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₹200 का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक गिरफ्तार, साथी से ₹40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र में रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता से खुला नकली नोटों का नेटवर्क, पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा; मुख्य आरोपी पर पहले से एसटीएफ के दो मामले दर्ज
इंदौर में नकली नोटों के कारोबार का एक और मामला सामने आया है, जहां महज ₹200 का नकली नोट चलाने की कोशिश ने पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। गांधी नगर थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में भुगतान के दौरान रेस्टोरेंट संचालक को नोट संदिग्ध लगा। उसकी सतर्कता के चलते आरोपी मौके पर ही पकड़ लिया गया। पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से करीब ₹40 हजार के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने नकली नोट बाजार में खपाए और उनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार, 25 जून को राजनगर निवासी यशवंत यादव अपने सांवरिया रेस्टोरेंट पर मौजूद थे। इसी दौरान दीपक नाम का युवक खाना खाने के बाद भुगतान करने पहुंचा और उसने ₹200 का नोट दिया। नोट हाथ में लेते ही संचालक को उसकी गुणवत्ता और प्रिंटिंग पर संदेह हुआ। उन्होंने कर्मचारियों की मदद से युवक को वहीं रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान दीपक ने संजय नाम के युवक का नाम बताया, जिससे उसने नकली नोट खरीदे थे। पुलिस ने जानकारी के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए संजय और उसके साथी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से ₹40 हजार के नकली नोट, प्रिंटिंग मशीन और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया गया। पुलिस ने सभी सामग्री जब्त कर ली है और उसकी तकनीकी जांच कराई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि दीपक और संजय की पहचान पहले एक शराब दुकान पर हुई थी, जहां दोनों सेल्समैन के रूप में काम करते थे। इसी दौरान संजय ने दीपक को बताया था कि उसका एक परिचित ऐसे नकली नोट तैयार करता है, जिन्हें सामान्य तौर पर पहचानना मुश्किल होता है। कुछ समय बाद दोनों अलग-अलग काम करने लगे। दीपक ट्रक ड्राइवर बन गया, जबकि संजय इंदौर आकर रहने लगा। बाद में दोनों के बीच दोबारा संपर्क हुआ और यहीं से नकली नोटों का सौदा शुरू हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के बीच यह तय हुआ था कि ₹1 हजार देने पर ₹4 हजार के नकली नोट उपलब्ध कराए जाएंगे। शुरुआती पूछताछ में दीपक ने बताया कि उसने पहली बार ही नकली नोट लेकर उन्हें बाजार में चलाने की कोशिश की थी। हालांकि उसकी यह कोशिश रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता के कारण सफल नहीं हो सकी और पूरा मामला पुलिस तक पहुंच गया। पुलिस का मानना है कि यदि आरोपी पकड़ा नहीं जाता तो नकली नोट आसानी से बाजार में खपाए जा सकते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी संजय पहले भी नकली नोटों के मामलों में पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। उसके खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में पहले से दो मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद वह दोबारा इसी तरह की गतिविधियों में शामिल पाया गया। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद नकली नोटों की गुणवत्ता और प्रिंटिंग की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि नोट किस तरह तैयार किए जा रहे थे और इनके लिए कच्चा माल कहां से लाया जाता था। जब्त प्रिंटिंग मशीन और अन्य उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक किन-किन इलाकों में नकली नोट चलाने की कोशिश की और क्या इनके जरिए अन्य लोगों को भी नकली नोट उपलब्ध कराए गए थे। आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। नकली नोटों की पहचान करना आम लोगों के लिए हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में व्यापारियों और दुकानदारों को भुगतान लेते समय नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा धागा, वाटरमार्क और अन्य सुरक्षा फीचर्स पर ध्यान देना चाहिए। छोटी-सी सतर्कता न केवल आर्थिक नुकसान से बचा सकती है बल्कि इस तरह के अपराधों का खुलासा करने में भी मददगार साबित हो सकती है। