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भोपाल में बढ़ेगा ई-बसों का बेड़ा, 25 बसों का रजिस्ट्रेशन पूरा
भोपाल (म.प्र.)
अगले चरण में तीन रूट पर बढ़ेंगी सेवाएं, रोज 10 से 12 हजार यात्रियों को मिल सकती है सुविधा
भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बसों से जोड़ने की कवायद अब तेजी पकड़ रही है। शहर में चल रही ई-बसों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है और इसके लिए 25 बसों का आरटीओ रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। फिलहाल भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड यानी बीसीएलएल की 10 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चल रही हैं। इन बसों में रोजाना औसतन करीब 4500 यात्री सफर कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक अगले चरण में बसों की संख्या बढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या भी दो से ढाई गुना तक पहुंच सकती है। खास बात यह है कि इन बसों में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की संख्या भी काफी है, जिससे शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच आने-जाने के लिए यह सेवा धीरे-धीरे लोगों की पसंद बन रही है।
बीसीएलएल की योजना अगले चरण में ई-बसों को तीन प्रमुख मार्गों पर बढ़ाने की है। इनमें बैरागढ़ से आईएसबीटी, करोंद से अरेरा हिल और बैरागढ़ से सैरई तक के रूट शामिल बताए जा रहे हैं। मौजूदा बसों के साथ नई बसें जुड़ने के बाद इन मार्गों पर करीब 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी। परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि सेवा का विस्तार होने पर रोजाना 10 से 12 हजार यात्रियों को इसका लाभ मिल सकता है। शहर में करीब 33 ई-बसों का बेड़ा तैयार किया जा रहा है, जिनमें से 25 के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष बसों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भी संचालन में शामिल करने की तैयारी है। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों के बीच सार्वजनिक परिवहन का विकल्प और मजबूत होने की उम्मीद है।
बैरागढ़ से आईएसबीटी के बीच चलने वाला बी-37 रूट पुराने शहर और प्रशासनिक क्षेत्र को जोड़ने के लिहाज से अहम है। इस मार्ग पर ई-बस बैरागढ़ मार्केट से निकलकर लालघाटी, कल्याण अस्पताल, रॉयल मार्केट और शाहजहांनाबाद की तरफ जाती है। इसके बाद भोपाल टॉकीज, नादरा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर छह के आसपास से होकर बस आगे बढ़ती है। भारत टॉकीज, डीआईजी बंगला और पांचवटी के रास्ते माता मंदिर, वल्लभ भवन और विधानसभा क्षेत्र को जोड़ा जाता है। इसके बाद जिला न्यायालय, डीबी मॉल, बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन और चेतक ब्रिज होते हुए बस आईएसबीटी तक पहुंचती है। इस रूट की खासियत यह है कि रास्ते में बाजार, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र आते हैं, इसलिए दिनभर अलग-अलग वर्ग के यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।
बी-36 रूट भी शहर के कई व्यस्त हिस्सों को जोड़ने वाला मार्ग है। यह सेवा रेलवे स्टेशन और कोच फैक्ट्री क्षेत्र से होकर बैरागढ़ की तरफ जाती है और रास्ते में एमपी नगर जैसे बड़े व्यावसायिक क्षेत्र को जोड़ती है। रूट में बैरागढ़, फ्लाईओवर नंबर-1, अरेरा हिल्स, सुभाष नगर, चेतक ब्रिज, बोर्ड ऑफिस और एमपी नगर मेट्रो स्टेशन जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। इसके आगे विहान मार्केट, 1100 क्वार्टर्स और प्रभात चौराहा क्षेत्र आते हैं। बैरागढ़ अस्पताल, नंदाकिनी, गुलमोहर पार्क समेत आसपास के इलाकों को भी इस मार्ग से जोड़ा गया है। इस तरह बी-36 पर यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे स्टेशन, बाजार, दफ्तरों वाले इलाकों और आवासीय क्षेत्रों के बीच सीधा सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलता है। बसों की संख्या बढ़ने पर इस रूट पर इंतजार का समय कम करने और ज्यादा यात्रियों को सुविधा देने पर जोर रहेगा।
नई ई-बसों के संचालन के साथ बीसीएलएल का ध्यान केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से चल रहे मार्गों पर यात्री दबाव को देखते हुए सेवा बढ़ाने की तैयारी भी है। अभी 10 बसों में रोज करीब 4500 यात्रियों का सफर करना यह बताता है कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए शहर में मांग मौजूद है। खासकर सुबह और शाम के समय नौकरी और पढ़ाई के लिए निकलने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की अच्छी भागीदारी के कारण सुरक्षित और नियमित सार्वजनिक परिवहन की जरूरत भी सामने आती है। नए वाहन जुड़ने के बाद इन्हीं व्यस्त समय में अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि एक बस में ज्यादा भीड़ होने की स्थिति कम की जा सके।
शहर में ई-बसों के पूरे बेड़े को संचालन में लाने के लिए आरटीओ पंजीयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण है। अभी तक 25 बसों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जबकि बाकी बसों का पंजीयन पूरा होने के बाद उन्हें भी निर्धारित रूट पर लगाया जाना है। बीसीएलएल की ओर से बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर उतारने की तैयारी है। नए संचालन में बैरागढ़, आईएसबीटी, एमपी नगर, अरेरा हिल, करोंद और सैरई जैसे प्रमुख इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे शहर के एक छोर से दूसरे हिस्से तक जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे और मौजूदा सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क पर दबाव भी कम करने की कोशिश होगी।
