महामृत्युंजय मंदिर में उमड़ी आस्था की भीड़, पुरुषोत्तम मास में शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक

रीवा,(म.प्र.)

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पुरुषोत्तम मास के अवसर पर रीवा के ऐतिहासिक किला स्थित शिव मंदिर में सुबह से दर्शनार्थियों का तांता, विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन

रीवा के ऐतिहासिक महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बुधवार तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया था और सूर्योदय होते-होते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक पहुंच गईं। हर-हर महादेव और महामृत्युंजय मंत्र के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना की प्रार्थना कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि रीवा शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महामृत्युंजय मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। मंदिर में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अलग-अलग समूहों में बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ मंदिर पहुंचे और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में शामिल हुए। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है ताकि व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

मुख्य पुजारी वनस्पति प्रसाद ने बताया कि पुरुषोत्तम मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे माह विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु अमित शुक्ला ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से पुरुषोत्तम मास के दौरान महामृत्युंजय मंदिर में जलाभिषेक करने आते हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में मंदिर का वातावरण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिव्य और ऊर्जावान महसूस होता है।

श्रद्धालु संगीता तिवारी ने बताया कि वे विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र के जाप में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंची हैं। उनके अनुसार मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था ही उन्हें हर वर्ष यहां खींच लाती है और इस बार भी वे पूरे परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंची हैं। मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय भजन मंडलियां शिव भक्ति से जुड़े भजन प्रस्तुत कर रही हैं, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और अन्य वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दे रहे हैं। कई श्रद्धालु घंटों तक मंदिर परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन का आनंद लेते रहे।

बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और छाया की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक लगातार कतारों को व्यवस्थित रखने में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सेवा कार्यों में भाग लिया है। कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे गर्म मौसम में लोगों को राहत मिल रही है।

पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस पूरे महीने मंदिरों में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। रीवा का महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर यहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है। 

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03 Jun 2026 By Vaishnavi.J

महामृत्युंजय मंदिर में उमड़ी आस्था की भीड़, पुरुषोत्तम मास में शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक

रीवा,(म.प्र.)

रीवा के ऐतिहासिक महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बुधवार तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया था और सूर्योदय होते-होते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक पहुंच गईं। हर-हर महादेव और महामृत्युंजय मंत्र के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना की प्रार्थना कर रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि रीवा शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महामृत्युंजय मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। मंदिर में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अलग-अलग समूहों में बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ मंदिर पहुंचे और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में शामिल हुए। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है ताकि व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

मुख्य पुजारी वनस्पति प्रसाद ने बताया कि पुरुषोत्तम मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे माह विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु अमित शुक्ला ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से पुरुषोत्तम मास के दौरान महामृत्युंजय मंदिर में जलाभिषेक करने आते हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में मंदिर का वातावरण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिव्य और ऊर्जावान महसूस होता है।

श्रद्धालु संगीता तिवारी ने बताया कि वे विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र के जाप में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंची हैं। उनके अनुसार मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था ही उन्हें हर वर्ष यहां खींच लाती है और इस बार भी वे पूरे परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंची हैं। मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय भजन मंडलियां शिव भक्ति से जुड़े भजन प्रस्तुत कर रही हैं, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और अन्य वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दे रहे हैं। कई श्रद्धालु घंटों तक मंदिर परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन का आनंद लेते रहे।

बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और छाया की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक लगातार कतारों को व्यवस्थित रखने में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सेवा कार्यों में भाग लिया है। कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे गर्म मौसम में लोगों को राहत मिल रही है।

पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस पूरे महीने मंदिरों में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। रीवा का महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर यहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है। 

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