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मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया
मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विवादित प्रस्तावित नियम वापस लेने के निर्देश दिए, अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को अपात्र ठहराने वाला प्रावधान हटाकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।
भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।
वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।
सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है।
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मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की सीमा हटेगी, सीएम ने ड्राफ्ट निरस्त किया
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा फैसला लेते हुए दो बच्चों की सीमा संबंधी विवादित प्रावधान को वापस लेने का निर्णय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 के उस प्रस्तावित मसौदे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल प्रभाव से ड्राफ्ट हटाने और संशोधित प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के इस कदम को लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इस प्रस्तावित नियम को लेकर प्रदेशभर में चर्चा चल रही थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इस प्रावधान को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई लोगों का मानना था कि यह नियम बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित कर सकता है।
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 जून 2026 को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026 का प्रारूप जारी किया था। इस मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया था कि जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक जीवित संतान होंगी, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जा सकता है। जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई वर्गों ने इसे कठोर और विवादास्पद कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण से जोड़कर समर्थन भी किया।
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा ड्राफ्ट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और इसे सरकारी पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही नया संशोधित मसौदा तैयार किया जाए, जिसमें दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़ा प्रावधान शामिल न हो।
भोपाल में प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा रही। अधिकारियों के अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसा नियम बनाना है जो व्यावहारिक हो और व्यापक जनहित को ध्यान में रखे। इसी वजह से नए प्रारूप पर दोबारा काम किया जाएगा। माना जा रहा है कि विभाग जल्द ही संशोधित मसौदा सार्वजनिक कर सकता है, जिस पर फिर से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो आने वाले समय में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की पात्रता प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल देखा जा रहा है।
वर्तमान में कार्यरत कई सरकारी कर्मचारी भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंतित बताए जा रहे थे। कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि भविष्य में सेवा संबंधी नियमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया था, लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर लगातार जारी था। अब ड्राफ्ट वापस लिए जाने के बाद इन आशंकाओं पर भी विराम लग गया है।
सरकार ने जनभावनाओं और विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हाल के वर्षों में कई राज्यों में दो बच्चों की नीति को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे लेकर कानूनी और सामाजिक बहस भी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित नियम के सार्वजनिक होते ही इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
अनुसार नया मसौदा तैयार करते समय भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग के साथ अनावश्यक भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस फैसले को राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी काफी हद तक समाप्त हो गई है।
