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ईरान-इजराइल संघर्ष फिर भड़का, होर्मुज में 24 भारतीय नाविक फंसे
Digital Desk
दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद फिर शुरू हुई सैन्य कार्रवाई, मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव; भारतीय नाविकों ने वीडियो जारी कर मदद की अपील की
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के करीब दो महीने बाद ईरान और इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू हो गया है। रविवार देर रात ईरान ने इजराइल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर संभावित बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान के वास्तविक आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय नाविकों को लेकर बढ़ गई है। ओमान के तट के पास एक जहाज पर हमले की खबर सामने आने के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने दावा किया है कि जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं। संगठन के मुताबिक नाविकों ने वीडियो संदेश जारी कर तत्काल सहायता की मांग की है। बताया जा रहा है कि जहाज ऐसे क्षेत्र में मौजूद है जहां हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा खतरे लगातार बढ़े हैं। हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मामले पर नजर रखी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजारों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।
संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान, इराक और सीरिया ने अपने हवाई क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान ने अपने पश्चिमी हिस्से का एयरस्पेस अगली सूचना तक बंद कर दिया है। इराक ने 72 घंटे और सीरिया ने 12 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ने की संभावना है। कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदलने शुरू कर दिए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे दो ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया है। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।
ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के बार-बार बदलते रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार और विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग दोहराई है। राजनीतिक और सैन्य तनाव एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ रही हैं।
बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां मौजूद भारतीयों को स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है, खासकर उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जो क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
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ईरान-इजराइल संघर्ष फिर भड़का, होर्मुज में 24 भारतीय नाविक फंसे
Digital Desk
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के करीब दो महीने बाद ईरान और इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू हो गया है। रविवार देर रात ईरान ने इजराइल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर संभावित बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दूसरी ओर इजराइल ने दावा किया है कि उसके हमले केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान के वास्तविक आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय नाविकों को लेकर बढ़ गई है। ओमान के तट के पास एक जहाज पर हमले की खबर सामने आने के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने दावा किया है कि जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं। संगठन के मुताबिक नाविकों ने वीडियो संदेश जारी कर तत्काल सहायता की मांग की है। बताया जा रहा है कि जहाज ऐसे क्षेत्र में मौजूद है जहां हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और सुरक्षा खतरे लगातार बढ़े हैं। हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन मामले पर नजर रखी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजारों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।
संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान, इराक और सीरिया ने अपने हवाई क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान ने अपने पश्चिमी हिस्से का एयरस्पेस अगली सूचना तक बंद कर दिया है। इराक ने 72 घंटे और सीरिया ने 12 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्षेत्रीय हवाई यातायात पर असर पड़ने की संभावना है। कई एयरलाइंस ने अपने रूट बदलने शुरू कर दिए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे दो ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया है। यह लगातार दूसरा दिन है जब अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।
ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका के बार-बार बदलते रुख के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार और विदेशों में फंसी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने की मांग दोहराई है। राजनीतिक और सैन्य तनाव एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ रही हैं।
बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां मौजूद भारतीयों को स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है, खासकर उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जो क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
