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एमपी को नंबर-1 बनाने की तैयारी, सीएम मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में अफसरों को दिया बड़ा टास्क
भोपाल (म.प्र.)
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में नर्मदा मिशन, जल संरक्षण, किसानों, पर्यटन और सरकारी कार्यों को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।
मध्यप्रदेश को देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों की गतिविधियों, योजनाओं की प्रगति, और ज़मीनी चुनौतियों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का प्रभाव लोगों तक पहुंचना चाहिए और हर विभाग को अपनी ज़िम्मेदारी गंभीरता से लेनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में प्रशासनिक कार्यों, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, धार्मिक पर्यटन, और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि जिन जिलों या क्षेत्रों में प्रगति धीमी है, वहां विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा, नर्मदा समग्र मिशन के लिए अलग नोडल विभाग और स्पेशल सेल बनाने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को नर्मदा अभियान से जोड़ा जाए। साथ ही अमरकंटक और अन्य प्रमुख नदी उद्गम स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए उद्गम स्थलों के आसपास अनियंत्रित निर्माण कम किए जाएं और दूर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान चलाकर पूरी की जाए और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। गर्मी को देखते हुए पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर पानी की उपलब्धता पर नजर रखी जाए। जल संरक्षण को जनअभियान बनाने की बात भी बैठक में उठी। यह सुझाव दिया गया है कि सरकार गांवों और शहरों में स्थानीय लोगों को जल संरक्षण गतिविधियों में जोड़ने के लिए अलग अभियान चला सकती है।
बैठक में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संयुक्त बैठक करने का उल्लेख किया। मंदाकिनी नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। साथ ही ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को श्रीराम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए। महाकाल महालोक समेत बड़े धार्मिक स्थलों पर होमगार्ड व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
किसानों और युवाओं से जुड़े निर्णय भी बैठक में सामने आए। मुख्यमंत्री ने खंडवा और बुरहानपुर मंडियों में कपास उत्पादक किसानों के लिए मंडी शुल्क को एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और पड़ोसी महाराष्ट्र के समान शुल्क होने से व्यापार में आसानी होगी। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में सेक्टर आधारित प्रशिक्षण शुरू करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। राजधानी भोपाल के मंत्रालय भवनों में लागू बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लागू करने की बात कही।
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एमपी को नंबर-1 बनाने की तैयारी, सीएम मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में अफसरों को दिया बड़ा टास्क
भोपाल (म.प्र.)
मध्यप्रदेश को देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में एक बड़ी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों की गतिविधियों, योजनाओं की प्रगति, और ज़मीनी चुनौतियों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का प्रभाव लोगों तक पहुंचना चाहिए और हर विभाग को अपनी ज़िम्मेदारी गंभीरता से लेनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में प्रशासनिक कार्यों, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, धार्मिक पर्यटन, और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि जिन जिलों या क्षेत्रों में प्रगति धीमी है, वहां विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा, नर्मदा समग्र मिशन के लिए अलग नोडल विभाग और स्पेशल सेल बनाने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को नर्मदा अभियान से जोड़ा जाए। साथ ही अमरकंटक और अन्य प्रमुख नदी उद्गम स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए उद्गम स्थलों के आसपास अनियंत्रित निर्माण कम किए जाएं और दूर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान चलाकर पूरी की जाए और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। गर्मी को देखते हुए पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि हर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर पानी की उपलब्धता पर नजर रखी जाए। जल संरक्षण को जनअभियान बनाने की बात भी बैठक में उठी। यह सुझाव दिया गया है कि सरकार गांवों और शहरों में स्थानीय लोगों को जल संरक्षण गतिविधियों में जोड़ने के लिए अलग अभियान चला सकती है।
बैठक में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम के विकास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संयुक्त बैठक करने का उल्लेख किया। मंदाकिनी नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। साथ ही ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को श्रीराम वन गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय जैसी परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए। महाकाल महालोक समेत बड़े धार्मिक स्थलों पर होमगार्ड व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
किसानों और युवाओं से जुड़े निर्णय भी बैठक में सामने आए। मुख्यमंत्री ने खंडवा और बुरहानपुर मंडियों में कपास उत्पादक किसानों के लिए मंडी शुल्क को एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और पड़ोसी महाराष्ट्र के समान शुल्क होने से व्यापार में आसानी होगी। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में सेक्टर आधारित प्रशिक्षण शुरू करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। राजधानी भोपाल के मंत्रालय भवनों में लागू बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लागू करने की बात कही।
