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हरियाणवी लोक कलाकार पेप्सी शर्मा का निधन, 38 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
बालीवुड डेस्क
सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया था। हरियाणवी रागिनी जगत के लोकप्रिय कलाकार पेप्सी शर्मा के निधन से संगीत और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है।
हरियाणवी लोक संगीत और रागिनी जगत से सोमवार को एक दुखद खबर सामने आई। लोकप्रिय लोक कलाकार और रागिनी गायक पेप्सी शर्मा का 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के लोक संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के अनुसार उन्हें अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके परिवार में पत्नी, 10 वर्षीय बेटी और 7 वर्षीय बेटा हैं।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रविवार सुबह ही पेप्सी शर्मा अपने पैतृक गांव पतला पहुंचे थे। गांव पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी मां से मुलाकात की और कुछ समय परिवार के साथ बिताया। बाद में वह अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे, तभी उन्हें सीने और शरीर में दर्द महसूस हुआ। शुरुआत में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दवा देकर घर भेज दिया। बताया जा रहा है कि कुछ देर बाद दर्द फिर बढ़ गया। इसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
पेप्सी शर्मा का असली नाम यशपाल शर्मा था। हालांकि मंच और संगीत की दुनिया में वह पेप्सी शर्मा के नाम से ही पहचाने जाते थे। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के पतला गांव में जन्मे यशपाल ने अपनी पहचान हरियाणवी लोक संगीत के जरिए बनाई। उन्होंने हरियाणा की रागिनी परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी अनूठी शैली के कारण लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय बने।
उनकी पहचान केवल एक गायक के रूप में नहीं थी। मंच पर उनका अंदाज, कॉमिक टाइमिंग और दर्शकों से जुड़ने की कला उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। रागिनी कार्यक्रमों में जब वह मंच पर आते थे तो दर्शक देर रात तक उनकी प्रस्तुति का इंतजार करते थे। उनकी गायकी के साथ-साथ उनका हास्य और बातचीत का तरीका भी लोगों को खूब पसंद आता था।
हरियाणवी डांसर और गायिका सपना चौधरी के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से चर्चित रही। दोनों ने कई बड़े मंचों पर एक साथ प्रस्तुति दी। एक कार्यक्रम में किए गए नागिन डांस ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई थी। इस प्रस्तुति का वीडियो बाद में एक म्यूजिक कंपनी द्वारा जारी किया गया था, जिसे करोड़ों बार देखा गया। यह वीडियो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक चर्चा में रहा। कई लोगों का मानना है कि इसी प्रस्तुति ने पेप्सी शर्मा को युवा दर्शकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बना दिया।
पेप्सी शर्मा ने हरियाणवी गायिका राजबाला के साथ भी कई सफल मंचीय कार्यक्रम किए। उनकी रागिनियां गांवों, कस्बों और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में खूब पसंद की जाती थीं। हरियाणा में आयोजित होने वाले रागिनी प्रतियोगिताओं और गोशालाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी। वे अपनी दमदार आवाज और लोक शैली की प्रस्तुति के कारण दर्शकों की पहली पसंद बने हुए थे।
परिवार के अनुसार पेप्सी शर्मा को बचपन से ही गायन का शौक था। हालांकि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में घरवालों को इसकी जानकारी नहीं दी थी। करीब दो दशक पहले उन्होंने मंचीय कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया। जब उनका एक कार्यक्रम पहली बार टेलीविजन पर प्रसारित हुआ, तब परिवार के लोगों को उनकी गायकी के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे हरियाणवी लोक संगीत के लोकप्रिय कलाकारों में शामिल हो गए।
उनके नाम के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प बताई जाती है। परिवार के अनुसार बचपन में उन्हें प्यार से "पैप्पी" कहा जाता था। बाद में एक अदालत में सुनवाई के दौरान एक जज ने मजाकिया अंदाज में उन्हें "पेप्सी" कह दिया। इसके बाद उन्होंने यही नाम अपना लिया और आगे चलकर पूरे हरियाणा में पेप्सी शर्मा के नाम से प्रसिद्ध हो गए। पेप्सी शर्मा ने कई लोकप्रिय मंचीय प्रस्तुतियां दीं, लेकिन "पतला दुपट्टा तेरा मुंह दिख्यै" रागिनी ने उन्हें खास पहचान दिलाई। इस गीत और उससे जुड़े मंचीय कार्यक्रमों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। सपना चौधरी ने भी इस रागिनी पर कई बार प्रस्तुति दी, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी। उनके कई वीडियो आज भी सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों द्वारा देखे जाते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई। टीवी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी प्रस्तुतियों को सराहा गया। अपनी सादगी, लोक संस्कृति के प्रति समर्पण और दर्शकों से जुड़ाव की वजह से उन्होंने एक अलग स्थान बनाया। पेप्सी शर्मा के निधन के बाद हरियाणवी संगीत जगत के कई कलाकारों और प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया है। उनके जाने से लोक संगीत की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। उनके गीत, रागिनियां और मंचीय प्रस्तुतियां आने वाले समय में भी लोगों की यादों में जीवित रहेंगी।
