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ईरान पर ट्रंप का फिर बड़ा दावा, बोले- 'कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा'
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ओवल ऑफिस में ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लगभग खत्म करने का दावा किया; अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ने के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम पर भी बोले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने कड़े रुख को एक बार फिर दोहराया है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता बुरी तरह कमजोर हो चुकी है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए उसकी नौसेना और वायुसेना को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से खराब हो चुकी है। हालांकि, ये ट्रंप के दावे हैं और इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
परमाणु हथियारों को लेकर ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हों। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो इससे इजरायल, मध्य पूर्व और आगे चलकर अमेरिका के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
ईरान को बताया 'विफल राष्ट्र'
ट्रंप ने ईरान को 'विफल राष्ट्र' बताते हुए उसकी अर्थव्यवस्था, मुद्रा, सेना और नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरानी नेतृत्व का बड़ा हिस्सा मारा जा चुका है और देश की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने सामाजिक मीडिया पर भी ईरान की स्थिति को लेकर इसी तरह के दावे किए। हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाने की उनकी बात की स्वतंत्र स्रोतों से पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अभी भी जवाबी सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम है और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल हमले कर चुका है।
एक महीने बाद फिर आमने-सामने अमेरिका और ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अगस्त के अंत में एक बार फिर बढ़ गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर कार्रवाई के दौरान दो मिसाइल प्रक्षेपकों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी वायुसेना ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। करीब एक महीने बाद दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमले का यह नया दौर सामने आया। इसके बाद ट्रंप ने ईरान को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हालिया घटनाक्रम का मतलब जरूरी तौर पर पूर्ण युद्ध की वापसी नहीं है।
परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर भी सवाल
पत्रकारों ने ट्रंप से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि इसकी कोई वजह नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान पहले ही सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका और तेहरान के बीच संघर्ष का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन की शुरुआती युद्ध प्राथमिकताओं में ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना भी शामिल रहा है। अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचने के दावे किए गए हैं, लेकिन ईरान की मौजूदा परमाणु क्षमताओं और भविष्य की स्थिति की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी ट्रंप का दावा
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की मदद से जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजर रहे हैं और बड़ी मात्रा में तेल बाहर जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। मौजूदा संघर्ष के बीच इस जलमार्ग में लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम में इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।
खार्ग द्वीप को लेकर भी विवाद
ट्रंप ने हाल ही में ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को लेकर सामाजिक मीडिया पर हमले का दावा किया था। उन्होंने विस्फोटों का एक वीडियो साझा करते हुए द्वीप को नष्ट किए जाने की बात कही थी। हालांकि, बाद में जांच में पाया गया कि संबंधित वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किया गया था और उस समय खार्ग द्वीप पर ऐसे हमले की पुष्टि नहीं हुई थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ट्रंप का पोस्ट ईरान को संदेश देने के लिए था। इस घटनाक्रम ने युद्ध से जुड़े दावों और सामाजिक मीडिया पर प्रसारित सामग्री की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए।
ईरान अब भी बातचीत के पक्ष में
दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने की इच्छा दोहराई है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि युद्ध जारी रखना ईरान, क्षेत्र और मानवता—किसी के हित में नहीं है।
इस बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तेल कारोबार और उससे जुड़े विदेशी कारोबारियों पर नए द्वितीयक प्रतिबंध लगाने की रणनीति अपनाई है। वॉशिंगटन का उद्देश्य आर्थिक दबाव के जरिए तेहरान को अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए मजबूर करना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी जारी है। ट्रंप का ताजा बयान बताता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना अमेरिकी नीति का केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। वहीं, जमीनी स्तर पर सैन्य तनाव के बावजूद बातचीत की संभावना भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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