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दो साल बाद जुटे INDIA ब्लॉक के नेता, एकजुटता पर जोर
Digital Desk
दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की सातवीं बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता शामिल; शरद पवार ने कहा- सभी दलों को साथ रखना जरूरी
दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की सातवीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए। करीब दो साल बाद आयोजित इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और एनसीपी-एससीपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वास्थ्य और अन्य कारणों से ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।
बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चर्चा चल रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी गठबंधन की यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, संसद के आगामी सत्र और विपक्षी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई गई। कांग्रेस ने दावा किया कि बैठक में 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक शुरू होने से पहले नेताओं के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक-दूसरे से मिलते हुए गले लगीं, जबकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे आपसी बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। इन तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
INDIA ब्लॉक की पिछली बड़ी बैठक जून 2024 में हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक गठबंधन के शीर्ष नेता एक साथ किसी बड़े मंच पर दिखाई नहीं दिए थे। ऐसे में दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन को कई झटके भी लगे हैं। गठबंधन से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय दल अलग हुए और कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच स्थानीय स्तर पर मतभेद भी सामने आए। इसके बावजूद नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक है।
बैठक के बीच महाराष्ट्र से एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार का बयान भी चर्चा में रहा। बारामती में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में INDIA ब्लॉक के सभी दलों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके इस बयान को विपक्षी गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति के लिए विपक्षी दलों का साथ रहना जरूरी होगा।
इधर बैठक के दिन राजधानी दिल्ली में एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। अकबर रोड क्षेत्र में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ कुछ पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ आलोचनात्मक टिप्पणियां लिखी गई थीं। कुछ पोस्टरों में शरद पवार की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति द्वारा लगाए गए थे।
दोपहर होते-होते यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और इन पोस्टरों को हटा दिया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों को फाड़ते हुए विरोध जताया और कहा कि विपक्षी एकता को कमजोर करने के लिए इस तरह की कोशिशें की जा रही हैं। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां राजनीतिक नारेबाजी भी देखने को मिली। हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
INDIA ब्लॉक की यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। संसद के आगामी सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, संघीय ढांचे और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी दलों के बीच समन्वय पर विचार हो सकता है।
बैठक में शामिल नेताओं की संख्या और प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया है कि विपक्षी दल अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि गठबंधन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कई राज्यों में दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भविष्य में परीक्षा बन सकते हैं। इसके बावजूद सोमवार की बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष अभी भी एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।
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दो साल बाद जुटे INDIA ब्लॉक के नेता, एकजुटता पर जोर
Digital Desk
दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की सातवीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए। करीब दो साल बाद आयोजित इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और एनसीपी-एससीपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वास्थ्य और अन्य कारणों से ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।
बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चर्चा चल रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी गठबंधन की यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, संसद के आगामी सत्र और विपक्षी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई गई। कांग्रेस ने दावा किया कि बैठक में 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक शुरू होने से पहले नेताओं के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक-दूसरे से मिलते हुए गले लगीं, जबकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे आपसी बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। इन तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
INDIA ब्लॉक की पिछली बड़ी बैठक जून 2024 में हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक गठबंधन के शीर्ष नेता एक साथ किसी बड़े मंच पर दिखाई नहीं दिए थे। ऐसे में दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन को कई झटके भी लगे हैं। गठबंधन से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय दल अलग हुए और कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच स्थानीय स्तर पर मतभेद भी सामने आए। इसके बावजूद नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक है।
बैठक के बीच महाराष्ट्र से एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार का बयान भी चर्चा में रहा। बारामती में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में INDIA ब्लॉक के सभी दलों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके इस बयान को विपक्षी गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति के लिए विपक्षी दलों का साथ रहना जरूरी होगा।
इधर बैठक के दिन राजधानी दिल्ली में एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। अकबर रोड क्षेत्र में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ कुछ पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ आलोचनात्मक टिप्पणियां लिखी गई थीं। कुछ पोस्टरों में शरद पवार की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति द्वारा लगाए गए थे।
दोपहर होते-होते यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और इन पोस्टरों को हटा दिया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों को फाड़ते हुए विरोध जताया और कहा कि विपक्षी एकता को कमजोर करने के लिए इस तरह की कोशिशें की जा रही हैं। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां राजनीतिक नारेबाजी भी देखने को मिली। हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
INDIA ब्लॉक की यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। संसद के आगामी सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, संघीय ढांचे और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी दलों के बीच समन्वय पर विचार हो सकता है।
बैठक में शामिल नेताओं की संख्या और प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया है कि विपक्षी दल अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि गठबंधन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कई राज्यों में दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भविष्य में परीक्षा बन सकते हैं। इसके बावजूद सोमवार की बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष अभी भी एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।