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हरियाणवी लोक कलाकार पेप्सी शर्मा का निधन, 38 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
बालीवुड डेस्क
हरियाणवी लोक संगीत और रागिनी जगत से सोमवार को एक दुखद खबर सामने आई। लोकप्रिय लोक कलाकार और रागिनी गायक पेप्सी शर्मा का 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के लोक संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के अनुसार उन्हें अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके परिवार में पत्नी, 10 वर्षीय बेटी और 7 वर्षीय बेटा हैं।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रविवार सुबह ही पेप्सी शर्मा अपने पैतृक गांव पतला पहुंचे थे। गांव पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी मां से मुलाकात की और कुछ समय परिवार के साथ बिताया। बाद में वह अपने दोस्तों के साथ बैठे हुए थे, तभी उन्हें सीने और शरीर में दर्द महसूस हुआ। शुरुआत में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दवा देकर घर भेज दिया। बताया जा रहा है कि कुछ देर बाद दर्द फिर बढ़ गया। इसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
पेप्सी शर्मा का असली नाम यशपाल शर्मा था। हालांकि मंच और संगीत की दुनिया में वह पेप्सी शर्मा के नाम से ही पहचाने जाते थे। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के पतला गांव में जन्मे यशपाल ने अपनी पहचान हरियाणवी लोक संगीत के जरिए बनाई। उन्होंने हरियाणा की रागिनी परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी अनूठी शैली के कारण लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय बने।
उनकी पहचान केवल एक गायक के रूप में नहीं थी। मंच पर उनका अंदाज, कॉमिक टाइमिंग और दर्शकों से जुड़ने की कला उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। रागिनी कार्यक्रमों में जब वह मंच पर आते थे तो दर्शक देर रात तक उनकी प्रस्तुति का इंतजार करते थे। उनकी गायकी के साथ-साथ उनका हास्य और बातचीत का तरीका भी लोगों को खूब पसंद आता था।
हरियाणवी डांसर और गायिका सपना चौधरी के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से चर्चित रही। दोनों ने कई बड़े मंचों पर एक साथ प्रस्तुति दी। एक कार्यक्रम में किए गए नागिन डांस ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई थी। इस प्रस्तुति का वीडियो बाद में एक म्यूजिक कंपनी द्वारा जारी किया गया था, जिसे करोड़ों बार देखा गया। यह वीडियो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक चर्चा में रहा। कई लोगों का मानना है कि इसी प्रस्तुति ने पेप्सी शर्मा को युवा दर्शकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बना दिया।
पेप्सी शर्मा ने हरियाणवी गायिका राजबाला के साथ भी कई सफल मंचीय कार्यक्रम किए। उनकी रागिनियां गांवों, कस्बों और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में खूब पसंद की जाती थीं। हरियाणा में आयोजित होने वाले रागिनी प्रतियोगिताओं और गोशालाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी। वे अपनी दमदार आवाज और लोक शैली की प्रस्तुति के कारण दर्शकों की पहली पसंद बने हुए थे।
परिवार के अनुसार पेप्सी शर्मा को बचपन से ही गायन का शौक था। हालांकि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में घरवालों को इसकी जानकारी नहीं दी थी। करीब दो दशक पहले उन्होंने मंचीय कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया। जब उनका एक कार्यक्रम पहली बार टेलीविजन पर प्रसारित हुआ, तब परिवार के लोगों को उनकी गायकी के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे हरियाणवी लोक संगीत के लोकप्रिय कलाकारों में शामिल हो गए।
उनके नाम के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प बताई जाती है। परिवार के अनुसार बचपन में उन्हें प्यार से "पैप्पी" कहा जाता था। बाद में एक अदालत में सुनवाई के दौरान एक जज ने मजाकिया अंदाज में उन्हें "पेप्सी" कह दिया। इसके बाद उन्होंने यही नाम अपना लिया और आगे चलकर पूरे हरियाणा में पेप्सी शर्मा के नाम से प्रसिद्ध हो गए। पेप्सी शर्मा ने कई लोकप्रिय मंचीय प्रस्तुतियां दीं, लेकिन "पतला दुपट्टा तेरा मुंह दिख्यै" रागिनी ने उन्हें खास पहचान दिलाई। इस गीत और उससे जुड़े मंचीय कार्यक्रमों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। सपना चौधरी ने भी इस रागिनी पर कई बार प्रस्तुति दी, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी। उनके कई वीडियो आज भी सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों द्वारा देखे जाते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई। टीवी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी प्रस्तुतियों को सराहा गया। अपनी सादगी, लोक संस्कृति के प्रति समर्पण और दर्शकों से जुड़ाव की वजह से उन्होंने एक अलग स्थान बनाया। पेप्सी शर्मा के निधन के बाद हरियाणवी संगीत जगत के कई कलाकारों और प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया है। उनके जाने से लोक संगीत की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। उनके गीत, रागिनियां और मंचीय प्रस्तुतियां आने वाले समय में भी लोगों की यादों में जीवित रहेंगी।
