रीवा गैंगवार में बड़ा खुलासा, जिसे पीड़ित बताया वही निकला फायरिंग का मुख्य आरोपी

रीवा,(म.प्र.)

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वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की शुरुआती जांच पर उठे सवाल, दो पिस्टल लेकर सड़क पर फायरिंग करता दिखा युवक

रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र में सोमवार रात हुई गैंगवार और फायरिंग की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिस युवक को पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर पीड़ित मानते हुए फरियादी बनाया था, वही अब इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आ रहा है। बुधवार सुबह एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में अक्षत सोनी नाम का युवक कार चलाते हुए हाथों में दो-दो पिस्टल लिए दिखाई दे रहा है। कुछ सेकंड बाद वह कार की सनरूफ खोलकर बीच सड़क पर फायरिंग करता भी नजर आता है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले की दिशा बदल गई है और पुलिस को अपनी प्रारंभिक जांच पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात बिछिया थाना इलाके में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद गैंगवार जैसी स्थिति बन गई थी। इस दौरान करीब पांच राउंड फायरिंग होने की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने गोली चलने की आवाजें सुनीं और पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में अक्षत सोनी को पीड़ित मानते हुए उसकी शिकायत के आधार पर अभय, विकास, प्रिंस और नमन समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। उस समय पुलिस की ओर से यह माना गया कि अक्षत पर हमला किया गया था और वह इस मामले का फरियादी है।

हालांकि दो दिन बाद सामने आए वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को उलटकर रख दिया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक युवक कार के अंदर बैठा हुआ है और उसके हाथों में दो हथियार हैं। इसके बाद वह सनरूफ से बाहर निकलता है और सड़क पर फायरिंग करता दिखाई देता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा और लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों का कहना है कि यदि यह वीडियो उसी घटना से जुड़ा है तो फिर शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को पीड़ित बताकर कानूनी संरक्षण दिया गया, वह खुलेआम हथियारों के साथ कैसे नजर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और समय की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह वीडियो कुछ दिन पुराना भी हो सकता है, लेकिन इसमें दिखाई दे रही गतिविधियां गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं। सड़क पर हथियार लहराना और फायरिंग करना कानूनन अपराध है। ऐसे में वीडियो चाहे जिस दिन का हो, उसमें दिख रहे तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस अब वीडियो की तकनीकी जांच कराने की तैयारी कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह फुटेज कब और कहां रिकॉर्ड किया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पुलिस अधीक्षक राजीव पाठक का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में उपलब्ध तथ्यों और शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। उस समय अक्षत सोनी को फरियादी बनाया गया था, लेकिन अब वीडियो सामने आने के बाद उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है तो अक्षत सोनी को भी आरोपी बनाया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की भूमिका सामने आ रही है और किसी भी व्यक्ति को केवल शिकायतकर्ता होने के आधार पर राहत नहीं दी जाएगी। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस को किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच करनी चाहिए। खासकर जब मामला गैंगवार और फायरिंग जैसा गंभीर हो। लोगों का सवाल है कि यदि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई थी, तो फिर आरोपी की कथित भूमिका पहले क्यों सामने नहीं आई। इस मामले ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया के दौर में किसी भी घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें अचानक सामने आ सकती हैं, जिससे जांच की दिशा बदल जाती है। रीवा के इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। जो व्यक्ति पहले पीड़ित माना जा रहा था, अब उसी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। इससे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।  पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। हथियारों की वैधता, फायरिंग की परिस्थितियों और वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

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24 Jun 2026 By Vaishnavi.J

रीवा गैंगवार में बड़ा खुलासा, जिसे पीड़ित बताया वही निकला फायरिंग का मुख्य आरोपी

रीवा,(म.प्र.)

रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र में सोमवार रात हुई गैंगवार और फायरिंग की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिस युवक को पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर पीड़ित मानते हुए फरियादी बनाया था, वही अब इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आ रहा है। बुधवार सुबह एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में अक्षत सोनी नाम का युवक कार चलाते हुए हाथों में दो-दो पिस्टल लिए दिखाई दे रहा है। कुछ सेकंड बाद वह कार की सनरूफ खोलकर बीच सड़क पर फायरिंग करता भी नजर आता है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले की दिशा बदल गई है और पुलिस को अपनी प्रारंभिक जांच पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात बिछिया थाना इलाके में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद गैंगवार जैसी स्थिति बन गई थी। इस दौरान करीब पांच राउंड फायरिंग होने की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने गोली चलने की आवाजें सुनीं और पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में अक्षत सोनी को पीड़ित मानते हुए उसकी शिकायत के आधार पर अभय, विकास, प्रिंस और नमन समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। उस समय पुलिस की ओर से यह माना गया कि अक्षत पर हमला किया गया था और वह इस मामले का फरियादी है।

हालांकि दो दिन बाद सामने आए वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को उलटकर रख दिया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक युवक कार के अंदर बैठा हुआ है और उसके हाथों में दो हथियार हैं। इसके बाद वह सनरूफ से बाहर निकलता है और सड़क पर फायरिंग करता दिखाई देता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा और लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों का कहना है कि यदि यह वीडियो उसी घटना से जुड़ा है तो फिर शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को पीड़ित बताकर कानूनी संरक्षण दिया गया, वह खुलेआम हथियारों के साथ कैसे नजर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और समय की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह वीडियो कुछ दिन पुराना भी हो सकता है, लेकिन इसमें दिखाई दे रही गतिविधियां गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं। सड़क पर हथियार लहराना और फायरिंग करना कानूनन अपराध है। ऐसे में वीडियो चाहे जिस दिन का हो, उसमें दिख रहे तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस अब वीडियो की तकनीकी जांच कराने की तैयारी कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह फुटेज कब और कहां रिकॉर्ड किया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पुलिस अधीक्षक राजीव पाठक का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में उपलब्ध तथ्यों और शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। उस समय अक्षत सोनी को फरियादी बनाया गया था, लेकिन अब वीडियो सामने आने के बाद उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है तो अक्षत सोनी को भी आरोपी बनाया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की भूमिका सामने आ रही है और किसी भी व्यक्ति को केवल शिकायतकर्ता होने के आधार पर राहत नहीं दी जाएगी। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस को किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच करनी चाहिए। खासकर जब मामला गैंगवार और फायरिंग जैसा गंभीर हो। लोगों का सवाल है कि यदि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई थी, तो फिर आरोपी की कथित भूमिका पहले क्यों सामने नहीं आई। इस मामले ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया के दौर में किसी भी घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें अचानक सामने आ सकती हैं, जिससे जांच की दिशा बदल जाती है। रीवा के इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। जो व्यक्ति पहले पीड़ित माना जा रहा था, अब उसी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। इससे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।  पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। हथियारों की वैधता, फायरिंग की परिस्थितियों और वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

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