भोपाल में बढ़ेगा ई-बसों का बेड़ा, 25 बसों का रजिस्ट्रेशन पूरा
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बसों से जोड़ने की कवायद अब तेजी पकड़ रही है। शहर में चल रही ई-बसों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है और इसके लिए 25 बसों का आरटीओ रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। फिलहाल भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड यानी बीसीएलएल की 10 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर चल रही हैं। इन बसों में रोजाना औसतन करीब 4500 यात्री सफर कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक अगले चरण में बसों की संख्या बढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या भी दो से ढाई गुना तक पहुंच सकती है। खास बात यह है कि इन बसों में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की संख्या भी काफी है, जिससे शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच आने-जाने के लिए यह सेवा धीरे-धीरे लोगों की पसंद बन रही है।
बीसीएलएल की योजना अगले चरण में ई-बसों को तीन प्रमुख मार्गों पर बढ़ाने की है। इनमें बैरागढ़ से आईएसबीटी, करोंद से अरेरा हिल और बैरागढ़ से सैरई तक के रूट शामिल बताए जा रहे हैं। मौजूदा बसों के साथ नई बसें जुड़ने के बाद इन मार्गों पर करीब 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी। परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि सेवा का विस्तार होने पर रोजाना 10 से 12 हजार यात्रियों को इसका लाभ मिल सकता है। शहर में करीब 33 ई-बसों का बेड़ा तैयार किया जा रहा है, जिनमें से 25 के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष बसों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भी संचालन में शामिल करने की तैयारी है। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों के बीच सार्वजनिक परिवहन का विकल्प और मजबूत होने की उम्मीद है।
बैरागढ़ से आईएसबीटी के बीच चलने वाला बी-37 रूट पुराने शहर और प्रशासनिक क्षेत्र को जोड़ने के लिहाज से अहम है। इस मार्ग पर ई-बस बैरागढ़ मार्केट से निकलकर लालघाटी, कल्याण अस्पताल, रॉयल मार्केट और शाहजहांनाबाद की तरफ जाती है। इसके बाद भोपाल टॉकीज, नादरा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर छह के आसपास से होकर बस आगे बढ़ती है। भारत टॉकीज, डीआईजी बंगला और पांचवटी के रास्ते माता मंदिर, वल्लभ भवन और विधानसभा क्षेत्र को जोड़ा जाता है। इसके बाद जिला न्यायालय, डीबी मॉल, बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन और चेतक ब्रिज होते हुए बस आईएसबीटी तक पहुंचती है। इस रूट की खासियत यह है कि रास्ते में बाजार, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र आते हैं, इसलिए दिनभर अलग-अलग वर्ग के यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।
बी-36 रूट भी शहर के कई व्यस्त हिस्सों को जोड़ने वाला मार्ग है। यह सेवा रेलवे स्टेशन और कोच फैक्ट्री क्षेत्र से होकर बैरागढ़ की तरफ जाती है और रास्ते में एमपी नगर जैसे बड़े व्यावसायिक क्षेत्र को जोड़ती है। रूट में बैरागढ़, फ्लाईओवर नंबर-1, अरेरा हिल्स, सुभाष नगर, चेतक ब्रिज, बोर्ड ऑफिस और एमपी नगर मेट्रो स्टेशन जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। इसके आगे विहान मार्केट, 1100 क्वार्टर्स और प्रभात चौराहा क्षेत्र आते हैं। बैरागढ़ अस्पताल, नंदाकिनी, गुलमोहर पार्क समेत आसपास के इलाकों को भी इस मार्ग से जोड़ा गया है। इस तरह बी-36 पर यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे स्टेशन, बाजार, दफ्तरों वाले इलाकों और आवासीय क्षेत्रों के बीच सीधा सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलता है। बसों की संख्या बढ़ने पर इस रूट पर इंतजार का समय कम करने और ज्यादा यात्रियों को सुविधा देने पर जोर रहेगा।
नई ई-बसों के संचालन के साथ बीसीएलएल का ध्यान केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से चल रहे मार्गों पर यात्री दबाव को देखते हुए सेवा बढ़ाने की तैयारी भी है। अभी 10 बसों में रोज करीब 4500 यात्रियों का सफर करना यह बताता है कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए शहर में मांग मौजूद है। खासकर सुबह और शाम के समय नौकरी और पढ़ाई के लिए निकलने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की अच्छी भागीदारी के कारण सुरक्षित और नियमित सार्वजनिक परिवहन की जरूरत भी सामने आती है। नए वाहन जुड़ने के बाद इन्हीं व्यस्त समय में अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि एक बस में ज्यादा भीड़ होने की स्थिति कम की जा सके।
शहर में ई-बसों के पूरे बेड़े को संचालन में लाने के लिए आरटीओ पंजीयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण है। अभी तक 25 बसों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जबकि बाकी बसों का पंजीयन पूरा होने के बाद उन्हें भी निर्धारित रूट पर लगाया जाना है। बीसीएलएल की ओर से बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर उतारने की तैयारी है। नए संचालन में बैरागढ़, आईएसबीटी, एमपी नगर, अरेरा हिल, करोंद और सैरई जैसे प्रमुख इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे शहर के एक छोर से दूसरे हिस्से तक जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे और मौजूदा सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क पर दबाव भी कम करने की कोशिश होगी।
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