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'लॉक अप सीजन 2' विवादों में उलझा, वहीं 'अलायंस' ने रणनीति, स्किल और माइंड गेम्स से बदली गेम की परिभाषा
Digital Desk
ब्रेन v/s ड्रामा: 'अलायंस' ने दिखाया रियलिटी शो का नया अंदाज, 'लॉक अप सीजन 2' है उसी पुराने फॉर्मूले पर अटका,'अलायंस' जाने क्यों है 'लॉक अप सीजन 2' से हर मामले में आगे,'अलायंस' ने क्लास और कॉम्पिटिशन से बदला रियलिटी शो का खेल, 'लॉक अप 2' अब भी है ड्रामे के सहारे,गेमप्ले v/s ड्रामा: 'अलायंस' और 'लॉक अप सीजन 2' की टक्कर में क्या है सबसे बड़ा फर्क?
'अलायंस' ने बदली रियलिटी गेम की परिभाषा, 'लॉक अप सीजन 2' अब भी है पुराने अंदाज पर कायम
इंडियन OTT पर इस समय दो बड़े रियलिटी शोज़ अलायंस और लॉक अप सीजन 2 की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि दोनों रियलिटी कॉम्पिटिशन शोज़ हैं, लेकिन दोनों का अंदाज बिल्कुल अलग है। जैसे-जैसे एपिसोड आगे बढ़ रहे हैं, अलायंस एक फ्रेश गेम-चेंजर के तौर पर उभरकर सामने आ रहा है। ऐसे समय में, जब रियलिटी शोज़ लंबे वक्त से विवादों, ओवर ड्रामे और एक जैसे फॉर्मेट पर चलते आए हैं, अलायंस कुछ नया लेकर आया है।
अलायंस अपनी तरह का पहला सोशल स्ट्रैटेजी गेम है, जहां दिमाग, अलायंस, गेमप्ले और कॉम्पिटिशन ही सबसे अहम हैं। सबसे खास बात यह है कि शो ने बिना किसी लो-लेवल ड्रामे या बेवजह के विवाद का सहारा लिए ही जबरदस्त चर्चा बटोरी है और रियलिटी शोज़ में एक अलग स्टैंडर्ड बनाए रखा है।
सबसे बड़ा फर्क इसके कंटेस्टेंट्स में भी देखने को मिलता है। जहां लॉक अप सीजन 2 में राम कपूर, शिवांगी जोशी, सुनीता आहूजा, आकांक्षा चमोला, रियाज़ अली, योगेश रावत और श्रेया कालरा जैसे टीवी और सोशल मीडिया के चर्चित चेहरे हैं, वहीं अलायंस में अलग-अलग फील्ड्स से आए कई दिलचस्प चेहरे शामिल हैं। अभिनेता और राजनेता रवि किशन, गेमिंग सेंसेशन पायल धरे, टीवी स्टार कुशाल टंडन, अरसलान गोनी, वंशज सिंह और एंटरटेनमेंट जगत की कई लोकप्रिय हस्तियां इस शो का हिस्सा हैं, जिससे हर एपिसोड में गेम और भी ज्यादा अनप्रेडिक्टेबल हो जाता है।
होस्टिंग के मामले में भी दोनों शोज़ काफी अलग हैं। जहां लॉक अप सीजन 2 में फराह खान और रितेश देशमुख उसी पारंपरिक रियलिटी शो होस्टिंग स्टाइल में नजर आते हैं, वहीं अलायंस में कुणाल खेमू बिल्कुल अलग अंदाज में दिखते हैं। वह सिर्फ होस्ट नहीं हैं, बल्कि गेम का एक्टिव हिस्सा बनकर उसे आगे बढ़ाते हैं। उनकी समझदारी, ह्यूमर और तेज़ ऑब्जर्वेशन शो में एक नई स्ट्रैटेजिक लेयर जोड़ते हैं।
लेकिन दोनों शोज़ के बीच सबसे बड़ा फर्क उनकी सोच में नजर आता है। लॉक अप सीजन 2 अब भी उसी फॉर्मूले पर चलता दिखता है, जिसे दर्शक कई बार देख चुके हैं। घर के बाहर के विवादों को शो में लाना, निजी आरोप-प्रत्यारोप, हद से नीचे जाकर बहस करना, अपशब्दों का इस्तेमाल, इमोशनल ब्रेकडाउन और ऐसे झगड़े जो कई बार असली गेम से ज्यादा सुर्खियां बटोर लेते हैं। ऐसे में कई बार गेम पीछे छूट जाता है और ड्रामा आगे निकल जाता है।
