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6 महीने में बदली कोडिंग दुनिया, पीछे छूट रहे पुराने ढर्रे वाले इंजीनियर: बोले- पूर्व गूगल CEO
नेशनल डेस्क
हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है, उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है, वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है, खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।
एरिक श्मिट ने बातचीत में अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि जब वो 20 साल के थे, तब खुद कोड लिखना उनके लिए बड़ी बात थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उनका कहना है कि आज एआई सिस्टम ने कोडिंग को इतना आसान और तेज बना दिया है कि पुराने तरीके से काम करना अब पीछे छूटता जा रहा है। उनके मुताबिक, कई कंपनियों को अब यह सवाल करना चाहिए कि आखिर टीम अभी भी उसी पुराने तरीके से कोड क्यों लिख रही है, जब तकनीक इसी तरह आगे बढ़ चुकी है।
टेक इंडस्ट्री में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग राय हैं, लेकिन श्मिट का कहना है कि एआई का असर केवल एक सहायक टूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काम करने की पूरी प्रक्रिया को बदल रहा है। उनकी रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई की मदद से अब वही काम, जो पहले कई इंजीनियर्स मिलकर करते थे, वो अब बहुत कम समय में हो सकता है। यहां तक कि एक अकेला डेवलपर भी एआई टूल्स की सहायता से बड़े और जटिल ऐप्स बना सकता है। श्मिट का ये भी कहना है कि यह बदलाव अचानक ही तेजी से आया है, जिसकी शुरुआत पिछले साल से मानी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई की क्षमता देखकर वे खुद कई बार आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक न केवल काम को आसान बना रही है, बल्कि सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल रही है। इस बीच, टेक कंपनियों में भी चर्चा चल रही है कि भविष्य में इंजीनियर्स की भूमिका कैसी होगी और उन्हें किन नई क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग एआई टूल्स को अपनाने में पीछे रह जाएंगे, वे प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं, जो इंजीनियर्स इन बदलावों के साथ खुद को ढाल लेंगे, उनके लिए और भी अवसर बढ़ सकते हैं।
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6 महीने में बदली कोडिंग दुनिया, पीछे छूट रहे पुराने ढर्रे वाले इंजीनियर: बोले- पूर्व गूगल CEO
नेशनल डेस्क
हाल के महीनों में टेक जगत में जो हो रहा है, उसे लेकर काफी बातें हो रही हैं। पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट ने हाल ही में एक यूट्यूब बातचीत में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की प्रक्रिया में तेजी से बदलाव ला दिया है। उनका मानना है कि पिछले छह महीनों में जो बदलाव आया है, वो पिछले कई सालों में भी नहीं देखा गया। इसका सीधा असर सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के काम करने के तरीके पर पड़ा है, खासकर उन पर जो अभी भी पुराने तरीके से कोड लिख रहे हैं।
एरिक श्मिट ने बातचीत में अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि जब वो 20 साल के थे, तब खुद कोड लिखना उनके लिए बड़ी बात थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उनका कहना है कि आज एआई सिस्टम ने कोडिंग को इतना आसान और तेज बना दिया है कि पुराने तरीके से काम करना अब पीछे छूटता जा रहा है। उनके मुताबिक, कई कंपनियों को अब यह सवाल करना चाहिए कि आखिर टीम अभी भी उसी पुराने तरीके से कोड क्यों लिख रही है, जब तकनीक इसी तरह आगे बढ़ चुकी है।
टेक इंडस्ट्री में इस बदलाव को लेकर अलग-अलग राय हैं, लेकिन श्मिट का कहना है कि एआई का असर केवल एक सहायक टूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काम करने की पूरी प्रक्रिया को बदल रहा है। उनकी रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई की मदद से अब वही काम, जो पहले कई इंजीनियर्स मिलकर करते थे, वो अब बहुत कम समय में हो सकता है। यहां तक कि एक अकेला डेवलपर भी एआई टूल्स की सहायता से बड़े और जटिल ऐप्स बना सकता है। श्मिट का ये भी कहना है कि यह बदलाव अचानक ही तेजी से आया है, जिसकी शुरुआत पिछले साल से मानी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई की क्षमता देखकर वे खुद कई बार आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक न केवल काम को आसान बना रही है, बल्कि सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल रही है। इस बीच, टेक कंपनियों में भी चर्चा चल रही है कि भविष्य में इंजीनियर्स की भूमिका कैसी होगी और उन्हें किन नई क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग एआई टूल्स को अपनाने में पीछे रह जाएंगे, वे प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ सकते हैं। वहीं, जो इंजीनियर्स इन बदलावों के साथ खुद को ढाल लेंगे, उनके लिए और भी अवसर बढ़ सकते हैं।