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोटों का यह कारोबार कितने समय से चल रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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₹200 का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक गिरफ्तार, साथी से ₹40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर में नकली नोटों के कारोबार का एक और मामला सामने आया है, जहां महज ₹200 का नकली नोट चलाने की कोशिश ने पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। गांधी नगर थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में भुगतान के दौरान रेस्टोरेंट संचालक को नोट संदिग्ध लगा। उसकी सतर्कता के चलते आरोपी मौके पर ही पकड़ लिया गया। पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से करीब ₹40 हजार के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने नकली नोट बाजार में खपाए और उनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार, 25 जून को राजनगर निवासी यशवंत यादव अपने सांवरिया रेस्टोरेंट पर मौजूद थे। इसी दौरान दीपक नाम का युवक खाना खाने के बाद भुगतान करने पहुंचा और उसने ₹200 का नोट दिया। नोट हाथ में लेते ही संचालक को उसकी गुणवत्ता और प्रिंटिंग पर संदेह हुआ। उन्होंने कर्मचारियों की मदद से युवक को वहीं रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान दीपक ने संजय नाम के युवक का नाम बताया, जिससे उसने नकली नोट खरीदे थे। पुलिस ने जानकारी के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए संजय और उसके साथी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से ₹40 हजार के नकली नोट, प्रिंटिंग मशीन और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया गया। पुलिस ने सभी सामग्री जब्त कर ली है और उसकी तकनीकी जांच कराई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि दीपक और संजय की पहचान पहले एक शराब दुकान पर हुई थी, जहां दोनों सेल्समैन के रूप में काम करते थे। इसी दौरान संजय ने दीपक को बताया था कि उसका एक परिचित ऐसे नकली नोट तैयार करता है, जिन्हें सामान्य तौर पर पहचानना मुश्किल होता है। कुछ समय बाद दोनों अलग-अलग काम करने लगे। दीपक ट्रक ड्राइवर बन गया, जबकि संजय इंदौर आकर रहने लगा। बाद में दोनों के बीच दोबारा संपर्क हुआ और यहीं से नकली नोटों का सौदा शुरू हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के बीच यह तय हुआ था कि ₹1 हजार देने पर ₹4 हजार के नकली नोट उपलब्ध कराए जाएंगे। शुरुआती पूछताछ में दीपक ने बताया कि उसने पहली बार ही नकली नोट लेकर उन्हें बाजार में चलाने की कोशिश की थी। हालांकि उसकी यह कोशिश रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता के कारण सफल नहीं हो सकी और पूरा मामला पुलिस तक पहुंच गया। पुलिस का मानना है कि यदि आरोपी पकड़ा नहीं जाता तो नकली नोट आसानी से बाजार में खपाए जा सकते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी संजय पहले भी नकली नोटों के मामलों में पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। उसके खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में पहले से दो मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद वह दोबारा इसी तरह की गतिविधियों में शामिल पाया गया। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद नकली नोटों की गुणवत्ता और प्रिंटिंग की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि नोट किस तरह तैयार किए जा रहे थे और इनके लिए कच्चा माल कहां से लाया जाता था। जब्त प्रिंटिंग मशीन और अन्य उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अब तक किन-किन इलाकों में नकली नोट चलाने की कोशिश की और क्या इनके जरिए अन्य लोगों को भी नकली नोट उपलब्ध कराए गए थे। आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। नकली नोटों की पहचान करना आम लोगों के लिए हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में व्यापारियों और दुकानदारों को भुगतान लेते समय नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा धागा, वाटरमार्क और अन्य सुरक्षा फीचर्स पर ध्यान देना चाहिए। छोटी-सी सतर्कता न केवल आर्थिक नुकसान से बचा सकती है बल्कि इस तरह के अपराधों का खुलासा करने में भी मददगार साबित हो सकती है। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोटों का यह कारोबार कितने समय से चल रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