वहीं अलायंस पूरी तरह उस चीज़ पर टिका है, जिसका वह वादा करता है—एक गेम। यहां बहस रणनीति, अलायंस, धोखे और परफॉर्मेंस को लेकर होती है। कंटेस्टेंट्स एक-दूसरे की पर्सनल लाइफ नहीं, बल्कि उनके गेमप्ले को चुनौती देते हैं। तीखी बहस के दौरान भी शो अपनी गरिमा बनाए रखता है और खिलाड़ी एक-दूसरे को बेवजह नीचा दिखाने के बजाय गेम में मात देने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि हर एपिसोड दिमाग और रणनीति की असली लड़ाई जैसा महसूस होता है, न कि सिर्फ सुर्खियां बटोरने की कोशिश।
टास्क्स में भी यही फर्क साफ दिखाई देता है। अलायंस में हाई-एनर्जी चैलेंज, लगातार आने वाले नए ट्विस्ट और बदलती रणनीतियां हर बार गेम को नया मोड़ देती हैं। हर एरीना खिलाड़ियों के सामने एक नई चुनौती और नई स्ट्रैटेजी लेकर आता है। वहीं लॉक अप सीजन 2 के टास्क्स कई बार पहले देखे हुए रियलिटी शो फॉर्मेट जैसे महसूस होते हैं।
शायद यही वजह है कि अलायंस एक ताजा बदलाव जैसा लगता है। यह विवादों के पीछे भागने के बजाय अपने गेमप्ले पर भरोसा करता है। जबरदस्ती के ड्रामे की जगह यहां रणनीति खुद रोमांच पैदा करती है। पुराने रियलिटी शो फॉर्मेट को दोहराने के बजाय यह अपना अलग फॉर्मेट बनाने की कोशिश करता है।
अगर यही रफ्तार बनी रही, तो अलायंस भारत के सबसे बड़े गेम-चेंजिंग रियलिटी फॉर्मेट्स में अपनी जगह बना सकता है। यह साबित कर सकता है कि दर्शक सिर्फ विवाद और हंगामे ही नहीं, बल्कि दिमाग, कॉम्पिटिशन और रणनीति में भी उतनी ही दिलचस्पी रखते हैं। जहां लॉक अप सीजन 2 अब भी पुराने फॉर्मूले और लो-लेवल ड्रामे पर खेलता नजर आता है, वहीं अलायंस रियलिटी शोज़ के नियम बदलने की कोशिश करता दिख रहा है।
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'लॉक अप सीजन 2' विवादों में उलझा, वहीं 'अलायंस' ने रणनीति, स्किल और माइंड गेम्स से बदली गेम की परिभाषा
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'अलायंस' ने बदली रियलिटी गेम की परिभाषा, 'लॉक अप सीजन 2' अब भी है पुराने अंदाज पर कायम
इंडियन OTT पर इस समय दो बड़े रियलिटी शोज़ अलायंस और लॉक अप सीजन 2 की टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि दोनों रियलिटी कॉम्पिटिशन शोज़ हैं, लेकिन दोनों का अंदाज बिल्कुल अलग है। जैसे-जैसे एपिसोड आगे बढ़ रहे हैं, अलायंस एक फ्रेश गेम-चेंजर के तौर पर उभरकर सामने आ रहा है। ऐसे समय में, जब रियलिटी शोज़ लंबे वक्त से विवादों, ओवर ड्रामे और एक जैसे फॉर्मेट पर चलते आए हैं, अलायंस कुछ नया लेकर आया है।
अलायंस अपनी तरह का पहला सोशल स्ट्रैटेजी गेम है, जहां दिमाग, अलायंस, गेमप्ले और कॉम्पिटिशन ही सबसे अहम हैं। सबसे खास बात यह है कि शो ने बिना किसी लो-लेवल ड्रामे या बेवजह के विवाद का सहारा लिए ही जबरदस्त चर्चा बटोरी है और रियलिटी शोज़ में एक अलग स्टैंडर्ड बनाए रखा है।
