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तमिल सिनेमा के दिग्गज भारतीराजा का निधन, फिल्म जगत में शोक की लहर
बालीवुड डेस्क
84 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, ग्रामीण पृष्ठभूमि की कहानियों और नई प्रतिभाओं को मौका देने के लिए जाने जाते थे मशहूर फिल्ममेकर
तमिल सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज फिल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता भारतीराजा का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग समेत पूरे भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई कलाकारों, निर्देशकों और फिल्म प्रेमियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारतीराजा को तमिल सिनेमा में नई सोच, ग्रामीण परिवेश पर आधारित कहानियों और नए कलाकारों को मंच देने वाले फिल्मकार के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसी फिल्में दीं जिन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान भी बनाई।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनकी सेहत लगातार कमजोर चल रही थी। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार अपने बेटे और अभिनेता मनोज भारतीराजा के निधन के बाद वह गहरे सदमे में थे। मनोज का मार्च 2024 में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। उस घटना के बाद से ही भारतीराजा मानसिक रूप से काफी टूट गए थे। उनके करीबी लोगों का कहना था कि बेटे के जाने का दुख वह कभी पूरी तरह भुला नहीं पाए। हाल ही में उनके भाई जयराज पेरियमायाथेवर ने भी बताया था कि भारतीराजा अपने बेटे की मौत के गम से उबर नहीं पा रहे थे और यह दर्द उनके स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा था।
पिछले वर्ष दिसंबर में उन्हें चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई थी। हालांकि हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। फिलहाल उनके निधन के पीछे की सटीक चिकित्सीय वजह को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन उनके जाने से तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने अपने सबसे सम्मानित और प्रभावशाली निर्देशकों में से एक को खो दिया है।
भारतीराजा का नाम तमिल सिनेमा के इतिहास में हमेशा विशेष सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने 1977 में अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘16 वायाथिनिले’ से फिल्म उद्योग में कदम रखा था। यह फिल्म अपने समय की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में कमल हासन और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे, जबकि रजनीकांत ने खलनायक का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। यह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में चली और आज भी तमिल सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।
भारतीराजा की सबसे बड़ी पहचान उनकी फिल्मों की कहानियां थीं। उन्होंने गांवों, खेतों, रिश्तों और आम लोगों की जिंदगी को बड़े पर्दे पर बेहद संवेदनशील तरीके से पेश किया। उस दौर में जब शहरी विषयों पर फिल्में ज्यादा बन रही थीं, तब उन्होंने ग्रामीण भारत को अपनी फिल्मों का केंद्र बनाया। यही कारण था कि उनकी फिल्मों से दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ जाते थे। उन्हें प्यार से ‘इयक्कुनर इमयम’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘निर्देशन का शिखर पुरुष’। यह उपाधि उनके सिनेमा में योगदान को देखते हुए दी गई थी।
उनकी एक दिलचस्प पहचान यह भी रही कि वे अपनी फिल्मों में अक्सर ‘R’ अक्षर से नाम शुरू होने वाली अभिनेत्रियों को मौका देते थे। राधा जैसी कई अभिनेत्रियों ने उनके साथ काम कर पहचान हासिल की। फिल्म इंडस्ट्री में यह बात लंबे समय तक चर्चा का विषय रही। हालांकि उनके लिए प्रतिभा सबसे महत्वपूर्ण थी, लेकिन यह संयोग उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।
भारतीराजा को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान भी दिया गया था। उन्होंने निर्देशन के अलावा अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने निर्देशन से दूरी बना ली थी, लेकिन अभिनय के जरिए दर्शकों के बीच सक्रिय रहे। धनुष की सुपरहिट फिल्म ‘तिरुचित्रम्बलम’ में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया था।
उनके निधन पर अभिनेत्री और नेता खुशबू सुंदर सहित कई फिल्मी हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। फिल्म जगत का मानना है कि भारतीराजा का जाना केवल एक निर्देशक का निधन नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उनकी फिल्में, उनकी सोच और उनका सिनेमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। तमिल सिनेमा में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
