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है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: वरुण धवन का धमाकेदार कॉमेडी शो, फुल कन्फ्यूजन और क्लासिक डेविड धवन एंटरटेनमेंट
Bollywood news
कुछ फिल्में दिमाग लगाने के लिए होती हैं… और कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो आपको हँसाते-हँसाते गालों में दर्द कर दें। है जवानी तो इश्क होना है पूरी शान से दूसरी वाली कैटेगरी में आती है। डेविड धवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म गलतफहमियों, बड़े-बड़े किरदारों, प्यार, फैमिली ड्रामा और नॉन-स्टॉप कॉमेडी से भरपूर है। यह क्लासिक बॉलीवुड एंटरटेनर का फॉर्मूला अपनाती है और जो वादा करती है, उसे पूरी तरह निभाती है।
डेविड धवन की कहानी, यूनुस सजावल का स्क्रीनप्ले और फरहाद सामजी के डायलॉग्स मिलकर फिल्म को एक तेज-तर्रार और बेझिझक कॉमिक टोन देते हैं।
कहानी
फिल्म के केंद्र में है जैस — एक प्यारा लेकिन थोड़ा जल्दबाज़ इंसान, जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उसके रिश्ते, पारिवारिक उम्मीदें और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं एक साथ टकरा जाती हैं।
बिना ज्यादा खुलासा किए, कहानी जैस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी अलग रह रही पत्नी बानी और उसकी जिंदगी में अचानक आई प्रीत के बीच फंस जाता है। जो शुरुआत में एक रिलेशनशिप ड्रामा लगता है, वह धीरे-धीरे एक कॉमेडी ऑफ एरर्स में बदल जाता है, जहां गलतफहमियों, राज़ और मजेदार परिस्थितियों की लंबी कड़ी बनती चली जाती है।
फिल्म लगातार जैस को एक परेशानी से दूसरी में धकेलती रहती है, जिससे एक पल के लिए भी बोरियत नहीं होती। कहानी थोड़ी अविश्वसनीय जरूर है, लेकिन फिल्म अपने पागलपन को पूरी ईमानदारी से निभाती है।
अभिनय
जैस के किरदार में वरुण धवन पूरी तरह छा जाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जबरदस्त ऊर्जा और सहज स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूती से संभालती है। वह डेविड धवन की कॉमेडी स्टाइल को अच्छी तरह समझते हैं और उसी हिसाब से शानदार प्रदर्शन देते हैं।
मृणाल ठाकुर बानी के रूप में फिल्म में भावनात्मक गहराई लाती हैं। वह अपने किरदार को जमीन से जोड़े रखती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है।
पूजा हेगड़े प्रीत के किरदार में स्क्रीन पर ताजगी लेकर आती हैं। उनका आत्मविश्वास, ग्लैमर और एनर्जी फिल्म को और रोचक बनाते हैं।
सपोर्टिंग कास्ट भी मजबूत है — मनीष पॉल कई सीन में हंसी के ठहाके लगवाते हैं। जिमी शेरगिल, चंकी पांडे, कुब्रा सैत, राकेश बेदी और मौनी रॉय सभी अपने-अपने अंदाज में फिल्म में रंग भरते हैं।
डायलॉग्स और ह्यूमर
फरहाद सामजी के डायलॉग्स फिल्म की जान हैं। पंचलाइन सही जगह पर बैठती हैं, सिचुएशनल कॉमेडी असरदार है और कई वन-लाइनर्स थिएटर में तालियां बटोर सकते हैं।
फिल्म पुराने बॉलीवुड कॉमेडी स्टाइल को नए दौर के दर्शकों के हिसाब से पेश करती है, जिससे यह जानी-पहचानी होने के बावजूद ताज़ा महसूस होती है।
संगीत और तकनीकी पहलू
फिल्म का संगीत इसके एनर्जेटिक मूड को सपोर्ट करता है। रंग-बिरंगे विजुअल्स और प्रोडक्शन डिजाइन इसे फेस्टिव फील देते हैं। डेविड धवन फिल्म की रफ्तार को तेज रखते हैं, जिससे कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती।
कहां थोड़ी कमी रह गई
कुछ कॉमेडी सीन थोड़ा लंबे लगते हैं और कुछ जगहों पर दर्शकों को लॉजिक को नजरअंदाज करना पड़ता है। हालांकि, यह छोटी कमियां हैं क्योंकि फिल्म का मकसद केवल मनोरंजन करना है।
अंतिम निष्कर्ष
है जवानी तो इश्क होना है एक क्लासिक डेविड धवन एंटरटेनर है, जो कन्फ्यूजन, कॉमेडी और कैओस को पूरी तरह अपनाता है। वरुण धवन की जबरदस्त एनर्जी, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े का अच्छा साथ और कई मजेदार पलों के साथ यह फिल्म एक शानदार थिएटर अनुभव देती है।
अगर आप लॉजिक ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप हंसी, मस्ती और भरपूर बॉलीवुड मसाले के मूड में हैं, तो यह फिल्म आपको खूब पसंद आएगी।
