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भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की कड़ी निंदा की, UNSC में शांति का आह्वान
Digital Desk
UNSC में भारत ने कूटनीति, शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर दिया जोर
ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर साफ शब्दों में कहा है कि वह मर्चेंट शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करता है। भारत ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिष पर्नवथनेनी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसकी शुरुआत रमज़ान के पवित्र महीने में हुई, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। भारत ने खास तौर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्नवथनेनी ने कहा कि भारत के कई नागरिक खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और हालिया हमलों में कई भारतीयों की मौत हुई है या वे लापता हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हमले सीधे तौर पर मानव जीवन और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस बीच भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के सैन्य हमलों, नागरिकों पर हमलों और समुद्री व्यापार बाधित करने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।
भारत ने गाजा की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल हो। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त देने जा रहा है, जो उसके वार्षिक पांच मिलियन डॉलर योगदान का हिस्सा है। भारत ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
लेबनान संकट का जिक्र करते हुए भारत ने उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। भारत ने कहा कि शांति सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और उन पर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और बदलते वैश्विक हालात में इसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग दोहराई ताकि परिषद अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सके।
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भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की कड़ी निंदा की, UNSC में शांति का आह्वान
Digital Desk
ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर साफ शब्दों में कहा है कि वह मर्चेंट शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करता है। भारत ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिष पर्नवथनेनी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसकी शुरुआत रमज़ान के पवित्र महीने में हुई, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। भारत ने खास तौर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्नवथनेनी ने कहा कि भारत के कई नागरिक खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और हालिया हमलों में कई भारतीयों की मौत हुई है या वे लापता हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हमले सीधे तौर पर मानव जीवन और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस बीच भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के सैन्य हमलों, नागरिकों पर हमलों और समुद्री व्यापार बाधित करने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।
भारत ने गाजा की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल हो। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त देने जा रहा है, जो उसके वार्षिक पांच मिलियन डॉलर योगदान का हिस्सा है। भारत ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
लेबनान संकट का जिक्र करते हुए भारत ने उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। भारत ने कहा कि शांति सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और उन पर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और बदलते वैश्विक हालात में इसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग दोहराई ताकि परिषद अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सके।