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तमिल सिनेमा के दिग्गज भारतीराजा का निधन, फिल्म जगत में शोक की लहर
बालीवुड डेस्क
तमिल सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज फिल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता भारतीराजा का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग समेत पूरे भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई कलाकारों, निर्देशकों और फिल्म प्रेमियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारतीराजा को तमिल सिनेमा में नई सोच, ग्रामीण परिवेश पर आधारित कहानियों और नए कलाकारों को मंच देने वाले फिल्मकार के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसी फिल्में दीं जिन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान भी बनाई।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनकी सेहत लगातार कमजोर चल रही थी। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार अपने बेटे और अभिनेता मनोज भारतीराजा के निधन के बाद वह गहरे सदमे में थे। मनोज का मार्च 2024 में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। उस घटना के बाद से ही भारतीराजा मानसिक रूप से काफी टूट गए थे। उनके करीबी लोगों का कहना था कि बेटे के जाने का दुख वह कभी पूरी तरह भुला नहीं पाए। हाल ही में उनके भाई जयराज पेरियमायाथेवर ने भी बताया था कि भारतीराजा अपने बेटे की मौत के गम से उबर नहीं पा रहे थे और यह दर्द उनके स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा था।
पिछले वर्ष दिसंबर में उन्हें चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई थी। हालांकि हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। फिलहाल उनके निधन के पीछे की सटीक चिकित्सीय वजह को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन उनके जाने से तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने अपने सबसे सम्मानित और प्रभावशाली निर्देशकों में से एक को खो दिया है।
भारतीराजा का नाम तमिल सिनेमा के इतिहास में हमेशा विशेष सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने 1977 में अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘16 वायाथिनिले’ से फिल्म उद्योग में कदम रखा था। यह फिल्म अपने समय की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में कमल हासन और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे, जबकि रजनीकांत ने खलनायक का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। यह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में चली और आज भी तमिल सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।
भारतीराजा की सबसे बड़ी पहचान उनकी फिल्मों की कहानियां थीं। उन्होंने गांवों, खेतों, रिश्तों और आम लोगों की जिंदगी को बड़े पर्दे पर बेहद संवेदनशील तरीके से पेश किया। उस दौर में जब शहरी विषयों पर फिल्में ज्यादा बन रही थीं, तब उन्होंने ग्रामीण भारत को अपनी फिल्मों का केंद्र बनाया। यही कारण था कि उनकी फिल्मों से दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ जाते थे। उन्हें प्यार से ‘इयक्कुनर इमयम’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘निर्देशन का शिखर पुरुष’। यह उपाधि उनके सिनेमा में योगदान को देखते हुए दी गई थी।
उनकी एक दिलचस्प पहचान यह भी रही कि वे अपनी फिल्मों में अक्सर ‘R’ अक्षर से नाम शुरू होने वाली अभिनेत्रियों को मौका देते थे। राधा जैसी कई अभिनेत्रियों ने उनके साथ काम कर पहचान हासिल की। फिल्म इंडस्ट्री में यह बात लंबे समय तक चर्चा का विषय रही। हालांकि उनके लिए प्रतिभा सबसे महत्वपूर्ण थी, लेकिन यह संयोग उनके प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।
भारतीराजा को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान भी दिया गया था। उन्होंने निर्देशन के अलावा अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने निर्देशन से दूरी बना ली थी, लेकिन अभिनय के जरिए दर्शकों के बीच सक्रिय रहे। धनुष की सुपरहिट फिल्म ‘तिरुचित्रम्बलम’ में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया था।
उनके निधन पर अभिनेत्री और नेता खुशबू सुंदर सहित कई फिल्मी हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। फिल्म जगत का मानना है कि भारतीराजा का जाना केवल एक निर्देशक का निधन नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उनकी फिल्में, उनकी सोच और उनका सिनेमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। तमिल सिनेमा में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
