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जब भोपाल आया ‘कृष्ण’: एक मंच, एक अभिनेता और ठहर गया समय
भोपाल (म.प्र.)
इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल 2026 की शानदार शुरुआत, थिएटर, संगीत और संवाद का अनोखा संगम
झीलों के शहर में 26 मार्च की शाम कुछ अलग ही थी। मंच पर एक अभिनेता आया—न भगवान, न कोई चमत्कार—बस एक कलाकार। लेकिन जैसे ही उसने अभिनय शुरू किया, लगा मानो समय ठहर गया हो।
इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल 2026 की शुरुआत इसी खास अंदाज में हुई। रवींद्र भवन के हंसध्वनि ऑडिटोरियम में चार दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल का आगाज़ नाटक चक्रव्यूह से हुआ, जिसने दर्शकों को गहराई से बांध लिया।
यह सिर्फ एक नाटक नहीं था, बल्कि एक अनुभव था। महाभारत की कहानी से जुड़ा चक्रव्यूह अभिमन्यु की कहानी कहता है—एक ऐसा योद्धा जो चक्रव्यूह में घुसना तो जानता था, लेकिन बाहर निकलना नहीं। लेकिन इस कहानी के भीतर आज के समय की कई सच्चाइयां छिपी हैं—महत्वाकांक्षा, संघर्ष और उन हालातों की, जहां इंसान फंस जाता है।
फेस्टिवल की बात करें तो यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक सोच है। 26 से 29 मार्च तक चलने वाला यह आयोजन भोपाल की सांस्कृतिक पहचान को एक नया मंच देता है। हर दिन शाम को बड़े कलाकारों की प्रस्तुति होती है, लेकिन उससे पहले भी बहुत कुछ होता है।
दोपहर में सेंटर स्टेज के जरिए थिएटर के दिग्गज लोगों से सीधी बातचीत होती है। वहीं शाम को ओपन स्टेज में युवा कलाकार—कवि, गायक और स्टूडेंट्स—अपना हुनर दिखाते हैं। यानी यहां सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, नए टैलेंट को भी बराबर मौका मिलता है।
फेस्टिवल के बाकी दिन भी उतने ही खास हैं। अलग-अलग दिनों में थिएटर और कला जगत के जाने-माने कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जिनमें हास्य, व्यंग्य, राजनीति और प्रेम जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल हैं।
सबसे खास बात यह है कि यह फेस्टिवल सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए है—पुराने और नए कलाकारों को, मंच और दर्शकों को, और सबसे बढ़कर कला और समाज को।
भोपाल में थिएटर की परंपरा पहले से ही मजबूत रही है। यहां के दर्शक कला को समझते हैं और सराहते भी हैं। यही वजह है कि ऐसा आयोजन यहां सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक अनुभव बन जाता है।
आखिर में यही कहा जा सकता है कि यह फेस्टिवल एक शुरुआत है। अगर यह हर साल होता रहा, तो भोपाल देश के बड़े सांस्कृतिक शहरों में और मजबूत पहचान बना सकता है।यह सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि एक कहानी है—जो अब शुरू हो चुकी है।
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जब भोपाल आया ‘कृष्ण’: एक मंच, एक अभिनेता और ठहर गया समय
भोपाल (म.प्र.)
झीलों के शहर में 26 मार्च की शाम कुछ अलग ही थी। मंच पर एक अभिनेता आया—न भगवान, न कोई चमत्कार—बस एक कलाकार। लेकिन जैसे ही उसने अभिनय शुरू किया, लगा मानो समय ठहर गया हो।
इंडीमून्स आर्ट्स फेस्टिवल 2026 की शुरुआत इसी खास अंदाज में हुई। रवींद्र भवन के हंसध्वनि ऑडिटोरियम में चार दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल का आगाज़ नाटक चक्रव्यूह से हुआ, जिसने दर्शकों को गहराई से बांध लिया।
यह सिर्फ एक नाटक नहीं था, बल्कि एक अनुभव था। महाभारत की कहानी से जुड़ा चक्रव्यूह अभिमन्यु की कहानी कहता है—एक ऐसा योद्धा जो चक्रव्यूह में घुसना तो जानता था, लेकिन बाहर निकलना नहीं। लेकिन इस कहानी के भीतर आज के समय की कई सच्चाइयां छिपी हैं—महत्वाकांक्षा, संघर्ष और उन हालातों की, जहां इंसान फंस जाता है।
फेस्टिवल की बात करें तो यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक सोच है। 26 से 29 मार्च तक चलने वाला यह आयोजन भोपाल की सांस्कृतिक पहचान को एक नया मंच देता है। हर दिन शाम को बड़े कलाकारों की प्रस्तुति होती है, लेकिन उससे पहले भी बहुत कुछ होता है।
दोपहर में सेंटर स्टेज के जरिए थिएटर के दिग्गज लोगों से सीधी बातचीत होती है। वहीं शाम को ओपन स्टेज में युवा कलाकार—कवि, गायक और स्टूडेंट्स—अपना हुनर दिखाते हैं। यानी यहां सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, नए टैलेंट को भी बराबर मौका मिलता है।
फेस्टिवल के बाकी दिन भी उतने ही खास हैं। अलग-अलग दिनों में थिएटर और कला जगत के जाने-माने कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जिनमें हास्य, व्यंग्य, राजनीति और प्रेम जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल हैं।
सबसे खास बात यह है कि यह फेस्टिवल सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए है—पुराने और नए कलाकारों को, मंच और दर्शकों को, और सबसे बढ़कर कला और समाज को।
भोपाल में थिएटर की परंपरा पहले से ही मजबूत रही है। यहां के दर्शक कला को समझते हैं और सराहते भी हैं। यही वजह है कि ऐसा आयोजन यहां सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक अनुभव बन जाता है।
आखिर में यही कहा जा सकता है कि यह फेस्टिवल एक शुरुआत है। अगर यह हर साल होता रहा, तो भोपाल देश के बड़े सांस्कृतिक शहरों में और मजबूत पहचान बना सकता है।यह सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि एक कहानी है—जो अब शुरू हो चुकी है।
