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लोकसभा में परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा टली, विपक्ष के हंगामे से दिनभर बाधित रही कार्यवाही
Digital Desk
छात्रों से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष ने बहस की मांग की, स्पीकर ने सरकार और विपक्ष से सहमति बनाकर सदन चलाने की अपील की
लोकसभा में सोमवार को लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों से बातचीत के जरिए सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की, लेकिन दिनभर गतिरोध बना रहा।
सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। सरकार की ओर से इस विधेयक को सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। हालांकि विपक्ष ने छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर पहले चर्चा कराने की मांग उठाई, जिसके कारण विधेयक पर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी।
विपक्षी सांसदों का कहना था कि छात्रों से जुड़े मामलों पर सदन में पहले विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर सांसदों ने सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। लगातार शोर-शराबे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष आपसी सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाएं। स्पीकर ने यह भी कहा कि वह शाम तक का समय दे रहे हैं ताकि सभी पक्ष बातचीत कर समाधान निकाल सकें।
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर तक, फिर दोपहर बाद और बाद में शाम तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसी तरह राज्यसभा में भी दिनभर व्यवधान बना रहा और वहां भी कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। संसद के दोनों सदनों में अपेक्षित विधायी कार्य पूरे नहीं हो सके।
इस बीच संसद परिसर के बाहर भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी मांग दोहराई और सरकार से चर्चा कराने का आग्रह किया। दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि वह सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है और संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलना लोकतंत्र के हित में है।
उधर, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें शॉल और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया गया तथा सांसद उनके साथ संसद भवन तक पहुंचे। इस दौरान कई सांसदों ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए। धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था और उसके बाद यह उनका संसद में पहला सार्वजनिक आगमन था।
सरकार की ओर से पेश किए गए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से अधिक कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता बनी रहेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा।
संशोधन विधेयक के अनुसार पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों बढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में मामलों की नियमित और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी ताकि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
यह कानून केंद्र सरकार तथा उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती परीक्षाएं, बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाएं तथा अन्य केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं शामिल रहेंगी। सरकार का कहना है कि इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सरकार ने यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की सहायता लेने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। सरकार पहले ही परीक्षा सुधार से जुड़े सुझावों के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा कर चुकी है, जो भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाएगी।
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लोकसभा में परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा टली, विपक्ष के हंगामे से दिनभर बाधित रही कार्यवाही
Digital Desk
लोकसभा में सोमवार को लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों से बातचीत के जरिए सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की, लेकिन दिनभर गतिरोध बना रहा।
सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। सरकार की ओर से इस विधेयक को सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। हालांकि विपक्ष ने छात्रों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर पहले चर्चा कराने की मांग उठाई, जिसके कारण विधेयक पर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी।
विपक्षी सांसदों का कहना था कि छात्रों से जुड़े मामलों पर सदन में पहले विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर सांसदों ने सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। लगातार शोर-शराबे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष आपसी सहमति बनाकर सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाएं। स्पीकर ने यह भी कहा कि वह शाम तक का समय दे रहे हैं ताकि सभी पक्ष बातचीत कर समाधान निकाल सकें।
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर तक, फिर दोपहर बाद और बाद में शाम तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसी तरह राज्यसभा में भी दिनभर व्यवधान बना रहा और वहां भी कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। संसद के दोनों सदनों में अपेक्षित विधायी कार्य पूरे नहीं हो सके।
इस बीच संसद परिसर के बाहर भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी मांग दोहराई और सरकार से चर्चा कराने का आग्रह किया। दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि वह सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है और संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलना लोकतंत्र के हित में है।
उधर, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें शॉल और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया गया तथा सांसद उनके साथ संसद भवन तक पहुंचे। इस दौरान कई सांसदों ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए। धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था और उसके बाद यह उनका संसद में पहला सार्वजनिक आगमन था।
सरकार की ओर से पेश किए गए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से अधिक कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता बनी रहेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा।
संशोधन विधेयक के अनुसार पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी में शामिल लोगों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों बढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में मामलों की नियमित और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी ताकि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
यह कानून केंद्र सरकार तथा उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती परीक्षाएं, बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाएं तथा अन्य केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं शामिल रहेंगी। सरकार का कहना है कि इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सरकार ने यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया है। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की सहायता लेने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। सरकार पहले ही परीक्षा सुधार से जुड़े सुझावों के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा कर चुकी है, जो भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाएगी।
