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देशभर में बारिश बनी आफत, यूपी-झारखंड में 17 मौतें; हिमाचल-उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से 300 से ज्यादा सड़कें बंद
Digital Desk
झारखंड में आकाशीय बिजली ने ली 14 लोगों की जान, यूपी में तीन की मौत, केरल में चार दिनों में 25 लोगों की जान गई; कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन प्रभावित।
देशभर में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है और कई राज्यों में बारिश अब राहत के बजाय मुसीबत बन गई है। झारखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और बिहार सहित कई राज्यों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें बंद हैं, नदियां उफान पर हैं, स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
सबसे अधिक नुकसान झारखंड में देखने को मिला, जहां मंगलवार को अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई। गिरिडीह जिले में सबसे ज्यादा 9 लोगों की जान गई, जबकि दुमका में 3 और लातेहार में 2 लोगों की मौत हुई। इस हादसे में आठ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी बारिश के दौरान दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। यहां दो मासूम बच्चों की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई, जबकि एक 25 वर्षीय युवक की जान आकाशीय बिजली गिरने से चली गई। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
दक्षिण भारत के केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 1 अगस्त से शुरू हुई भारी बारिश के कारण अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। सबसे अधिक प्रभावित पथनमथिट्टा, कोट्टायम और अलप्पुझा जिले हैं।
बारिश और बाढ़ की वजह से केरल में हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सरकार ने 18 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में ठहराया है, जहां भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य आपदा प्रबंधन बल और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी लगातार बारिश के चलते हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। दोनों पर्वतीय राज्यों में कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। हिमाचल प्रदेश में करीब 160 सड़कें बंद हैं, जबकि उत्तराखंड में 100 से अधिक मार्गों पर यातायात बाधित है। कई इलाकों में पहाड़ियों से मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी और सिलाई बैंड के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर मलबा जमा हो गया और यातायात रोकना पड़ा। प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क साफ करने का काम शुरू किया है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है।
देहरादून और बागेश्वर जिलों में मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। अधिकारियों ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।
उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी बारिश का असर दिखाई दिया। हरियाणा के पानीपत में भारी बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो गईं। कई स्थानों पर खुले नाले पानी में छिप गए, जिसके कारण तीन बच्चे नाले में गिर गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव अभियान चलाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में भारी बारिश के बाद अंडरपास पूरी तरह पानी से भर गया। कई दोपहिया वाहन चालक कमर तक पानी में चलकर रास्ता पार करते नजर आए। स्थानीय प्रशासन ने जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बिहार के सासाराम में भी बारिश के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया। यहां सेल्फी लेने के दौरान तीन युवक नदी के तेज बहाव में फंस गए। ग्रामीणों ने कपड़ों की रस्सी बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद प्रशासन ने नदियों और जलाशयों के आसपास लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून फिलहाल सक्रिय बना हुआ है और देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पश्चिमी तट के राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
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देशभर में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है और कई राज्यों में बारिश अब राहत के बजाय मुसीबत बन गई है। झारखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और बिहार सहित कई राज्यों में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें बंद हैं, नदियां उफान पर हैं, स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
सबसे अधिक नुकसान झारखंड में देखने को मिला, जहां मंगलवार को अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई। गिरिडीह जिले में सबसे ज्यादा 9 लोगों की जान गई, जबकि दुमका में 3 और लातेहार में 2 लोगों की मौत हुई। इस हादसे में आठ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी बारिश के दौरान दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। यहां दो मासूम बच्चों की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई, जबकि एक 25 वर्षीय युवक की जान आकाशीय बिजली गिरने से चली गई। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
दक्षिण भारत के केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 1 अगस्त से शुरू हुई भारी बारिश के कारण अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। सबसे अधिक प्रभावित पथनमथिट्टा, कोट्टायम और अलप्पुझा जिले हैं।
बारिश और बाढ़ की वजह से केरल में हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सरकार ने 18 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में ठहराया है, जहां भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य आपदा प्रबंधन बल और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी लगातार बारिश के चलते हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। दोनों पर्वतीय राज्यों में कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। हिमाचल प्रदेश में करीब 160 सड़कें बंद हैं, जबकि उत्तराखंड में 100 से अधिक मार्गों पर यातायात बाधित है। कई इलाकों में पहाड़ियों से मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी और सिलाई बैंड के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर मलबा जमा हो गया और यातायात रोकना पड़ा। प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क साफ करने का काम शुरू किया है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है।
देहरादून और बागेश्वर जिलों में मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। अधिकारियों ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।
उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी बारिश का असर दिखाई दिया। हरियाणा के पानीपत में भारी बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो गईं। कई स्थानों पर खुले नाले पानी में छिप गए, जिसके कारण तीन बच्चे नाले में गिर गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव अभियान चलाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में भारी बारिश के बाद अंडरपास पूरी तरह पानी से भर गया। कई दोपहिया वाहन चालक कमर तक पानी में चलकर रास्ता पार करते नजर आए। स्थानीय प्रशासन ने जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बिहार के सासाराम में भी बारिश के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया। यहां सेल्फी लेने के दौरान तीन युवक नदी के तेज बहाव में फंस गए। ग्रामीणों ने कपड़ों की रस्सी बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद प्रशासन ने नदियों और जलाशयों के आसपास लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून फिलहाल सक्रिय बना हुआ है और देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पश्चिमी तट के राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
