- Hindi News
- देश विदेश
- कैसे तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू भारत की पर्वतीय सुरक्षा को दे रहा है नई पहचान
कैसे तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू भारत की पर्वतीय सुरक्षा को दे रहा है नई पहचान
Digital Desk
भारत के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में हर साल हिमस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई सैनिकों और नागरिकों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में राहत एवं बचाव कार्य केवल साहस नहीं, बल्कि विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी विशेषज्ञता की भी मांग करता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए स्थापित किया गया तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू (TMR), जो भारत का पहला पेशेवर पर्वतीय एवं हिमस्खलन बचाव संगठन है। TMR के संस्थापक हेमंत सचदेव ने नागरिक विशेषज्ञता और सैन्य क्षमताओं के समन्वय से एक ऐसी संस्था खड़ी की है, जिसने सैकड़ों लोगों की जान बचाने के साथ-साथ भारत की पर्वतीय आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को नई दिशा दी है। TMR आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से पर्वतीय सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू फाउंडेशन की स्थापना के पीछे क्या प्रेरणा रही और आप किस समस्या को हल करना चाहते थे?
हमारी प्रेरणा उन सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा थी जो ऊँचे पर्वतीय और हिमस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में रहते हैं। हमने देखा कि भारत में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए कोई पेशेवर संस्था नहीं थी। इसी कमी को दूर करने और जीवन बचाने के लिए हमने TMR की स्थापना की।
एक सामान्य रेस्क्यू ऑपरेशन आपके लिए कैसा होता है - डिस्ट्रेस कॉल मिलने से लेकर मिशन पूरा होने तक?
डिस्ट्रेस कॉल मिलते ही हमारी टीम स्थिति का आकलन करती है - मौसम, भू-भाग और खतरे का स्तर। फिर हम उपकरणों और प्रशिक्षित पर्वतारोहियों के साथ मौके पर पहुँचते हैं। बचाव कार्य में दबे हुए लोगों को निकालना, प्राथमिक चिकित्सा देना और सुरक्षित स्थान तक पहुँचाना शामिल होता है। मिशन पूरा होने के बाद हम रिपोर्ट तैयार करते हैं और सुधार बिंदुओं पर चर्चा करते हैं।
क्या आप अपने किसी सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू मिशन के बारे में साझा कर सकते हैं?
सबसे कठिन मिशन वह था जब एक ही हिमस्खलन में दर्जनों सैनिक दब गए थे। मौसम बेहद खराब था और दृश्यता लगभग शून्य थी। हमारी टीम ने लगातार कई घंटों तक काम किया और कई सैनिकों की जान बचाई। उस अनुभव ने हमें सिखाया कि धैर्य और टीमवर्क ही सबसे बड़ी ताकत है।
आपकी टीम को हाई-रिस्क माउंटेन ऑपरेशन्स के लिए किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है?
हमारी टीम को हिमस्खलन पूर्वानुमान, जोखिम आकलन, बर्फ़ और ग्लेशियर नेविगेशन, रेस्क्यू उपकरणों का उपयोग, उच्च ऊँचाई पर चिकित्सा और मानसिक दृढ़ता जैसी ट्रेनिंग दी जाती है। यह प्रशिक्षण उन्हें हर परिस्थिति में तैयार रखता है।
आपके अनुसार ट्रेकर्स और माउंटेनियर्स द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी सुरक्षा गलतियाँ क्या हैं?
सबसे बड़ी गलतियाँ हैं - मौसम को हल्के में लेना, पर्याप्त उपकरण न ले जाना, बिना प्रशिक्षित गाइड के ऊँचाई पर जाना, ऑक्सीजन की चुनौतियों को नज़रअंदाज़ करना और आपातकालीन योजना का अभाव।
आने वाले 3–5 वर्षों के लिए आपके प्रमुख लक्ष्य और विस्तार की योजनाएँ क्या हैं?
