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सीधी में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: नामांतरण के बदले 3 हजार की रिश्वत लेते तहसील का माल जमादार रंगे हाथ गिरफ्तार
रीवा,(म.प्र.)
रीवा लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई, कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पकड़ा गया आरोपी; शिकायत के सत्यापन के बाद हुई कार्रवाई
सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त रीवा की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गोपद बनास तहसील कार्यालय की नजारत एवं नकल शाखा में पदस्थ भृत्य (माल जमादार) दामोदर प्रसाद साकेत को पैतृक भूमि के नामांतरण के एवज में 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया। यह कार्रवाई बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित तहसील कार्यालय भवन के सामने की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
लोकायुक्त रीवा की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय सहित पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लेकर आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। शिकायतकर्ता नागेंद्र प्रसाद तिवारी, उम्र 66 वर्ष, ग्राम गाड़ा लोलर सिंह, तहसील गोपद बनास, जिला सीधी के निवासी हैं। उन्होंने अपनी पैतृक भूमि का वारिसान एवं वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने के लिए मध्यप्रदेश ऑनलाइन लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ माल जमादार दामोदर प्रसाद साकेत ने नामांतरण आदेश तहसीलदार से करवाने के बदले 3 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। आरोपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पैसे दिए नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से करने का फैसला किया। नागेंद्र प्रसाद तिवारी ने 1 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। निरीक्षक नरेश बेहरा और निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम ने पूरी रणनीति तैयार की।
बुधवार 8 जुलाई को शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार आरोपी से मिलने पहुंचे। जैसे ही आरोपी दामोदर प्रसाद साकेत ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपए की रिश्वत ली, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले उसका तकनीकी और गोपनीय सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर ही ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई, जिसके बाद आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोकायुक्त संगठन समय-समय पर आम नागरिकों से भी अपील करता रहा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। गौरतलब है कि नामांतरण, सीमांकन, नक्शा, प्रतिलिपि और राजस्व से जुड़े अन्य मामलों में रिश्वत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में लोकायुक्त द्वारा लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। सीधी में हुई इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में भी हलचल देखी गई। लोकायुक्त टीम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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सीधी में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: नामांतरण के बदले 3 हजार की रिश्वत लेते तहसील का माल जमादार रंगे हाथ गिरफ्तार
रीवा,(म.प्र.)
सीधी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त रीवा की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गोपद बनास तहसील कार्यालय की नजारत एवं नकल शाखा में पदस्थ भृत्य (माल जमादार) दामोदर प्रसाद साकेत को पैतृक भूमि के नामांतरण के एवज में 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया। यह कार्रवाई बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित तहसील कार्यालय भवन के सामने की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
लोकायुक्त रीवा की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय सहित पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। जैसे ही कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लेकर आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की। शिकायतकर्ता नागेंद्र प्रसाद तिवारी, उम्र 66 वर्ष, ग्राम गाड़ा लोलर सिंह, तहसील गोपद बनास, जिला सीधी के निवासी हैं। उन्होंने अपनी पैतृक भूमि का वारिसान एवं वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने के लिए मध्यप्रदेश ऑनलाइन लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया था। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ माल जमादार दामोदर प्रसाद साकेत ने नामांतरण आदेश तहसीलदार से करवाने के बदले 3 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। आरोपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पैसे दिए नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से करने का फैसला किया। नागेंद्र प्रसाद तिवारी ने 1 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। निरीक्षक नरेश बेहरा और निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में टीम ने पूरी रणनीति तैयार की।
बुधवार 8 जुलाई को शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार आरोपी से मिलने पहुंचे। जैसे ही आरोपी दामोदर प्रसाद साकेत ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपए की रिश्वत ली, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद की गई। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले उसका तकनीकी और गोपनीय सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर ही ट्रैप की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई, जिसके बाद आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोकायुक्त संगठन समय-समय पर आम नागरिकों से भी अपील करता रहा है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। गौरतलब है कि नामांतरण, सीमांकन, नक्शा, प्रतिलिपि और राजस्व से जुड़े अन्य मामलों में रिश्वत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में लोकायुक्त द्वारा लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। सीधी में हुई इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों में भी हलचल देखी गई। लोकायुक्त टीम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
