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आवास सर्वे सूची पर घमासान, 363 में सिर्फ 56 हितग्राही पात्र
रीवा (म.प्र.)
रीवा के मोहिनी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, सर्वे में गड़बड़ी का आरोप लगाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे
हुजूर तहसील की ग्राम पंचायत बम्हनी के मोहिनी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सर्वे सूची सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे के दौरान पात्रता तय करने में मनमानी की गई और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया। गांव में कुल 363 लोगों का सर्वे कराया गया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 56 लोगों को पात्र घोषित किया गया है। बाकी हितग्राहियों के अपात्र होने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण रीवा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि आवास योजना का लाभ उन परिवारों को मिलना चाहिए जो वास्तव में इसके हकदार हैं, लेकिन सर्वे की सूची ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने सर्वे करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रभावशाली या अपने लोगों को पात्र बताकर सूची में शामिल किया गया, जबकि जरूरतमंद परिवारों को अपात्र कर दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम रोजगार सहायक यानी जीआरएस ने आवास योजना की सूची में अपनी पत्नी नेहा त्रिपाठी का नाम भी शामिल कराया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि यदि सर्वे पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है तो दोबारा जांच में स्थिति साफ हो जाएगी। करीब आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा और सर्वे सूची की दोबारा जांच कराने की मांग रखी। अब ग्रामीणों की मांग है कि पात्रता के सभी दस्तावेजों और सर्वे प्रक्रिया की जांच की जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सके।
आवास सर्वे सूची पर घमासान, 363 में सिर्फ 56 हितग्राही पात्र
रीवा (म.प्र.)
हुजूर तहसील की ग्राम पंचायत बम्हनी के मोहिनी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सर्वे सूची सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे के दौरान पात्रता तय करने में मनमानी की गई और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया। गांव में कुल 363 लोगों का सर्वे कराया गया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 56 लोगों को पात्र घोषित किया गया है। बाकी हितग्राहियों के अपात्र होने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण रीवा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि आवास योजना का लाभ उन परिवारों को मिलना चाहिए जो वास्तव में इसके हकदार हैं, लेकिन सर्वे की सूची ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने सर्वे करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रभावशाली या अपने लोगों को पात्र बताकर सूची में शामिल किया गया, जबकि जरूरतमंद परिवारों को अपात्र कर दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम रोजगार सहायक यानी जीआरएस ने आवास योजना की सूची में अपनी पत्नी नेहा त्रिपाठी का नाम भी शामिल कराया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि यदि सर्वे पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है तो दोबारा जांच में स्थिति साफ हो जाएगी। करीब आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा और सर्वे सूची की दोबारा जांच कराने की मांग रखी। अब ग्रामीणों की मांग है कि पात्रता के सभी दस्तावेजों और सर्वे प्रक्रिया की जांच की जाए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सके।
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