधानिक बहस छिड़ गई थी, जो अब राजनीतिक रंग ले चुकी है।
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने इस मामले को लेकर जिला अदालत में परिवाद दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ पार्षदों द्वारा दिए गए बयानों से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है।
विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब पार्षद रुबीना खान के पुराने वीडियो सामने आए, जिनमें वे ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए नजर आ रही हैं। इससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
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इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ विवाद गरमाया, नेताओं के बयानों से बढ़ा सियासी ताप
इंदौर (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ यह मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी के चलते और गहरा गया है। बीजेपी नेताओं के हालिया बयानों के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने स्पष्ट कहा है कि वे उन लोगों से वोट मांगने नहीं जातीं, जो ‘वंदे मातरम्’ या ‘भारत माता की जय’ बोलने से परहेज करते हैं। उन्होंने इसे देशभक्ति से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
वहीं विधायक आकाश विजयवर्गीय ने विवाद को और तीखा करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ नहीं बोलने वाले लोग देशहित के खिलाफ हैं और ऐसे लोगों को देशद्रोही बताया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “इस देश में रहना है तो वंदे मातरम् कहना होगा।” उनके बयान ने विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब नगर निगम की बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार किया था। इस मुद्दे पर धार्मिक और संवैधानिक बहस छिड़ गई थी, जो अब राजनीतिक रंग ले चुकी है।
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने इस मामले को लेकर जिला अदालत में परिवाद दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ पार्षदों द्वारा दिए गए बयानों से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है।
विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब पार्षद रुबीना खान के पुराने वीडियो सामने आए, जिनमें वे ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए नजर आ रही हैं। इससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
