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पहले एक्टिंग कर जीता दिल, फिर राजनीति में बनाई पहचान, जानें रामायण के रावण का अभिनय से संसद तक का अनोखा सफर
बॉलीवुड डेस्क
रामायण के रावण बने अरविंद त्रिवेदी का अभिनय से राजनीति तक का सफर। 300 से ज्यादा फिल्मों और सांसद बनने तक की पूरी कहानी।
39 साल पहले जो ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक रामायण प्रसारित हुआ था, वो आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा है। इस शो में लंकापति रावण का प्रभावशाली किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी ने अपनी गहरी आवाज और शानदार अभिनय के जरिए हर किसी का ध्यान खींचा। उस जमाने में जब पूरा परिवार एक साथ टीवी के सामने बैठकर इस धारावाहिक का आनंद लेता था, रावण का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया था। कुछ लोग इससे डरते थे, तो कुछ इससे प्रभावित होते थे, लेकिन अरविंद त्रिवेदी ने इस किरदार को इतनी मजबूती से निभाया कि वो भारतीय टेलीविजन इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन गया।
इंदौर से संबंध रखने वाले अरविंद त्रिवेदी का जन्म 8 नवंबर 1938 को हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था और पढ़ाई के बाद उन्होंने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्होंने गुजराती रंगमंच और फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिसमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में शामिल थीं। उनकी आवाज और गंभीर अभिनय शैली ने उन्हें रावण के किरदार तक पहुंचाया। रामानंद सागर के इस बड़े प्रोजेक्ट में पहले उन्होंने साधु का किरदार निभाने के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था, लेकिन उनकी आवाज और चेहरे के हाव-भाव को देखकर उन्हें रावण की भूमिका निभाने का मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
Ramayan की अभूतपूर्व सफलता के बाद अरविंद त्रिवेदी का नाम पूरे देश में फैल गया। लोग उन्हें असल जिंदगी में भी रावण की तरह पहचानने लगे, जबकि असल में वो बेहद शांत, धार्मिक और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। इस शो ने उन्हें इतनी प्रसिद्धि दी कि गुजरात सरकार ने उन्हें कई बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया। बाद में उन्होंने अभिनय से हटकर राजनीति में कदम रखा और 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुजरात के साबरकांठा से लोकसभा सांसद चुने गए। उन्होंने संसद में पांच साल तक सक्रिय भूमिका निभाई और जनसेवा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया। अभिनय से राजनीति तक का उनका ये सफर उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी छवि को दर्शाता है - एक तरफ वो पर्दे पर रावण बने और दूसरी तरफ असल जिंदगी में वो एक जनप्रतिनिधि के रूप में उभरे।
अरविंद त्रिवेदी ने अपने जीवन में कला, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन तीनों क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ी। उनका योगदान आज भी भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के इतिहास में याद किया जाता है। रामायण में रावण का किरदार उन्हें अमर कर गया और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी रूप में याद करेंगी। सालों बाद भी जब लोग रामायण देखते हैं या उस वक्त की याद करते हैं, तो अरविंद त्रिवेदी का नाम सबसे पहले उन कलाकारों में आता है जिन्होंने अपने अभिनय से एक पौराणिक चरित्र को सजीव बना दिया।
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पहले एक्टिंग कर जीता दिल, फिर राजनीति में बनाई पहचान, जानें रामायण के रावण का अभिनय से संसद तक का अनोखा सफर
बॉलीवुड डेस्क
39 साल पहले जो ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक रामायण प्रसारित हुआ था, वो आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा है। इस शो में लंकापति रावण का प्रभावशाली किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी ने अपनी गहरी आवाज और शानदार अभिनय के जरिए हर किसी का ध्यान खींचा। उस जमाने में जब पूरा परिवार एक साथ टीवी के सामने बैठकर इस धारावाहिक का आनंद लेता था, रावण का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया था। कुछ लोग इससे डरते थे, तो कुछ इससे प्रभावित होते थे, लेकिन अरविंद त्रिवेदी ने इस किरदार को इतनी मजबूती से निभाया कि वो भारतीय टेलीविजन इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन गया।
इंदौर से संबंध रखने वाले अरविंद त्रिवेदी का जन्म 8 नवंबर 1938 को हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था और पढ़ाई के बाद उन्होंने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्होंने गुजराती रंगमंच और फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिसमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में शामिल थीं। उनकी आवाज और गंभीर अभिनय शैली ने उन्हें रावण के किरदार तक पहुंचाया। रामानंद सागर के इस बड़े प्रोजेक्ट में पहले उन्होंने साधु का किरदार निभाने के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था, लेकिन उनकी आवाज और चेहरे के हाव-भाव को देखकर उन्हें रावण की भूमिका निभाने का मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
Ramayan की अभूतपूर्व सफलता के बाद अरविंद त्रिवेदी का नाम पूरे देश में फैल गया। लोग उन्हें असल जिंदगी में भी रावण की तरह पहचानने लगे, जबकि असल में वो बेहद शांत, धार्मिक और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। इस शो ने उन्हें इतनी प्रसिद्धि दी कि गुजरात सरकार ने उन्हें कई बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया। बाद में उन्होंने अभिनय से हटकर राजनीति में कदम रखा और 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुजरात के साबरकांठा से लोकसभा सांसद चुने गए। उन्होंने संसद में पांच साल तक सक्रिय भूमिका निभाई और जनसेवा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया। अभिनय से राजनीति तक का उनका ये सफर उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी छवि को दर्शाता है - एक तरफ वो पर्दे पर रावण बने और दूसरी तरफ असल जिंदगी में वो एक जनप्रतिनिधि के रूप में उभरे।
अरविंद त्रिवेदी ने अपने जीवन में कला, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन तीनों क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ी। उनका योगदान आज भी भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के इतिहास में याद किया जाता है। रामायण में रावण का किरदार उन्हें अमर कर गया और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी रूप में याद करेंगी। सालों बाद भी जब लोग रामायण देखते हैं या उस वक्त की याद करते हैं, तो अरविंद त्रिवेदी का नाम सबसे पहले उन कलाकारों में आता है जिन्होंने अपने अभिनय से एक पौराणिक चरित्र को सजीव बना दिया।