हम अधिक पर्वतीय क्षेत्रों में रेस्क्यू बेस स्थापित करना चाहते हैं, सेना और NDRF के साथ संयुक्त प्रशिक्षण को व्यापक बनाना, नागरिकों के लिए सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाना, अत्याधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन और सेंसर को शामिल करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना चाहते हैं ताकि भारत की पर्वतीय आपदा प्रतिक्रिया क्षमता विश्वस्तरीय बने।
यह स्पष्ट हुआ कि तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू केवल एक बचाव संस्था नहीं, बल्कि भारत की पर्वतीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हेमंत सचदेव और उनकी टीम आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और समर्पित सेवा भावना के माध्यम से उन क्षेत्रों में सुरक्षा की नई उम्मीद बनकर उभरे हैं, जहाँ हर कदम पर प्रकृति की चुनौती मौजूद रहती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
कैसे तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू भारत की पर्वतीय सुरक्षा को दे रहा है नई पहचान
Digital Desk
भारत के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में हर साल हिमस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई सैनिकों और नागरिकों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में राहत एवं बचाव कार्य केवल साहस नहीं, बल्कि विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी विशेषज्ञता की भी मांग करता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए स्थापित किया गया तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू (TMR), जो भारत का पहला पेशेवर पर्वतीय एवं हिमस्खलन बचाव संगठन है। TMR के संस्थापक हेमंत सचदेव ने नागरिक विशेषज्ञता और सैन्य क्षमताओं के समन्वय से एक ऐसी संस्था खड़ी की है, जिसने सैकड़ों लोगों की जान बचाने के साथ-साथ भारत की पर्वतीय आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को नई दिशा दी है। TMR आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से पर्वतीय सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू फाउंडेशन की स्थापना के पीछे क्या प्रेरणा रही और आप किस समस्या को हल करना चाहते थे?
हमारी प्रेरणा उन सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा थी जो ऊँचे पर्वतीय और हिमस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में रहते हैं। हमने देखा कि भारत में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए कोई पेशेवर संस्था नहीं थी। इसी कमी को दूर करने और जीवन बचाने के लिए हमने TMR की स्थापना की।
एक सामान्य रेस्क्यू ऑपरेशन आपके लिए कैसा होता है - डिस्ट्रेस कॉल मिलने से लेकर मिशन पूरा होने तक?
डिस्ट्रेस कॉल मिलते ही हमारी टीम स्थिति का आकलन करती है - मौसम, भू-भाग और खतरे का स्तर। फिर हम उपकरणों और प्रशिक्षित पर्वतारोहियों के साथ मौके पर पहुँचते हैं। बचाव कार्य में दबे हुए लोगों को निकालना, प्राथमिक चिकित्सा देना और सुरक्षित स्थान तक पहुँचाना शामिल होता है। मिशन पूरा होने के बाद हम रिपोर्ट तैयार करते हैं और सुधार बिंदुओं पर चर्चा करते हैं।
क्या आप अपने किसी सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू मिशन के बारे में साझा कर सकते हैं?
सबसे कठिन मिशन वह था जब एक ही हिमस्खलन में दर्जनों सैनिक दब गए थे। मौसम बेहद खराब था और दृश्यता लगभग शून्य थी। हमारी टीम ने लगातार कई घंटों तक काम किया और कई सैनिकों की जान बचाई। उस अनुभव ने हमें सिखाया कि धैर्य और टीमवर्क ही सबसे बड़ी ताकत है।
आपकी टीम को हाई-रिस्क माउंटेन ऑपरेशन्स के लिए किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है?
हमारी टीम को हिमस्खलन पूर्वानुमान, जोखिम आकलन, बर्फ़ और ग्लेशियर नेविगेशन, रेस्क्यू उपकरणों का उपयोग, उच्च ऊँचाई पर चिकित्सा और मानसिक दृढ़ता जैसी ट्रेनिंग दी जाती है। यह प्रशिक्षण उन्हें हर परिस्थिति में तैयार रखता है।
आपके अनुसार ट्रेकर्स और माउंटेनियर्स द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी सुरक्षा गलतियाँ क्या हैं?
सबसे बड़ी गलतियाँ हैं - मौसम को हल्के में लेना, पर्याप्त उपकरण न ले जाना, बिना प्रशिक्षित गाइड के ऊँचाई पर जाना, ऑक्सीजन की चुनौतियों को नज़रअंदाज़ करना और आपातकालीन योजना का अभाव।
आने वाले 3–5 वर्षों के लिए आपके प्रमुख लक्ष्य और विस्तार की योजनाएँ क्या हैं?
हम अधिक पर्वतीय क्षेत्रों में रेस्क्यू बेस स्थापित करना चाहते हैं, सेना और NDRF के साथ संयुक्त प्रशिक्षण को व्यापक बनाना, नागरिकों के लिए सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाना, अत्याधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन और सेंसर को शामिल करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना चाहते हैं ताकि भारत की पर्वतीय आपदा प्रतिक्रिया क्षमता विश्वस्तरीय बने।
यह स्पष्ट हुआ कि तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू केवल एक बचाव संस्था नहीं, बल्कि भारत की पर्वतीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हेमंत सचदेव और उनकी टीम आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और समर्पित सेवा भावना के माध्यम से उन क्षेत्रों में सुरक्षा की नई उम्मीद बनकर उभरे हैं, जहाँ हर कदम पर प्रकृति की चुनौती मौजूद रहती है।