सबसे बड़ा फर्क इसके कंटेस्टेंट्स में भी देखने को मिलता है। जहां लॉक अप सीजन 2 में राम कपूर, शिवांगी जोशी, सुनीता आहूजा, आकांक्षा चमोला, रियाज़ अली, योगेश रावत और श्रेया कालरा जैसे टीवी और सोशल मीडिया के चर्चित चेहरे हैं, वहीं अलायंस में अलग-अलग फील्ड्स से आए कई दिलचस्प चेहरे शामिल हैं। अभिनेता और राजनेता रवि किशन, गेमिंग सेंसेशन पायल धरे, टीवी स्टार कुशाल टंडन, अरसलान गोनी, वंशज सिंह और एंटरटेनमेंट जगत की कई लोकप्रिय हस्तियां इस शो का हिस्सा हैं, जिससे हर एपिसोड में गेम और भी ज्यादा अनप्रेडिक्टेबल हो जाता है।
होस्टिंग के मामले में भी दोनों शोज़ काफी अलग हैं। जहां लॉक अप सीजन 2 में फराह खान और रितेश देशमुख उसी पारंपरिक रियलिटी शो होस्टिंग स्टाइल में नजर आते हैं, वहीं अलायंस में कुणाल खेमू बिल्कुल अलग अंदाज में दिखते हैं। वह सिर्फ होस्ट नहीं हैं, बल्कि गेम का एक्टिव हिस्सा बनकर उसे आगे बढ़ाते हैं। उनकी समझदारी, ह्यूमर और तेज़ ऑब्जर्वेशन शो में एक नई स्ट्रैटेजिक लेयर जोड़ते हैं।
लेकिन दोनों शोज़ के बीच सबसे बड़ा फर्क उनकी सोच में नजर आता है। लॉक अप सीजन 2 अब भी उसी फॉर्मूले पर चलता दिखता है, जिसे दर्शक कई बार देख चुके हैं। घर के बाहर के विवादों को शो में लाना, निजी आरोप-प्रत्यारोप, हद से नीचे जाकर बहस करना, अपशब्दों का इस्तेमाल, इमोशनल ब्रेकडाउन और ऐसे झगड़े जो कई बार असली गेम से ज्यादा सुर्खियां बटोर लेते हैं। ऐसे में कई बार गेम पीछे छूट जाता है और ड्रामा आगे निकल जाता है।
वहीं अलायंस पूरी तरह उस चीज़ पर टिका है, जिसका वह वादा करता है—एक गेम। यहां बहस रणनीति, अलायंस, धोखे और परफॉर्मेंस को लेकर होती है। कंटेस्टेंट्स एक-दूसरे की पर्सनल लाइफ नहीं, बल्कि उनके गेमप्ले को चुनौती देते हैं। तीखी बहस के दौरान भी शो अपनी गरिमा बनाए रखता है और खिलाड़ी एक-दूसरे को बेवजह नीचा दिखाने के बजाय गेम में मात देने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि हर एपिसोड दिमाग और रणनीति की असली लड़ाई जैसा महसूस होता है, न कि सिर्फ सुर्खियां बटोरने की कोशिश।
टास्क्स में भी यही फर्क साफ दिखाई देता है। अलायंस में हाई-एनर्जी चैलेंज, लगातार आने वाले नए ट्विस्ट और बदलती रणनीतियां हर बार गेम को नया मोड़ देती हैं। हर एरीना खिलाड़ियों के सामने एक नई चुनौती और नई स्ट्रैटेजी लेकर आता है। वहीं लॉक अप सीजन 2 के टास्क्स कई बार पहले देखे हुए रियलिटी शो फॉर्मेट जैसे महसूस होते हैं।
शायद यही वजह है कि अलायंस एक ताजा बदलाव जैसा लगता है। यह विवादों के पीछे भागने के बजाय अपने गेमप्ले पर भरोसा करता है। जबरदस्ती के ड्रामे की जगह यहां रणनीति खुद रोमांच पैदा करती है। पुराने रियलिटी शो फॉर्मेट को दोहराने के बजाय यह अपना अलग फॉर्मेट बनाने की कोशिश करता है।
अगर यही रफ्तार बनी रही, तो अलायंस भारत के सबसे बड़े गेम-चेंजिंग रियलिटी फॉर्मेट्स में अपनी जगह बना सकता है। यह साबित कर सकता है कि दर्शक सिर्फ विवाद और हंगामे ही नहीं, बल्कि दिमाग, कॉम्पिटिशन और रणनीति में भी उतनी ही दिलचस्पी रखते हैं। जहां लॉक अप सीजन 2 अब भी पुराने फॉर्मूले और लो-लेवल ड्रामे पर खेलता नजर आता है, वहीं अलायंस रियलिटी शोज़ के नियम बदलने की कोशिश करता दिख रहा है।
