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सीधी में चलते-चलते लॉक हो रहे ई-रिक्शे, चालकों ने साइबर हस्तक्षेप की आशंका जताई; जांच की मांग तेज
Digital Desk
लालता चौक सहित कई क्षेत्रों में ई-रिक्शे अचानक बंद होने से चालक परेशान, तकनीकी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठी।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नई और चिंताजनक समस्या खड़ी हो गई है। पिछले दो से तीन दिनों के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि लिथियम बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शे अचानक चलते-चलते बंद हो जा रहे हैं या फिर लॉक हो रहे हैं। इस समस्या के कारण न केवल चालकों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर चालकों ने प्रशासन से तकनीकी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। बुधवार देर रात करीब 11 बजे शहर के व्यस्त इलाके लालता चौक के पास यह समस्या एक बार फिर सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों और ई-रिक्शा चालकों के अनुसार, एक साथ कई ई-रिक्शे अचानक रुक गए और उनके सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। वाहन स्टार्ट करने की कोशिश के बावजूद वे आगे नहीं बढ़ सके। मजबूरी में कई चालकों को अपने ई-रिक्शे सड़क से धक्का लगाकर हटाने पड़े। चालकों का दावा है कि यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं है। उनका कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से वाहनों को दूर से लॉक किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या तकनीकी विशेषज्ञ ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ई-रिक्शा चालकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि यह समस्या पिछले दो से तीन दिनों से लगातार देखने को मिल रही है। उनका दावा है कि जिले में अब तक 50 से अधिक ई-रिक्शे इस तरह अचानक लॉक होने की समस्या का सामना कर चुके हैं। हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन या परिवहन विभाग की ओर से नहीं की गई है। इसके बावजूद लगातार मिल रही शिकायतों ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। कई चालकों का कहना है कि जब वाहन अचानक बीच सड़क में बंद हो जाता है तो दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि व्यस्त सड़क या ट्रैफिक के बीच ऐसा होता है तो पीछे से आने वाले वाहन टक्कर मार सकते हैं। ऐसे में यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बन जाता है।
कुछ चालकों ने आशंका जताई है कि यह किसी प्रकार का साइबर हस्तक्षेप हो सकता है। उनका कहना है कि आधुनिक लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए मॉनिटरिंग की सुविधा होती है। इसी वजह से चर्चा में आए BAT-BMS ऐप की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किसी ऐप, सॉफ्टवेयर या अन्य तकनीकी कारण से यह समस्या उत्पन्न हो रही है या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है। आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम सुरक्षा और बैटरी की निगरानी के लिए लगाया जाता है। यदि सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी, नेटवर्क समस्या या सिस्टम फेलियर हो जाए तो वाहन के संचालन पर असर पड़ सकता है। वहीं, किसी भी साइबर हस्तक्षेप की पुष्टि केवल विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही संभव है।
ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि अधिकांश चालक तकनीकी रूप से अधिक जानकारी नहीं रखते। कई लोगों के पास स्मार्टफोन भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे वे अपने वाहनों के डिजिटल सिस्टम या संभावित अपडेट की जानकारी समय पर नहीं प्राप्त कर पाते। ऐसे में अचानक वाहन बंद हो जाने पर उन्हें समझ ही नहीं आता कि समस्या आखिर है क्या। स्थानीय चालकों का कहना है कि ई-रिक्शा ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। यदि वाहन बार-बार बंद होंगे तो उनकी दैनिक कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। कई चालकों ने बताया कि यात्रियों के सामने अचानक वाहन रुक जाने से उनकी विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है और लोग भविष्य में उनकी सेवाएं लेने से भी हिचक सकते हैं। घटना के बाद ई-रिक्शा चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि यह तकनीकी खराबी है तो उसे जल्द दूर कराया जाए और यदि किसी प्रकार की साइबर गतिविधि या जानबूझकर की गई छेड़छाड़ सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, BAT-BMS ऐप अथवा अन्य संबंधित तकनीकी सिस्टम की भी विशेषज्ञों से जांच कराई जाए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।