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है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: वरुण धवन का धमाकेदार कॉमेडी शो, फुल कन्फ्यूजन और क्लासिक डेविड धवन एंटरटेनमेंट
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कुछ फिल्में दिमाग लगाने के लिए होती हैं… और कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो आपको हँसाते-हँसाते गालों में दर्द कर दें। है जवानी तो इश्क होना है पूरी शान से दूसरी वाली कैटेगरी में आती है। डेविड धवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म गलतफहमियों, बड़े-बड़े किरदारों, प्यार, फैमिली ड्रामा और नॉन-स्टॉप कॉमेडी से भरपूर है। यह क्लासिक बॉलीवुड एंटरटेनर का फॉर्मूला अपनाती है और जो वादा करती है, उसे पूरी तरह निभाती है।
डेविड धवन की कहानी, यूनुस सजावल का स्क्रीनप्ले और फरहाद सामजी के डायलॉग्स मिलकर फिल्म को एक तेज-तर्रार और बेझिझक कॉमिक टोन देते हैं।
कहानी
फिल्म के केंद्र में है जैस — एक प्यारा लेकिन थोड़ा जल्दबाज़ इंसान, जिसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उसके रिश्ते, पारिवारिक उम्मीदें और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं एक साथ टकरा जाती हैं।
बिना ज्यादा खुलासा किए, कहानी जैस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी अलग रह रही पत्नी बानी और उसकी जिंदगी में अचानक आई प्रीत के बीच फंस जाता है। जो शुरुआत में एक रिलेशनशिप ड्रामा लगता है, वह धीरे-धीरे एक कॉमेडी ऑफ एरर्स में बदल जाता है, जहां गलतफहमियों, राज़ और मजेदार परिस्थितियों की लंबी कड़ी बनती चली जाती है।
फिल्म लगातार जैस को एक परेशानी से दूसरी में धकेलती रहती है, जिससे एक पल के लिए भी बोरियत नहीं होती। कहानी थोड़ी अविश्वसनीय जरूर है, लेकिन फिल्म अपने पागलपन को पूरी ईमानदारी से निभाती है।
अभिनय
जैस के किरदार में वरुण धवन पूरी तरह छा जाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जबरदस्त ऊर्जा और सहज स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूती से संभालती है। वह डेविड धवन की कॉमेडी स्टाइल को अच्छी तरह समझते हैं और उसी हिसाब से शानदार प्रदर्शन देते हैं।
मृणाल ठाकुर बानी के रूप में फिल्म में भावनात्मक गहराई लाती हैं। वह अपने किरदार को जमीन से जोड़े रखती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है।
पूजा हेगड़े प्रीत के किरदार में स्क्रीन पर ताजगी लेकर आती हैं। उनका आत्मविश्वास, ग्लैमर और एनर्जी फिल्म को और रोचक बनाते हैं।
सपोर्टिंग कास्ट भी मजबूत है — मनीष पॉल कई सीन में हंसी के ठहाके लगवाते हैं। जिमी शेरगिल, चंकी पांडे, कुब्रा सैत, राकेश बेदी और मौनी रॉय सभी अपने-अपने अंदाज में फिल्म में रंग भरते हैं।
डायलॉग्स और ह्यूमर
फरहाद सामजी के डायलॉग्स फिल्म की जान हैं। पंचलाइन सही जगह पर बैठती हैं, सिचुएशनल कॉमेडी असरदार है और कई वन-लाइनर्स थिएटर में तालियां बटोर सकते हैं।
फिल्म पुराने बॉलीवुड कॉमेडी स्टाइल को नए दौर के दर्शकों के हिसाब से पेश करती है, जिससे यह जानी-पहचानी होने के बावजूद ताज़ा महसूस होती है।
संगीत और तकनीकी पहलू
फिल्म का संगीत इसके एनर्जेटिक मूड को सपोर्ट करता है। रंग-बिरंगे विजुअल्स और प्रोडक्शन डिजाइन इसे फेस्टिव फील देते हैं। डेविड धवन फिल्म की रफ्तार को तेज रखते हैं, जिससे कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती।
कहां थोड़ी कमी रह गई
कुछ कॉमेडी सीन थोड़ा लंबे लगते हैं और कुछ जगहों पर दर्शकों को लॉजिक को नजरअंदाज करना पड़ता है। हालांकि, यह छोटी कमियां हैं क्योंकि फिल्म का मकसद केवल मनोरंजन करना है।
अंतिम निष्कर्ष
है जवानी तो इश्क होना है एक क्लासिक डेविड धवन एंटरटेनर है, जो कन्फ्यूजन, कॉमेडी और कैओस को पूरी तरह अपनाता है। वरुण धवन की जबरदस्त एनर्जी, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े का अच्छा साथ और कई मजेदार पलों के साथ यह फिल्म एक शानदार थिएटर अनुभव देती है।
अगर आप लॉजिक ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप हंसी, मस्ती और भरपूर बॉलीवुड मसाले के मूड में हैं, तो यह फिल्म आपको खूब पसंद आएगी।
