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ककहरे से पहले कीचड़ की परीक्षा, दलदल से स्कूल पहुंचते बच्चे
रीवा (म.प्र.)
रीवा के झांझर गांव में करीब 200 परिवार सड़क के इंतजार में, गड्ढों और कीचड़ से होकर रोज स्कूल पहुंच रहे नौनिहाल; अभिभावकों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
जिले के रायपुर कर्चुलियान क्षेत्र के ग्राम झांझर में बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना पढ़ाई से पहले एक मुश्किल परीक्षा बन गया है। पोस्ट पडरिया के इस गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी आसान नहीं रहता। छोटे-छोटे बच्चे सिर पर स्कूल बैग और हाथ में जूते-चप्पल लेकर कीचड़ और पानी से भरे रास्ते को पार करते हैं। कई जगह गहरे गड्ढे हैं, जहां पैर फिसलने का डर बना रहता है। गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं और ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
बारिश शुरू होते ही झांझर का रास्ता दलदल में बदल जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को कई बार जूते हाथ में लेकर नंगे पैर कीचड़ से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, छोटे बच्चों के साथ सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कपड़े खराब होने, फिसलकर चोट लगने और स्कूल पहुंचने में देरी का डर रोज बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बच्चों की पढ़ाई ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। गांव में जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। मंगलवार को ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को रास्ते की स्थिति बताई। ग्रामीणों ने मांग की कि गांव तक जल्द सड़क बनाई जाए, ताकि बारिश में हर दिन की यह परेशानी खत्म हो सके। शिकायत लेकर पहुंचे बच्चों और अभिभावकों ने रास्ते की तस्वीरें और अपनी परेशानी प्रशासन के सामने रखी। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि उनकी शिकायत पर सड़क निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई होती है।
ककहरे से पहले कीचड़ की परीक्षा, दलदल से स्कूल पहुंचते बच्चे
रीवा (म.प्र.)
जिले के रायपुर कर्चुलियान क्षेत्र के ग्राम झांझर में बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना पढ़ाई से पहले एक मुश्किल परीक्षा बन गया है। पोस्ट पडरिया के इस गांव में पक्की सड़क नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी आसान नहीं रहता। छोटे-छोटे बच्चे सिर पर स्कूल बैग और हाथ में जूते-चप्पल लेकर कीचड़ और पानी से भरे रास्ते को पार करते हैं। कई जगह गहरे गड्ढे हैं, जहां पैर फिसलने का डर बना रहता है। गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं और ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
बारिश शुरू होते ही झांझर का रास्ता दलदल में बदल जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को कई बार जूते हाथ में लेकर नंगे पैर कीचड़ से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, छोटे बच्चों के साथ सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कपड़े खराब होने, फिसलकर चोट लगने और स्कूल पहुंचने में देरी का डर रोज बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बच्चों की पढ़ाई ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। गांव में जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। मंगलवार को ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को रास्ते की स्थिति बताई। ग्रामीणों ने मांग की कि गांव तक जल्द सड़क बनाई जाए, ताकि बारिश में हर दिन की यह परेशानी खत्म हो सके। शिकायत लेकर पहुंचे बच्चों और अभिभावकों ने रास्ते की तस्वीरें और अपनी परेशानी प्रशासन के सामने रखी। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि उनकी शिकायत पर सड़क निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई होती है।
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