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सीधी में चलते-चलते लॉक हो रहे ई-रिक्शे, चालकों ने साइबर हस्तक्षेप की आशंका जताई; जांच की मांग तेज
Digital Desk
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नई और चिंताजनक समस्या खड़ी हो गई है। पिछले दो से तीन दिनों के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि लिथियम बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शे अचानक चलते-चलते बंद हो जा रहे हैं या फिर लॉक हो रहे हैं। इस समस्या के कारण न केवल चालकों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर चालकों ने प्रशासन से तकनीकी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। बुधवार देर रात करीब 11 बजे शहर के व्यस्त इलाके लालता चौक के पास यह समस्या एक बार फिर सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों और ई-रिक्शा चालकों के अनुसार, एक साथ कई ई-रिक्शे अचानक रुक गए और उनके सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। वाहन स्टार्ट करने की कोशिश के बावजूद वे आगे नहीं बढ़ सके। मजबूरी में कई चालकों को अपने ई-रिक्शे सड़क से धक्का लगाकर हटाने पड़े। चालकों का दावा है कि यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं है। उनका कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन के माध्यम से वाहनों को दूर से लॉक किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या तकनीकी विशेषज्ञ ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ई-रिक्शा चालकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि यह समस्या पिछले दो से तीन दिनों से लगातार देखने को मिल रही है। उनका दावा है कि जिले में अब तक 50 से अधिक ई-रिक्शे इस तरह अचानक लॉक होने की समस्या का सामना कर चुके हैं। हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन या परिवहन विभाग की ओर से नहीं की गई है। इसके बावजूद लगातार मिल रही शिकायतों ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। कई चालकों का कहना है कि जब वाहन अचानक बीच सड़क में बंद हो जाता है तो दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि व्यस्त सड़क या ट्रैफिक के बीच ऐसा होता है तो पीछे से आने वाले वाहन टक्कर मार सकते हैं। ऐसे में यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बन जाता है।
कुछ चालकों ने आशंका जताई है कि यह किसी प्रकार का साइबर हस्तक्षेप हो सकता है। उनका कहना है कि आधुनिक लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए मॉनिटरिंग की सुविधा होती है। इसी वजह से चर्चा में आए BAT-BMS ऐप की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किसी ऐप, सॉफ्टवेयर या अन्य तकनीकी कारण से यह समस्या उत्पन्न हो रही है या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है। आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम सुरक्षा और बैटरी की निगरानी के लिए लगाया जाता है। यदि सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी, नेटवर्क समस्या या सिस्टम फेलियर हो जाए तो वाहन के संचालन पर असर पड़ सकता है। वहीं, किसी भी साइबर हस्तक्षेप की पुष्टि केवल विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही संभव है।
ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि अधिकांश चालक तकनीकी रूप से अधिक जानकारी नहीं रखते। कई लोगों के पास स्मार्टफोन भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे वे अपने वाहनों के डिजिटल सिस्टम या संभावित अपडेट की जानकारी समय पर नहीं प्राप्त कर पाते। ऐसे में अचानक वाहन बंद हो जाने पर उन्हें समझ ही नहीं आता कि समस्या आखिर है क्या। स्थानीय चालकों का कहना है कि ई-रिक्शा ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। यदि वाहन बार-बार बंद होंगे तो उनकी दैनिक कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। कई चालकों ने बताया कि यात्रियों के सामने अचानक वाहन रुक जाने से उनकी विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है और लोग भविष्य में उनकी सेवाएं लेने से भी हिचक सकते हैं। घटना के बाद ई-रिक्शा चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि यह तकनीकी खराबी है तो उसे जल्द दूर कराया जाए और यदि किसी प्रकार की साइबर गतिविधि या जानबूझकर की गई छेड़छाड़ सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, BAT-BMS ऐप अथवा अन्य संबंधित तकनीकी सिस्टम की भी विशेषज्ञों से जांच कराई जाए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।
